न्यायपालिका में भागीदारी न मिली तो खत्म हो जाएगा आरक्षण : अनुप्रिया
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि दलितों व पिछड़ों को यदि न्यायपालिका में भागीदारी न मिली तो आरक्षण की व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी। आज भी न्यायपालिका में केवल तीन फीसदी दलित व पिछड़े लोग हैं जबकि 97 फीसदी मुकदमे दलित व पिछड़ों से जुड़े हुए हैं।
कहा कि दलितों व पिछड़ों को मिल रहे आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए। दलितों को 22.5 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है लेकिन क्या उन्हें इतना प्रतिनिधित्व मिल रहा है। आखिर दलितों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा है इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए।
अनुप्रिया पटेल शनिवार को अंबेडकर महासभा में आरक्षण की प्रासंगिकता विषय पर बोल रही थीं। उन्होंने युवाओं से कहा कि घर बैठकर आपको अधिकार व सम्मान नहीं मिलने वाला। अपने हक के लिए आगे आना होगा। मेरे साथ युवाओं को संघर्ष करना होगा।
राजनेताओं की आलोचना करने के बजाय युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक चीजों में लगानी चाहिए। निगेटिव एनर्जी को छोड़कर पॉजिटिव एनर्जी अपने अंदर बढ़ानी चाहिए।
'मैं दलित व पिछड़ों के मुद्दों की बहुत बड़ी जानकार'
उन्होंने कहा, मैं दलित व पिछड़ों के मुद्दों की बहुत बड़ी जानकार हूं। लेकिन फिर भी जब मुझे मौका मिलता है तो दलितों व पिछड़ों के मुद्दों को गंभीरता से समझने का प्रयास जरूर करती हूं। साथ ही जब भी मौका मिलता है, मैं इन मसलों को उचित मंच पर जरूर रखती हूं। कहा कि दलितों व पिछड़ों की जो भी समस्याएं हैं उन्हें दूर करने के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगी।
इससे पहले अनुप्रिया पटेल ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि अनुप्रिया पटेल केंद्र में मंत्री हैं इसलिए उन्हें हमारी बात प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचानी चाहिए। कहा कि प्रधानमंत्री को दलित मसलों पर प्रदेश के सभी राज्यों के सीएम की बैठक बुलानी चाहिए। वर्तमान में जो हालात हैं यदि वह न सुधरे तो फिर देश में जातीय युद्ध छिड़ जाएंगे।
दलितों पर हो रहे अपराधों पर जताई चिंता
अनुप्रिया पटेल ने देश के भीतर घट रही दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, गुजरात के ऊना में जो घटना घटी उसने पूरे देश के दलितों को हिलाकर रख दिया है। दलितों को लेकर हमारे देश की यह कैसी मानसिकता है कि एक इनसान सामने खड़े दूसरे इनसान के खिलाफ क्रूरता करने पर आमादा हो जाता है। यह दर्शाता है कि इतने वर्षों में भी हम अपनी मानसिकता नहीं बदल पाए हैं।