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सोनिया के लिए खामोशी से प्रचार करती रही गांधी-नेहरू परिवार की अहम शख्स, प्रियंका ने कहा- मेरी बहन

Thu, 23 May 2019 08:29 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 23 May 2019 08:29 AM IST
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Avantika Nehru campaigned for Sonia Gandhi in   Raebareli.
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी।

रायबरेली लंबे अरसे से गांधी परिवार का गढ़ रहा है। चुनाव के वक्त हर बार राहुल गांधी, प्रियंका गांधी व सोनिया गांधी यहां प्रचार करते हैं। मगर इस बार गांधी-नेहरू परिवार की एक अन्य अहम सदस्य ने भी खामोशी से सोनिया गांधी के लिए प्रचार किया। पूर्व मंत्री स्वर्गीय अरुण नेहरू की बेटी अवंतिका ने इस बार सोनिया के लिए यहां प्रचार किया। जिनका परिचय सभाओं में प्रियंका ने अपनी बहन के रूप में करवाया।

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दरअसल, राजीव गांधी मंत्रिमंडल में मंत्री रहे अरुण ने बोफोर्स का मामला तूल पकड़ने पर तत्कालीन पीएम से किनारा कर लिया था। वे तब कांग्रेस छोड़कर वीपी सिंह के साथ चले गए। 1999 के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अरुण नेहरू के खिलाफ प्रचार किया था। अब क्षेत्र में प्रियंका के साथ अवंतिका के घूमने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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सियासी जानकारी इसे अरुण नेहरू और गांधी परिवार की तीन दशक पुरानी 'दुश्मनी' का अंत मान रहे हैं। रायबरेली की एक सभा में प्रियंका ने अवंतिका का परिचय कराते हुए कहा कि अवंतिका मेरी बहन है और पूर्व सांसद अरुण नेहरू की बेटी है।

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इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी सरकार में बने थे मंत्री

बता दें कि 1980 के चुनाव में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी आंध्र प्रदेश की मेडक और यूपी की रायबरेली सीट से चुनाव लड़ी थीं। बाद में उन्होंने रायबरेली से इस्तीफा देकर यहां से अपने भतीजे अरुण नेहरू को चुनाव लड़ाया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव सरकार में अरुण आंतरिक सुरक्षा मंत्री बने।

बोफोर्स घोटाला का मामला तूल पकड़ने पर अरुण और राजीव के संबंध खराब हो गए। अरुण वीपी सिंह के साथ चले गए और 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सतीश शर्मा के खिलाफ रायबरेली से मैदान में उतरे तब प्रियंका ने अरुण के खिलाफ चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि एक ऐसा व्यक्ति जिसने मेरे पिता के मंत्रिमंडल में रहते हुए गद्दारी की थी जिसने अपने भाई की पीठ में छुरा भोंका। इसका असर यह हुआ कि अरुण नेहरू चुनाव हार गए। बाद में सतीश शर्मा ने सोनिया गांधी के लिए यह सीट खाली कर दी।

प्रियंका के बेटे ने दी अरुण नेहरू को मुखाग्नि

वर्षों बाद नेहरू और गांधी परिवार 2013 में एक साथ आए जब अरुण गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती थे। राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा उन्हें देखने के लिए अस्पताल गए। अरुण के निधन पर उन्हें मुखाग्नि प्रियंका के बेटे रेहान ने दी थी अब प्रियंका बड़े उत्साह के साथ अवंतिका का परिचय करा रही है।

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