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UP News: यूपी के आयुर्वेदिक कॉलेजों में होगी प्राचीन सिद्धा चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई, ये है पूरी योजना

Mon, 03 Oct 2022 04:11 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 03 Oct 2022 04:11 PM IST
सार

आयुष मंत्री ने इस संबंध में तैयारी करने के निर्देश दे दिए हैं। इसकी जानकारी तमिलनाडु में चल रहे कोर्स से ली जाएगी।

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Ancient sidha treatment mathod will be taught in Ayurvedic college in Uttar Pradesh.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आयुर्वेदिक कॉलेजों में सिद्धा चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए कोर्स व संसाधन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। एफएसडीए एवं आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ने निर्देश दिया है कि इस कोर्स के लिए आवश्यक तैयारी की जाए।

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आयुष पद्धति में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथिक की स्वास्थ्य देखभाल और उपचार प्रणाली शामिल है। प्रदेश में आयुष के तहत अभी तक आयुर्वेद, होम्योपैथिक, यूनानी चिकित्सा पद्धति के मेडिकल कॉलेज हैं। यहां अन्य चिकित्सा पद्धतियों को भी विकसित करने की तैयारी है।
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आयुष मंत्री ने बताया कि सिद्धा पद्धति को प्रयोग के तौर पर एक या दो आयुर्वेदिक कॉलेज में शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए जरूरी संसाधन के संबंध में परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अभी तक इसका प्रसार सिर्फ तमिलनाडु में हैं। यह पद्धति आयुर्वेद से काफी मेल खाती है। त्वचा रोग, मूत्र रोग, सिरोसिस सहित अन्य बीमारियों में इसे कारगर माना जाता है। चेन्नई में राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान हैं। जहां पीजी कोर्स चलते हैं। यहां की टीम वहां जाकर व्यवस्थाएं देखेगी। फिर उसी हिसाब से तैयारी की जाएगी।
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क्या है सिद्धा पद्धति
यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसमें आयुर्वेद की तरह जड़ी बूटी, धातु व खनिज पदार्थ से तैयार दवाओं से इलाज किया जाता है। इसकी दवा में सल्फर, माइका, अभ्रक, मर्क्यूरी आदि का भी प्रयोग होता है। इसमें भी मरीज का इलाज नब्ज, त्वचा, आंख, बोलने के तरीके , पेशाब की स्थिति आदि के आधार पर किया जाता है।


बनेगा योग, प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड
प्रदेश में योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े कोर्स के लिए नए सिरे से कवायद शुरू की गई है। इसके लिए योग, प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एके सिंह को सौंपी गई है। कुलपति ने बताया कि योग, प्राकृतिक चिकित्सा के लिए कॉलेज की व्यवस्था, कोर्स, अध्यापक आदि के मानक तैयार किए जा रहे हैं। 

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