आजम बोले, ‘मुसलमानों के घर में पिल्ले ही पैदा नहीं होते’
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सूबे के काबीना मंत्री आजम खां ने ‘पिल्ला’ बयान देकर चौंका दिया है। आजम खां का कहना है कि मुसलमानों के घर में पिल्ले ही पैदा नहीं होते। विपक्षी दलों की सियासी सोच पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि किसी को पिल्ला और गद्दार न कहो।
नगर विकास मंत्री आजम खां राजधानी के जलालपुर में नवनिर्मित अंडरपास के एप्रोच रोड के उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के पहले एक पत्रिका को इंटरव्यू देते वक्त तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात दंगों पर सफाई देते हुए कहा था कि अगर आप कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कोई कुत्ता कार के पहिए के नीचे आ जाए तो आप को दुख होता है। उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ था।
वहीं, कार्यक्रम में आजम मुसलमानों पर हो रही सियासत पर खूब बरसे। उनका कहना था कि यह सच है कि सियासत में काम करने वाले सियासी नुकसान भी देखते हैं लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोच रचनात्मक हो। किसी को पिल्ला न कहें। किसी को गद्दार न कहें।
यह भी न कहें कि मुसलमानों के घर में पिल्ले पैदा होते हैं। मैं अगर याकूब मेनन की फांसी पर कुछ नहीं बोलता, तो कहा जाता है कि कुछ बात तो है। अभी कहा जाएगा कि बड़ी बात करता है। पाकिस्तानी एजेंट है।
आजम खां बोले, मैं ईमानदार हूं
कार्यक्रम में आजम ने कहा कि मुझ पर आरोप लगाना गलत है। हम अच्छे और ईमानदार इंसान हैं। हमारा केवल एक बैंक खाता है..सैलरी एकाउंट। कभी घूस नहीं ली। कोई विदेशी खाता नहीं। कोई सीबीआई जांच नहीं। विधानसभा में खुद नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में लालजी टंडन अपने ही विधायक के विरोध में आ गए थे। उन्होंने विधायक से माफी मंगवाते हुए कहा था कि आजम खां के बारे में कुछ भी कहा जाए। बेईमान नहीं कह सकते।
20 लाख आपके खाते में आ गए
हमारे वजीर-ए-आजम ने कहा कि सभी को 20 लाख मिल जाएंगे। मैं पूछता हूं कि किसी को मिले क्या? फिर कटाक्ष करते हुए कहा कि सब्र रखिए। बादशाह का कहा झूठा नहीं हो सकता। एक दिन सबको मिलेंगे। हर परिवार देश का करोड़पति है। विकास में बाधा बनने पर केंद्र सरकार की खिंचाई भी की। कहा कि मैट्रो का काम नहीं होने दे रहे। राज्य सरकार अपने दम पर मैट्रो चलाएगी।
पत्थर की मूर्ति में पर्स भी असली नहीं
आजम खां ने कहा कि कुछ लोगों ने पत्थर जुटाकर पार्क अपने लिए बनाए। उसमें अपनी मूर्ति भी लगा ली। इसमें लगा पर्स भी पत्थर का रहा। अब पर्स असली होता तो कुछ गरीबों का भला तो हो जाता।