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आजम बोले, आमिर की जान तब बची जब मैं उनका साया बना

Sat, 19 Dec 2015 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 19 Dec 2015 12:21 AM IST
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Azam Khan says I saved Amir life.

यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां ने एक कार्यक्रम में कहा कि देश में आमिर खां को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ। बहुत बहस हुई। शायद आमिर की जान इसलिए बची क्योंकि मैं साया बनकर उनके साथ आ गया।

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आजम शुक्रवार को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के मौके पर गन्ना संस्थान में आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किरन का कहना है कि जब मैं सुबह का अखबार पढ़ती हूं तो मेरी रूह कांप जाती है।
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वह इस तकलीफ को किससे बयां करेंगी। उन्होंने अपने शौहर से ये बात कही थी। समाज व सियासत के ठेकेदारों को किरन से बात कर उनकी शंका दूर करनी चाहिए थी।

आजम बोले यह बात आमिर ने नहीं कही बल्कि हिंदुस्तान की एक बेटी ने कही, जिसका धर्म हिंदू है। वह शादी से पहले हिंदू थीं, शादी के बाद हिंदू हैं, आज भी वह हिंदू हैं और उनके बच्चे भी हिंदू हैं। शाहरूख खान के साथ क्या हुआ, उन्होंने माफी भी मांग ली। फिर भी उन्हें बख्शा नहीं जा रहा है।
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'आप सियासत की बहुत बड़ी ताकत बनने वाले हो'

Azam Khan says I saved Amir life.

आजम ने अल्पसंख्यक समुदाय से कहा कि अगला चुनाव आपकी समझदारी पर निर्भर करेगा। इसी से यह चुनाव जीता व हारा जाएगा। आप सियासत की बहुत बड़ी ताकत बनने वाले हो। इससे हमारा और आपका दिमाग खराब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं देखना चाहिए कि किसका नुकसान होगा।

हमें तो सिर्फ यह देखना चाहिए कि हमारे किस कदम से हमारा फायदा होगा। हमें इन चीजों पर नजर रखने के साथ ही मजबूत सियासी फैसले लेने होंगे।

उन्होंने कहा कि एक बार फिर सूबे में फसाद कराने की कोशिश की जाएगी। क्योंकि इनके पास कोई मुद्दा ही नहीं है। चुनाव के समय फिर किसी न किसी बात को लेकर मेरे ऊपर पाबंदी लगा दी जाएगी। इस बार तो मैंने पाबंदी का पूरी तरह पालन किया। लेकिन अगले चुनाव में यदि पाबंदी लगी तो उसे मैं नहीं मानूंगा। जेल जाना पसंद करूंगा।

आजम ने कहा कि हम सियासत में ऐसी जगह बैठे हैं जहां अपनों के भी पत्थर आते हैं। हमने यूएनओ को पत्र लिखा तो मेरे ऊपर वतन से गद्दारी का आरोप लगा। हमें भी पता है यूएनओ के पास कोई ताकत नहीं है। लेकिन हम यह जानते हैं कि भारत यूएनओ का सदस्य है। हमने भी चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं। जब हम आतंकवाद के खिलाफ वहां आवाज उठाते हैं तो हमें भी यह जवाब देना होगा कि हमारे यहां इंसानी हकों की रक्षा हो रही है या नहीं? यह देशद्रोही काम नहीं है। जिन्होंने मुझपर आरोप लगाए हैं उन्हें खुद अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।

गंगा सिर्फ हिंदुओं के लिए ही जरूरी नहीं

Azam Khan says I saved Amir life.

कार्यक्रम का आयोजन अल्पसंख्यक आयोग ने किया। अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद ने अतिथियों का स्वागत किया और संचालन आयोग के सदस्य शफी आजमी ने।

गाय की सियासत करने वालों ने बीफ एक्सपोर्टर से लिए 200 करोड़
आजम ने कहा कि गाय के नाम पर सियासत करने वालों ने हाल ही में बीफ के बड़े एक्सपोर्टर से 200 करोड़ रुपये लिए हैं। भाजपा को इसका जवाब देते नहीं बन रहा है। हमारा गाय या गंगा का मामला मुल्क की दोस्ती या दुश्मनी से हरगिज न जोड़ा जाए।

गंगा हिंदुओं के लिए ही नहीं बल्कि बल्कि हर एक व्यक्ति जो इस धरती पर रहता है उसके लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जब सियासत के मैदान में लोगों के पास कुछ नहीं रह जाता है तो उनकी नजर हमारी तरफ पड़ती है। अब इलेक्शन ज्यादा दूर नही हैं। हम यहां पर जमा हैं तो यह भी हमारी सियासत का एक हिस्सा है।

भाजपा बिहार चुनाव जीतती तो पूरा देश जल रहा होता
आजम ने कहा अगर भाजपा को बिहार चुनाव में सफलता मिल जाती तो आज पूरा हिंदुस्तान जल रहा होता। यूपी के तो आधे जिलों में कर्फ्यू लगा होता और हमारी बस्तियों की रोशनी से दिवाली मनाई गई होती। लेकिन एक सूबे के नतीजों ने फासिस्ट ताकतों को अपने घरों में घुसने को मजबूर कर दिया।

अल्पसंख्यक आयोग के नाम से है गवर्नर को चिढ़

Azam Khan says I saved Amir life.

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग मजबूत हो इसकी कोशिशें उनकी ओर से जारी हैं। लेकिन इस नाम से गवर्नर साहब को बहुत चिढ़ है। बहुत नाराज रहते हैं। हमने गलत नहीं कहा था कि उन्हें अयोध्या के किसी मंदिर का पुजारी होना चाहिए।

...और यह अच्छी बात भी है कि मुझे दिल्ली के जामा मस्जिद की इमामत मिल जाए तो मैं सियासत छोड़ दूंगा। लेकिन देंगे थोड़े ही...वे तो अपने बेटे को देंगे। जामा मस्जिद के इमाम पर निशाना साधते हुए कहा कि सीढ़ियों पर बैठे फकीर से भी 500 रुपये की रसीद कटवा लेंगे। फिर हम क्या उम्मीद करते हैं।

क्या बदनसीबी है, एक मस्जिद का इमाम मुझे काफिर कह रहा है। इसके बाद आजम ने कलमा पढ़कर यह कहा कि मैंने तो आवामी तौर पर कलमा पढ़ लिया। अब वे भी आवामी तौर पर कमला पढ़ें।

पहली बार आजम के साथ एक मंच पर दिखे मुस्लिम नेता
पहली बार आजम खां के साथ दूसरे कद्दावर मुस्लिम नेता भी एक मंच पर साथ दिखे। इससे पहले कभी आजम के कार्यक्रम में दूसरे मंत्री उनके साथ नहीं दिखते थे। लेकिन इस कार्यक्रम में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री शाहिद मंजूर, रेशम एवं वस्त्र उद्योग मंत्री महबूब अली, खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री इकबाल महमूद, ऊर्जा राज्यमंत्री वसीम अहमद व जावेद आब्दी के अलावा बदायूं के विधायक आबिद रजा व बलिया के विधायक जियाउद्दीन रिजवी मौजूद थे। कार्यक्रम के आयोजक अल्पसंख्यक आयोग ने सभी को शॉल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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