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Lucknow News: लखनऊ और कानपुर में 200 ई बसों के संचालन की मंजूरी

Wed, 03 Sep 2025 02:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Sep 2025 02:27 AM IST
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Approval for operation of 200 e-buses in Lucknow and Kanpur
इले​क्टि्रक बसें।  - फोटो : फाइल फोटो।
लखनऊ। कैबिनेट ने लखनऊ व कानपुर नगर के साथ उनके आसपास के कस्बों में नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (एनसीसी) मॉडल के तहत 200 इलेक्ट्रिक बसों (ई बस) के संचालन को मंजूरी प्रदान की है। इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य नगरीय परिवहन को पर्यावरण अनुकूल, व्यवस्थित, और उपभोक्ता केंद्रित बनाना है। साथ ही, सरकारी वित्तीय बोझ को कम करते हुए निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
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नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि एनसीसी मॉडल नागरिकों के आवागमन की सुविधा सुनिश्चित करते हुए निजी ऑपरेटरों को अधिक व्यावसायिक स्वतंत्रता और प्रोत्साहन प्रदान करेगा, जिससे परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। नगरीय परिवहन निदेशालय परियोजना इसको लागू करेगा। वर्तमान में निदेशालय प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर रहा है, जिनमें से 700 बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत संचालित हो रही हैं। प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ और कानपुर नगर में 10-10 मार्गों (कुल 20 मार्ग) पर 9 मीटर की वातानुकूलित (एसी) ई बसों का संचालन होगा। अनुबंध की अवधि संचालन तिथि से 12 वर्ष तक की होगी। सरकार चयनित मार्गों पर किसी अन्य निजी ऑपरेटर को संचालन की अनुमति नहीं देगी, जिससे ऑपरेटरों को व्यावसायिक स्थिरता और एकाधिकार प्राप्त होगा।
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प्रत्येक रूट पर 10.30 करोड़ रुपये लागत

अमृत अभिजात ने बताया कि प्रत्येक मार्ग पर 10 ई बसों के संचालन के लिए अनुमानित लागत करीब 10.30 करोड़ रुपये आएगी, जिसमें से 9.50 करोड़ रुपये बसों की खरीद और 80 लाख रुपये चार्जर व अन्य उपकरणों पर खर्च होंगे। निजी ऑपरेटर किराया संग्रह और गैर-किराया संग्रह का 100 प्रतिशत जुटाएंगे। किराये का निर्धारण सरकार करेगी, जिसे समय-समय पर संशोधित किया जा सकेगा। परिवहन विभाग और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीओ/आरटीए) के माध्यम से रूट लाइसेंस प्राप्त किए जाएंगे, जिससे ऑपरेटरों को विशिष्ट मार्गों पर बसें संचालित करने की अनुमति मिलेगी। ऑपरेटरों का चयन निविदा के जरिये होगा। सरकार सुनिश्चित करेगी कि सेवाएं मानकों के अनुरूप हों और यात्रियों को कोई असुविधा न हो। परियोजना सफल होने पर इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।
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