26 साल पुराने मामले में पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप समेत 13 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छात्रसंघ चुनाव के दौरान दो गुटों में गोलाबारी करने के 26 साल पुराने मामले में सुनवाई के दौरान हाजिर होने की जगह दी गई हाजिरीमाफी को एमपी/एमएलए के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने खारिज करते हुए पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप समेत 13 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। साथी ही जमानतदारों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की है।
इसके पहले मामले की सुनवाई के समय एक आरोपी मेराज हाजिर था, जबकि अरविंद सिंह गोप, राजीव सिंह, मुकेश शुक्ला, जितेंद्र मिश्र, रमेश प्रताप सिंह, ओंकार भारती बाबा, मनोज सिंह, विवेकानंद पांडेय, प्रद्युम्न वर्मा, धीरेंद्र सिंह, विष्णुकांत, सदानंद और शैलेंद्र की ओर से उनकी हाजिरी माफ करने की अर्जी दी गई।
कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ जहां गिरफ्तारी वारंट जारी किया, वहीं जमानतदारों के खिलाफ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आदेश में कहा कि मामला 26 साल से लंबित है और आरोपियों की गैरहाजिरी के चलते 11 जनवरी 2016 को आरोप तय किए जा सके, लेकिन पिछले चार सालों में केवल दो गवाहों की गवाही हो पाई है।
कहा गया कि बुधवार को सभी आरोपियों की ओर से हाजिरीमाफी की अर्जी देकर बीमारी, शहर से बाहर जाने और आवश्यक कार्य होने का आधार लिया गया लेकिन कोई सबूत नहीं दिया गया।
लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का है मामला
हसनगंज के दरोगा बीएस सिंह ने 21 फरवरी 1994 को रिपोर्ट दर्ज करके बताया था कि लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होने वाले थे, जिसमें छत्रसंघ महामंत्री ओंकार भारती बाबा और अरविंद सिंह गोप अध्यक्ष पद के लिए प्रचार कर रहे हैं और इसी प्रचार की रंजिश को लेकर 21 फरवरी को दिन में ओंकार भारती और अरविंद सिंह गोप के समर्थक छात्र हथियारों से लैस होकर कैशियर ऑफिस के सामने आपस मे भिड़ गए।
गाली-गलौच व मारपीट करते हुए एक दूसरे पर गोलियां और बम चलाना शुरू कर दिया। गोली और बम की आवाज सुनकर पुलिस पहुंची और मौके से ओंकार भारती और मेराज को कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया। अरविंद सिंह गोप की भी गिरफ्तारी की गई।