अमित शाह के कुछ 'खास लोग' लड़ाएंगे यूपी के चुनाव
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भले ही विधानसभा चुनाव होने में अभी डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बचा हो लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दूत यूपी में भाजपा की जमीन जांचने निकल पड़े हैं।
प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के सहयोग के लिए सहप्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश भेजे गए गुजरात के सुनील ओझा अब तक मोदी की काशी से लेकर राजनाथ के लखनऊ तक की दूरी नाप चुके हैं।
सोमवार को कानपुर और उसके बाद झांसी जाने का उनका कार्यक्रम तय हो चुका है। दूसरे सहप्रभारियों का भी यूपी का दौरा जल्द ही शुरू होने वाला है।
ओझा ने वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, अयोध्या-फैजाबाद व लखनऊ में पार्टी के कामकाज की स्थिति को समझा और महासंपर्क अभियान तथा सदस्यता की स्थिति को परखा है।
खास बात यह है कि वाराणसी से लखनऊ तक की यात्रा में ओझा सिर्फ जिला मुख्यालयों पर ही नहीं गए हैं बल्कि उन्होंने स्थानीय जिला इकाइयों से संपर्क करके रास्ते में पड़ने वाले स्थानों पर काम करने वाले पार्टी के लोगों का नाम व पता लेकर उनसे भी मुलाकात की है।
इस दौरान उन्होंने आम लोगों से भी बातचीत करके सूबे में भाजपा के सरोकारों व केंद्र सरकार के कामकाज के बारे में फीडबैक को समझा। जिससे मिशन-2017 को सफल बनाने की रणनीति का खाका खींचा जा सके।
यूं ही नहीं है दौरा, इसलिए खास हैं इसके मायने
हालांकि ओझा कहते हैं कि उन्होंने वाराणसी से लेकर लखनऊ तक सिर्फ महासंपर्क अभियान के बारे में जानकारी ली और सक्रिय सदस्यता की स्थिति को समझा। उत्तर प्रदेश में महासंपर्क अभियान और सदस्यता का काम काफी अच्छे ढंग से चल रहा है।
खासतौर से कानपुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ता बहुत उत्साहित होकर काम कर रहे हैं। पर, जानकारी के मुताबिक, बात इतनी भर नहीं है। एक तो ओझा गुजरात के हैं और दूसरे सह प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद यह बात भी साफ हो गई है कि वह मोदी या अमित शाह के ही नहीं बल्कि प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के भी भरोसे वालों में हैं।
तभी तो उन्हें यूपी जैसे बड़े राज्य के मिशन पर लगाया गया है। जाहिर सी बात है कि उनका फीडबैक पार्टी हाईकमान व ओम माथुर के लिए यूपी का रोडमैप तैयार करने में काम आएगा।
इसलिए भी जरूरत : ओझा के दौरे की एक वजह निकट भविष्य में होने वाला पंचायत चुनाव भी है। भाजपा ने पंचायत चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है।
ओझा या दूसरे प्रभारियों के दौरे का असली मकसद इन चुनाव के मद्देनजर पार्टी की स्थिति का आकलन करना और उसके अनुसार, तैयारियों को पूरा कराना भी लग रहा है। साथ ही अगर कहीं जमीन पर पार्टी का काम नहीं है तो उस बारे में चिंता करना और उसे कराना भी है।