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यूपीः गोहत्या करने वालों पर लगेगा गैंगस्टर एक्ट

Mon, 19 Jan 2015 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 19 Jan 2015 09:20 AM IST
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animal smuglling and cow killing is under gangster act.

सूबे में गो-हत्या और पशुओं की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए गैंगस्टर एक्ट लगा दिया गया है। यानी, अब इसके अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा। साथ ही जाली नोट और असलहों की तस्करी करने वालों पर भी गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर) के तहत कार्रवाई हो सकेगी।

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राज्यपाल राम नाईक ने रविवार को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) (संशोधन) अध्यादेश 2015 को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने कई नए अपराधों को गैंगस्टर एक्ट के दायरे में लाने के लिए राष्ट्रपति के पास प्रस्ताव भेजा था। राष्ट्रपति की सहमति के बाद सूबे में यह कानून लागू कर दिया गया।
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नए अध्यादेश में बंधुआ श्रम, बाल श्रम, यौन शोषण, मानव अंगों को हटाने और उसकी तस्करी, भीख मंगवाने, जाली भारतीय करेंसी छापने व उसकी तस्करी, नकली दवाओं का उत्पादन, बिक्री और सप्लाई, असलहे व गोला-बारूद का निर्माण व उसकी तस्करी, आर्थिक लाभ के लिए वन्यजीवों का वध, उत्पादों की तस्करी, मवेशियों की तस्करी, बिक्री, राज्य की सुरक्षा में सेंध, वाणिज्यिक शोषण और सामान्य जनजीवन को प्रभावित करने वाले अपराधों को शामिल किया गया है।

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एक्ट में संशोधन के बाद क्या

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संशोधन के बाद चूंकि अधिक मामलों में गैंगस्टर एक्ट लगाया जा सकेगा इसलिए विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले असामाजिक तत्व भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे। उन पर अधिक समय तक जेल में रहने और पुलिस रोजनामचों में शातिर अपराधी के रूप में दर्ज होने का भय बना रहेगा।

कैसे लगता है गैंगस्टर एक्ट
दो या दो अधिक व्यक्ति संगठित तरीके से ऐसा कार्य करते हैं जो गैरकानूनी हो, गैंगस्टर एक्ट लगाया जा सकता है। यानी गिरोह के सदस्य ऐसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त हों जिससे उन्हें आर्थिक या भौतिक लाभ हो रहा है और आम लोगों का नुकसान हो रहा है।

गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है जो ऐसे गतिविधियों में संलिप्त होते हैं जिससे लोक व्यवस्था भंग होती है अथवा समाज में अराजकता फैलती है अथवा जिनके कृत्य से आम जन में दहशत फैलती है।

लंबे अरसे तक नहीं होती है जमानत

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गैंगस्टर एक्ट लगने की दशा में आरोपी की कम से कम छह माह या फिर एक साल तक जमानत नहीं हो पाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अदालत में पहले उसके खिलाफ लगी अन्य धाराओं में विवेचना होती है और बाद में गैंगस्टर एक्ट पर सुनवाई होती है। बाकी की धाराओं में 90 दिन में जमानत होने का प्रावधान है।

गो हत्या पर गैंगस्टर एक्ट लगाने के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। जनसंघ के जमाने से भाजपा गो-संरक्षण का मुद्दा उठाता रहा है। सपा पर अक्सर गोवंश तस्करों को संरक्षण देने के भी आरोप लगते रहे हैं। अखिलेश सरकार ने इस कदम से उनका मुंह बंद करने की कोशिश की है।

अब अधिनियम में संशोधन के बाद अधिक संख्या में या अधिक मामलों में गैंगस्टर एक्ट लगेगा। इससे विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले असामाजिक तत्व भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे। उन पर अधिक अरसे तक जेल में रहने का डर, देर से जमानत होने और गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद पुलिस रोजनामचों में शातिर अपराधी के रूप में दर्ज होना का भय बना रहेगा।

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