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'मनमानी' पर लगी रोक तो फिर आगबबूला हुए आजम खां

Fri, 05 Jun 2015 01:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 05 Jun 2015 01:36 AM IST
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Azam angry over Jauhar University.

अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री आजम खां एक बार फिर खफा हो गए हैं। इस बार उनकी नाराजगी संस्कृति विभाग के अधिकारियों पर है। रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में बनने वाले संस्कृति विभाग के पंडाल को लेकर जो शर्तें लगाई गई हैं उससे आजम ज्यादा नाराज हैं।

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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने संस्कृति विभाग को पत्र लिखकर अनुदान की शर्तों पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे मानने से इन्कार कर दिया है।

संस्कृति विभाग के विशेष सचिव राम विशाल मिश्र को लिखे पत्र में रजिस्ट्रार आरए कुरैशी ने यहां तक कहा कि मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए सरकार ने जो 10 करोड़ रुपये अनुदान में दिए हैं, विश्वविद्यालय उसे भी सरकारी कोष में जमा करवाने की अनुमति मांगता है।
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कहा, हम ऐसा कोई अनुदान स्वीकार नहीं करेंगे जो विश्वविद्यालय के अस्तित्व को खतरे में डाल दे।

अभी तक मिले सिर्फ दस करोड़ रुपये

Azam angry over Jauhar University.

रजिस्ट्रार ने लिखा है कि मीडिया में यह खबरें आ रही हैं कि सरकार ने जौहर विश्वविद्यालय पर सरकारी खजाना लुटा दिया है। जबकि हकीकत यह है कि 2011 से अब तक मात्र 10 करोड़ रुपये की धनराशि ही निर्माण कार्यों के लिए मिली है।

यह धनराशि निर्माण एजेंसियों को दी गई है न कि विश्वविद्यालय को। यह विश्वविद्यालय चंदे से बना है।

उन्होंने कहा, संस्कृति विभाग इस पंडाल के नाम पर बार-बार भ्रमित कर रहा है। यह केवल बदनामी का सबब बन रहा है। अनुदान, दान के बराबर होता है। ऐसे में दानी को ऐसी शर्तें नहीं लगानी चाहिए जिससे दान लेने वाले को परेशानी हो जाए।

कुछ अधिकारी विवि को करना चाहते हैं बर्बाद
पत्र में कहा गया है कि कुछ अफसर इस विश्वविद्यालय को बर्बाद करना चाहते हैं। ये वही अफसर हैं जो मुस्लिम विरोधी मानसिकता रखते हैं और गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षित नहीं देखना चाहते।

सिर्फ समय लंबा करने की नीयत से कर रहे हैं ऐसा

Azam angry over Jauhar University.

सरकार में उच्च पदों पर बैठे कुछ अधिकारी विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। ये केवल समय लंबा करने की नीयत से ऐसे षडयंत्र रच रहे हैं।

विवि में बनने वाले इस पंडाल में किसी भी कीमत पर जिला प्रशासन का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। इसमें राजनीतिक दलों की रैलियां, जिला प्रशासन की गोष्ठियां आदि नहीं होने दी जाएंगी।

यह है मामला
संस्कृति विभाग यहां 12 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य पंडाल बना रहा है लेकिन विभाग ने इसके लिए जो शर्तें लगाई हैं उसे विश्वविद्यालय स्वीकार नहीं कर पा रहा है। विभाग ने शर्त लगाई है कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार को शासकीय उपयोग के लिए इस पंडाल का निशुल्क उपयोग करने देगा। पंडाल का स्वामित्व भी संस्कृति विभाग ने अपने पास रखा है।

विश्वविद्यालय इसे न तो बेच सकता है, न ही किसी को हस्तांतरित कर सकता है। साथ ही डीएम को सारी शर्तें लागू कराने के लिए अधिकृत कर दिया है। यही बात आजम को अखर रही है।

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