इन महीनों में न करें कोई शुभ काम
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नव संवत्सर ‘कीलक’ 21 मार्च से शुरू हो रहा है। इसमें हर दूसरे दिन शहनाइयों की गूंज घरों में और बैंड बाजों की धूम सड़कों पर सुनाई देगी।
ज्योतिषियों के मुताबिक इस बार नव संवत्सर में 94 शुभ वैवाहिक लग्नें मिलेंगी। लग्नों का ये सिलसिला गर्मियों के अलावा जाड़ों में भी जारी रहेगा।
पूरे संवत्सर मे सबसे ज्यादा 21 लग्नें मई में मिलेंगी, जबकि सबसे कम 5 लग्नें नवंबर महीने में रहेंगी।
अधिकमास, चार्तुमास और खरमास के चलते लगभग छह माह से अधिक समय तक लग्नें नहीं है।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार 21 मार्च से शुरू हो रहे नवसंवत्सर में अधिक मास-मलमास होने के बावजूद विवाहादि कामों के लिए 94 लग्नें मिल रहीं हैं।
छह महीने तक कोई शुभ काम नहीं
17 जून से अधिक मास या मलमास आरंभ होने के कारण छह माह तक ब्याह, शादियां रुकी रहेंगी। 16 जुलाई को मलमास खत्म होने के बाद लग्नें नहीं हैं।
उसके बाद 27 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही देवता सो जाएंगे, चातुर्मास शुरू होगा। 22 नवंबर को देवता जागेंगे और शुरू होगी लग्न।
इस प्रकार 15 जून के बाद अगली लग्न पांच महीने बाद 22 नवंबर को मिलेगी। उसके बाद 14 दिसंबर के बाद से खरमास होने के चलते अगले एक महीने तक लग्नें नहीं रहेंगी।
इस प्रकार पूरे साल भर लगभग 6 महीने से भी ज्यादा समय तक ज्योतिषीय गणना सटीक न बैठने के कारण विवाहादि काम रुके ही रहेंगे।
15 मार्च को दोपहर बाद मीन राशि पर सूर्य के जाने के कारण खरमास शुरू होगा। इस दौरान शादी ब्याह नहीं होंगे। 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने केबाद ही सहालगें 16 अप्रैल से दोबारा शुरू होंगी।