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चीन के प्रयास से अनोखी पहल, सूखे महोबा में ऐसे बारिश कराएगी योगी सरकार

Mon, 12 Mar 2018 03:28 PM IST
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 Mar 2018 03:28 PM IST
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artificial rain will be made in mahoba
- फोटो : डेंमो
बरसों से सूखे की मार झेल रहे महोबा को राहत देने के लिए योगी सरकार चीन  की मदद से मई में कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी कर रही है।  प्रदेश में यह अपने तरह का यह पहला प्रयोग होगा।
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प्रयोग सफल रहा तो बुंदेलखंड के दूसरे जिलों को भी इस तकनीक का लाभ मिलेगा। पिछले 5-6 साल महोबा में सबसे कम बरसात को देखते हुए कृत्रिम बारिश की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई है।
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सूत्रों की मानें तो केंद्र के माध्यम से चीन के अफसरों से एक दौर की बात हो चुकी है। चीन कृत्रिम बारिश कराने को तैयार है, लेकिन तकनीक देने से इन्कार किया है।
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सरकार ने चीन के अफसरों से कहा है  कि वह तकनीक भले न दे, लेकिन कृत्रिम बारिश के लिए होने वाले ग्लोबल टेंडर में भागीदारी करें।  वह अपनी किसी एजेंसी या कंपनी के माध्यम से महोबा में इसका कॉन्ट्रैक्ट ले ले। सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल टेंडर में भागीदारी के लिए सहमति बन चुकी है। 

 

92 प्रतिशत तक कम बारिश हुई महोबा में

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यूं तो  पूरे बुंदेलखंड पर प्रकृति की मार पड़ती रहती है, पर महोबा की स्थिति सबसे खराब है। मौसम विभाग के वर्ष 2012 से 2016 तक के आंकड़ों के अनुसार जून में सामान्य से 69-92 फीसदी तक कम वर्षा हुई।

इन्हीं वर्षों में जुलाई, अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम वर्षा का यह सिलसिला क्रमश: 63, 97 और 87 प्रतिशत तक रहा है। इसके चलते गर्मियों में पशु-पक्षियों के साथ ही खेती के लिए पानी नहीं मिल पाता। तालाब-पोखरे और चेकडैम सूख जाते हैं। प्यास बुझाने के लिए टैंकर भेजने पड़ते हैं।

कृत्रिम बारिश के तीन चरण

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तीन चरणों में होती है कृत्रिम बारिश
विभागों की मदद कराई जाने वाली बारिश से बिल्कुल अलग बादलों की भौतिक अवस्था को कृत्रिम तरीके से रूपांतरित कर बारिश कराई जाती है। रूपांतरण की इस प्रक्रिया को क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) कहा जाता है। इसके तीन चरण होते हैं।

1. कैल्शियम क्लोराइड, कैल्शियम कार्बाइड, कैल्शियम ऑक्साइड, नमक व यूरिया के यौगिक और यूरिया व अमोनियम नाइट्रेट के यौगिक के प्रयोग से विशेष इलाके में वायु को ऊपर की ओर भेजा जाता है। ये यौगिक हवा से जलवाष्प को सोख लेते हैं और संघनन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

2. बादलों के द्रव्यमान को नमक, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सूखा बर्फ  और कैल्शियम क्लोराइड का प्रयोग करके बढ़ाया जाता है।
3. तीसरे चरण में सिल्वर आयोडाइड और शुष्क बर्फ  जैसे ठंडा करने वाले रसायनों की आसमान में छाए बादलों में बमबारी की जाती है। इससे बादल के जलकण संघनित होकर बारिश के रूप में धरती पर गिरने लगते हैं। 

'हम महोबा में कृत्रिम बारिश के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए चीन से मदद लेने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही इसके नतीजे सामने होंगे।' - धर्मपाल सिंह, सिंचाई मंत्री
 
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