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अयोध्या मामले में अब क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेगी बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
Thu, 26 Dec 2019 01:54 PM IST
दुष्यंत शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 26 Dec 2019 01:54 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्षकारों की पुनर्विचार याचिका बगैर बहस के खारिज होने के बाद अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेगी।
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इसके अलावा कमेटी बाबरी मस्जिद का मलबा मुस्लिम समुदाय को सौंपने के लिए भी कोर्ट में प्रार्थनापत्र देगी। यह निर्णय इस्लामिया डिग्री कॉलेज में बुधवार को मौलाना यासीन अली उस्मानी की अध्यक्षता में हुई कमेटी की बैठक में लिया गया।
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कमेटी के संयोजक एडवोकेट जफरयाब जीलानी ने बताया कि पुनर्विचार याचिका की सुनवाई होती तो इसमें बहस की जाती कि न्यायालय ने 1992 में बाबरी के विध्वंस को सिरे से अवैधानिक माना है, इसलिए इसके मलबे व दूसरी निर्माण सामग्री जैसे पत्थर, खंबे आदि को मुसलमानों के सुपुर्द किया जाए। इसके लिए प्रार्थनापत्र देकर कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा।
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शरीयत के मुताबिक मस्जिद की सामग्री किसी दूसरी मस्जिद या भवन में नहीं लगाई जा सकती है और न ही इसका अनादर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मलबे के संबंध में कोर्ट के निर्णय में स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसे में मलबे के हटाने के समय उसका अनादर होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि अब सिर्फ क्यूरेटिव पिटीशन की रेमिडी बाकी रह गई है लेकिन ये तभी संभव है जब सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ वकील अपना यह प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार हों। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2002 के रूपा अशोक हुर्रा मुकदमे में तय नियमों के अनुसार है।
इसके लिए बातचीत चल रही है। इस मौके पर मौलाना मेराज कमर, मोहम्मद कमर आलम, हिसामुद्दीन, हाजी महबूब, मोहम्मद आजम, शकील अहमद किदवई एडवोकेट, अबरार अहमद चीकू समेत अन्य व्यक्ति मौजूद रहे।
प्रदेश में अघोषित आपातकाल, पुलिस कर रही उत्पीड़न
बैठक में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ हो रहे विरोध को समर्थन देने का निर्णय लिया गया। जीलानी ने कहा कि क्या वजह है कि विरोध प्रदर्शन में हिंसा केवल भाजपा शासित राज्यों में हुई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अघोषित आपातकाल लगा है। सरकार हर विरोध की आवाज का दमन करने पर तुली है। बैठक में निर्दोष प्रदर्शनकारियों व अन्य व्यक्तियों को रिहा करने के साथ ही मृतकों को 50 लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा देने की मांग की गई। बैठक में आगे की रणनीति बनाने के लिये कमेटी के संयोजक को अधिकृत किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अघोषित आपातकाल लगा है। सरकार हर विरोध की आवाज का दमन करने पर तुली है। बैठक में निर्दोष प्रदर्शनकारियों व अन्य व्यक्तियों को रिहा करने के साथ ही मृतकों को 50 लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा देने की मांग की गई। बैठक में आगे की रणनीति बनाने के लिये कमेटी के संयोजक को अधिकृत किया गया।