योगी की कैबिनेट से भाजपा ने साधा 2019 का लक्ष्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौदह साल के वनवास के बाद सूबे की सत्ता में लौटी भाजपा ने मंत्रिपरिषद के जरिए लोकसभा चुनाव 2019 के गणित को भी दुरुस्त करने की कोशिश की है।
यूपी की सत्ता में वापसी कराने वाली अगड़ी, पिछड़ी और दलित वर्ग की भाजपा समर्थक जातियों को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी को उनका योगदान याद है।
वहीं संकेत दिए गए हैं कि भगवा टोली के रणनीतिकारों ने अगड़ों के अपने आधार वोट के साथ अति पिछड़ों व अति दलितों के सहारे लोकसभा के अगले चुनाव के समीकरण भी साधने की तैयारी कर ली है।
पिछली सरकार में एक अदद मंत्री पद के लिए तरस रहे बुंदेलखंड को दो मंत्री देकर संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। साथ ही पूरब से पश्चिम तक क्षेत्रीय गणित साधने का भी प्रयास किया गया है।
दलितों व अगड़ों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी और दो उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य तथा डॉ. दिनेश शर्मा सहित 47 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में अगड़ों व पिछड़ों तथा दलितों के बीच संतुलन बैठाने की भरसक कोशिश की गई है।
कहीं अगर कुछ असंतुलन दिख रहा है तो उसके लिए मंत्रिपरिषद में 13 स्थान खाली रखकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि प्रतिनिधित्व से बची रह गई जातियों व इलाकों के लोगों को बैठाकर आने वाले दिनों में इसे दुरुस्त करने की कोशिश करेंगे। माना जा रहा है कि इन स्थानों पर कुछ विधायकों को लेकर उनका भी प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाएगा।
क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए की गई ये कोशिश
क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए मंत्रिपरिषद में पूर्वी यूपी से 15 तो मध्य यूपी से 16 और पश्चिम से 14 चेहरों को भागीदारी दी गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश से जिन 15 चेहरों को लिया गया है उनमें मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, केशव प्रसाद मौर्य को छोड़कर बाकी सभी विधायक हैं। योगी और मौर्य इस समय सांसद हैं।
पश्चिम से शामिल किए गए 14 लोगों में एक एमएलसी भूपेंद्र चौधरी को छोड़कर बाकी 13 विधायक हैं। मध्य यूपी से जिन 16 चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है, उनमें उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। महेंद्र सिंह एमएलसी हैं। इन दो को छोड़कर बाकी 14 चेहरे विधायक हैं।
बुंदेलखंड से शामिल किए गए दो मंत्रियों में एक ललितपुर की महरौनी सीट से मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी ही विधायक हैं। दूसरे चेहरे स्वतंत्रदेव सिंह पार्टी के प्रदेश महामंत्री हैं और विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।
मुस्लिम विरोधी होने का टैग खारिज करने का प्रयास
मंत्रिपरिषद में जातीय गणित साधते हुए 25 अगड़ों, 15 पिछड़ों और 5 दलित चेहरों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोगों को शामिल किया गया है। इनमें बलदेव सिंह औलख सिख तो मोहसिन रजा मुस्लिम हैं। औलख विधायक हैं लेकिन रजा किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
उन्हें मंत्रिपरिषद में शामिल कर इन आरोपों का जवाब देने की कोशिश की गई है कि आदित्यनाथ मुस्लिम विरोधी हैं। साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान लगने वाले उन आरोपों को भी धोने की कोशिश की गई है कि भाजपा का 403 सीटों में एक पर भी किसी मुस्लिम को टिकट न देने का मतलब यह नहीं है कि वह मुसलमानों के साथ दोहरा व्यवहार करती है।
अगड़ों में ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है तो पिछड़ों में मौर्य, नोनिया चौहान, लोध, कुर्मी, जाट, राजभर, कुर्मी जैसी जातियों को हिस्सेदारी देकर उन्हें भाजपा के समर्थन के लिए संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। एक यादव को हिस्सेदारी देकर यह बताने का प्रयास किया गया है कि समर्थन मिला तो भागीदारी भी बढ़ेगी।
देखें, ये हैं जातीय समीकरण
ब्राह्मण 7, ठाकुर 8, वैश्य 4, भूमिहार 2, खत्री 3, कायस्थ 1
पिछड़ों को हिस्सेदारी
कुर्मी 3, मौर्य 2, लोध 2, जाट 2, राजभर 2, यादव 1, नोनिया चौहान 1, सैनी 1, निषाद 1
दलितों का प्रतिनिधित्व
कोरी 2, पासी 1, धोबी 1 व बघेल 1
अल्पसंख्यक
सिख 1, मुसलमान 1