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अयोध्या: रामनगरी में तो अमन कायम है भइया!, बस बाहरी तत्वों से डर लगता है
Fri, 08 Nov 2019 01:26 PM IST
शाहरुख खान
नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Nov 2019 01:26 PM IST
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एक दुकान पर चर्चा करते हिंदू-मुस्लिम समाज के लोग
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या मामले में आने वाले संभावित फैसले के बीच रामनगरी में अमन-चैन की बयार बह रही है। एहतियात के हिसाब से चाक-चौबंद हो चुकी अयोध्या में सभी को बस फैसले का इंतजार है। आध्यात्मिक, धार्मिक नगरी में चाय पर चर्चा हो, या फिर कोई शादी, जन्मोत्सव का कार्यक्रम अयोध्या विवाद में आने वाले फैसले की चर्चा छिड़ ही जाती है।
गुरुवार को भी अशर्फी भवन चौराहे पर हिंदू-मुस्लिम एक साथ बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए अयोध्या विवाद पर चर्चा करते मिले तो रामनगरी का सांप्रदायिक सौहार्द की डोर मजबूत होती दिखी। यहां बैठे लोग बोले कि अयोध्या में तो अमन कायम है। भइया...बस बाहरी तत्वों से डर लगता है। हमारा भाईचारा आज का नहीं है, हमारे बीच न कोई तल्खी है और न ही कोई तनाव है।
कुश्ती संघ के पदाधिकारी घनश्याम दास कहने लगे हम तो रोज यहां एक-दूसरे से मिलते हैं। साथ चाय पीते हैं। जब तक मिलते नहीं, मन नहीं मानता, यह भाईचारा आज का नहीं है। पास ही बैठे अताउल्ला राइनी चाय का कुल्हड़ नीचे रखते हुए बोलते हैं कि 92 जैसे हालातों में हिंदुओं ने ही मुस्लिमों को पनाह न दी होती तो बड़ी घटना होती।
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यहां तो हमेशा अमन रहा है, बस बाहरी लोगों से डर लगता है, क्योंकि यही भाईचारा बिगाड़ते हैं। 74 वर्षीय मोहम्मद उस्मान अंसारी कहते हैं अब फैसला आ ही जाना चाहिए, इसके बाद थोड़ी देर रुकते हैं...फिर बोलते हैं कि हमने वो हालात देखे हैं, जो हमारी पीढ़ी कभी न दिखे, बावजूद इसके हमारा सौहार्द कभी नहीं डिगा।
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गुरुवार को भी अशर्फी भवन चौराहे पर हिंदू-मुस्लिम एक साथ बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए अयोध्या विवाद पर चर्चा करते मिले तो रामनगरी का सांप्रदायिक सौहार्द की डोर मजबूत होती दिखी। यहां बैठे लोग बोले कि अयोध्या में तो अमन कायम है। भइया...बस बाहरी तत्वों से डर लगता है। हमारा भाईचारा आज का नहीं है, हमारे बीच न कोई तल्खी है और न ही कोई तनाव है।
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कुश्ती संघ के पदाधिकारी घनश्याम दास कहने लगे हम तो रोज यहां एक-दूसरे से मिलते हैं। साथ चाय पीते हैं। जब तक मिलते नहीं, मन नहीं मानता, यह भाईचारा आज का नहीं है। पास ही बैठे अताउल्ला राइनी चाय का कुल्हड़ नीचे रखते हुए बोलते हैं कि 92 जैसे हालातों में हिंदुओं ने ही मुस्लिमों को पनाह न दी होती तो बड़ी घटना होती।
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यहां तो हमेशा अमन रहा है, बस बाहरी लोगों से डर लगता है, क्योंकि यही भाईचारा बिगाड़ते हैं। 74 वर्षीय मोहम्मद उस्मान अंसारी कहते हैं अब फैसला आ ही जाना चाहिए, इसके बाद थोड़ी देर रुकते हैं...फिर बोलते हैं कि हमने वो हालात देखे हैं, जो हमारी पीढ़ी कभी न दिखे, बावजूद इसके हमारा सौहार्द कभी नहीं डिगा।
