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'बाबरी मस्जिद की तरह गिरा दें बीफ बेचने वाले होटल'

Mon, 05 Oct 2015 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 05 Oct 2015 09:34 AM IST
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Azam Khan targets to cow protectors and modi's followers.

अल्पसंख्यक कल्याण व नगर विकास मंत्री आजम खां ने रविवार को चुटकी ली कि जस्टिस काटजू के गोमांस खाने वाले बयान पर मोदी भक्त और गोभक्त चुप्पी क्यों साध गए।

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काटजू का बयान उन लोगों के लिए चुनौती ही नहीं बल्कि चुल्लू भर पानी में डूब मरने के लिए काफी है जो सांप्रदायिक भाषा बोलते हैं। गुलाबी क्रांति लाने वाले केंद्र में बैठे सत्ताधीशों को चाहिए कि कानून बनाकर पूर्वोत्तर राज्यों खासकर नगालैंड, मेघालय और मिजोरम सहित पूरे देश में गोवध पर पाबंदी लगा दें।
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आजम ने तंज कसते हुए कहा, हर गोभक्त की यह जिम्मेदारी है कि वे देखें कि आज के बाद किसी भी पांच सितारा होटल के मेन्यू में बीफ की कीमत न लिखी हो। अगर लिखी जाती है तो ऐसे सभी होटलों की ईंट से ईंट उसी तरह बजा दी जाए जैसे बाबरी मस्जिद की बजाई गई थी।
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कहा कि कमजोरों को मारने वाले और बेगुनाहों को सजा देने वालों में जस्टिस काटजू के बयान का विरोध करने की हिम्मत क्यों नहीं पैदा हो पाई।

गाय से बने दूसरे प्रोडक्ट पर भी लगे प्रतिबंध

Azam Khan targets to cow protectors and modi's followers.

आजम खां ने कहा कि काटजू ने यह बयान भी तब दिया जब वह धर्मनगरी वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी में भाग लेने जा रहे थे।  संगोष्ठी में सिर्फ गोभक्त ही नहीं, बड़ी संख्या में मोदी भक्त भी थे लेकिन कोई नहीं बोला। किसी की हिम्मत नहीं हुई।

इसके लिए मोदी भक्तों और गोभक्तों को गिरेबान में झांक कर अपनी मर्दानगी से सवाल करना चाहिए। आजम ने कहा, हिम्मत न पैदा होने की एक वजह शायद यह रही क्योंकि  गोमांस खाने की बात कहने वाला और उसका समर्थन करने वाला कोई गरीब मुसलमान नहीं था।

नगर विकास मंत्री ने कहा, गाय का सम्मान कश्मीर से कन्याकुमारी तक होना चाहिए। प्रतिबंध सिर्फ गोवध और बीफ की बिक्री पर ही न लगे बल्कि गाय से बने दूसरे प्रोडक्ट पर भी लगा देना चाहिए।

गाय से बनी दवाएं और गाय के चमड़े से बने पर्स, बेल्ट, जूता आदि को बाजारों से हटा देना चाहिए। जो हटाने को तैयार न हो उसे गोहत्या का दोषी मानते हुए सजा दी जाए।

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