कहां गईं महंगे दामों पर खरीदी गईं कोरोना किट, नहीं पहुंची आशा बहू और एएनएम के पास
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ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना से बचाव को लेकर शासन की सख्ती के बावजूद स्थानीय स्तर पर किस तरह की बेफ्रिकी है। अंबेडकरनगर के डीपीआरओ शेषनाथ पाण्डेय बताते हैं कि ज्यादातर ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर पहुंच चुके हैं। जिन जगहों पर उपकरण नहीं पहुंचे हैं, वहां उपलब्ध कराया जाएगा।
सीतापुर: 2800 की किट 3400 में खरीदी
सीतापुर जिले की ग्राम पंचायतों में 28 से 34 सौ रुपये तक में पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर (कोरोना किट) खरीदी गई है। ब्लॉकवार स्थित ग्राम पंचायतों में खरीद की गई। ज्यादातर ब्लॉकों में 28 सौ रुपये में ही खरीद हुई है। कुछ ब्लॉकों में इससे अधिक मूल्य पर खरीद हुई है। 1605 किटें खरीदी गई हैं।
हालांकि शासन ने इसके लिए कोई रेट फिक्स न करके एक-एक जिले में सीडीओ द्वारा की गई खरीद का उल्लेख आदेश में किया है। जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की केन्द्रीय खरीद नहीं हुई है। निर्धारित दाम के आसपास ही खरीद ग्राम पंचायतों ने की है। शासन के जो आदेश प्राप्त होंगे। उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम प्रधानों को नहीं खबर, खरीदे गए कौन से उपकरण
बहराइच के पयागपुर में कोरोना काल में मेडिकल उपकरणों की खरीद के नाम पर जमकर धांधली की गई है। एक ग्राम पंचायत में अधिकारियों ने 6004 रुपये के उपकरण खरीदे हैं। इसी तरह कुल 72 ग्राम पंचायतों में मेडिकल उपकरणों की खरीद कर ली गई है।
धांधली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिना कोटेशन और टेंडर के ही मेडिकल उपकरणों की खरीद कर ली गई। इससे ग्राम प्रधानों में भी आक्रोश है। इसकी जानकारी ग्राम प्रधानों को नहीं है। अब भुगतान के लिए ग्राम पंचायतों पर दबाव बनाया जा रहा है।
इसको लेकर प्रधान संघ के अध्यक्ष ने सवाल उठाए हैं। पयागपुर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रतिनिधि गिरीश चंद्र शुक्ला का कहना है कि बिना सूचना के ही पंचायत निधि से सामान की खरीद ली गई। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके लिए आंदोलन किया जाएगा।
शासनादेश से पहले ही कर दिया भुगतान
सुल्तानपुर जिले में कोरोना किट (पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर व सैनिटाइजर) की आपूर्ति का भुगतान शासनादेश जारी होने के बाद भी होता रहा। भुगतान के लिए इसकी मॉनीटरिंग पंचायतराज विभाग के शासकीय व्हाट्स एप ग्रुप से होती रही। ग्राम पंचायतों से भुगतान कराने के लिए एडीओ पंचायतों पर दबाव बनाया जाता रहा।
लंभुआ भाजपा विधायक देवमणि ने अपनी शिकायत में पंचायतराज विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप पर की जा रही मॉनीटरिंग का उल्लेख किया है। फिलहाल डीएम सी. इंदुमती ने पिछले दिनों जारी सूचना व बयान में कहा है कि शासनादेश जारी होने के पहले ही 304 ग्राम पंचायतों ने भुगतान कर दिया था। शासनादेश की जानकारी मिलने के बाद भुगतान पर रोक लगा दी गई।