फैसला किसी के पक्ष में आए हम मानने को तैयार हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक जगदंबा प्रसाद मिश्र उनकी बात का समर्थन करते हुए कहते हैं कि अब तो फैसले का इंतजार है, जल्द फैसला आ जाए तो अच्छा होगा अब और इंतजार नहीं किया जाता।
सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापक रामजीत दूबे कहते हैं कि अयोध्या में कोई अफवाह, कोई खौफ नहीं है, मुस्लिम भाइयों को डरने की जरूरत नहीं है। हम हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं और रहेंगे। गुलाम अहमद कहते हैं कि हमारी एकता की मिसाल तो दूर-दूर दी जाती है।
हिंदू भाई के घर शादी ब्याह होता है तो हम जाते है वो हमारे घर आते हैं। हिंदू-मुस्लिम यहां हमेशा एक दूसरे के पूरक रहे हैं। गड़बड़ तो अराजकतत्व करते हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए।
तभी गुलाम के ठीक बगल बैठे प्रधानाचार्य संत प्रसाद मिश्र बोलते हैं कि रामनगरी सांझी संस्कृति की विरासत है। यहां इस्लामिक आस्था भी खूब फली-फूली है, इसकी ताकीद जगह-जगह आप को मिल जाएगी। मुस्लिम व हिंदु एक साथ वर्षों से जीवन यापन खुशनुमा माहौल में करते आ रहे हैं, हां ये बात सही है कि बाहरी तत्वों से खतरा हमेशा रहा है।
सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापक रामजीत दूबे कहते हैं कि अयोध्या में कोई अफवाह, कोई खौफ नहीं है, मुस्लिम भाइयों को डरने की जरूरत नहीं है। हम हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं और रहेंगे। गुलाम अहमद कहते हैं कि हमारी एकता की मिसाल तो दूर-दूर दी जाती है।
हिंदू भाई के घर शादी ब्याह होता है तो हम जाते है वो हमारे घर आते हैं। हिंदू-मुस्लिम यहां हमेशा एक दूसरे के पूरक रहे हैं। गड़बड़ तो अराजकतत्व करते हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए।
तभी गुलाम के ठीक बगल बैठे प्रधानाचार्य संत प्रसाद मिश्र बोलते हैं कि रामनगरी सांझी संस्कृति की विरासत है। यहां इस्लामिक आस्था भी खूब फली-फूली है, इसकी ताकीद जगह-जगह आप को मिल जाएगी। मुस्लिम व हिंदु एक साथ वर्षों से जीवन यापन खुशनुमा माहौल में करते आ रहे हैं, हां ये बात सही है कि बाहरी तत्वों से खतरा हमेशा रहा है।
वैवाहिक आयोजनों को लेकर लोग संशय में
राममंदिर/बाबरी मस्जिद के पक्ष से जुड़े लोगों से ज्यादा फैसले का उन्हें इंतजार है जिनके घरों में नवंबर में मांगलिक कार्य होने हैं। लोग फैसले की संभावनाओं को लेकर संशय में हैं। फैसले के वक्त कहीं कर्फ्यू तो नहीं लग जाएगा, माहौल तो नहीं बिगड़ जाएगा इस तरह की शंका कई परिवारों में देखने को मिली।
शादी वाले परिवार अभी से प्रशासन से संभावित सख्ती में रियायत के लिए संपर्क साध रहे हैं। आचार्य रामानंद महाराज के यहां 9 नवंबर को शादी है, अखिलेश तिवारी की शादी 21 नवंबर, शितांशु तिवारी की बहन की शादी 19 नवंबर को है, सभी मांगलिक आयोजन को लेकर संशय में हैं लेकिन किसी का हौसला नहीं डिगा है, इन सबको बेसब्री से फैसले का इंतजार है।
शादी वाले परिवार अभी से प्रशासन से संभावित सख्ती में रियायत के लिए संपर्क साध रहे हैं। आचार्य रामानंद महाराज के यहां 9 नवंबर को शादी है, अखिलेश तिवारी की शादी 21 नवंबर, शितांशु तिवारी की बहन की शादी 19 नवंबर को है, सभी मांगलिक आयोजन को लेकर संशय में हैं लेकिन किसी का हौसला नहीं डिगा है, इन सबको बेसब्री से फैसले का इंतजार है।