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अब यूपी के इस शहर में दलित रसोई तलाश रहे हैं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 02 Jun 2016 11:14 AM IST
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मिशन यूपी में बसपा को दलितों के मुद्दे पर मात देने के लिए भाजपा कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है। यही वजह है कि हर कदम पर वह कुछ ऐसा करना चाहती है, जिससे बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।
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एक दिन पहले इलाहाबाद में दलित परिवार के घर भोजन करने वाले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को यहां भी चार जून के कार्यक्रम के बाद ऐसे ही कार्यकर्ता परिवार के घर का बना हुआ भोजन खिलाने पर विचार हो रहा है।
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वैसे भाजपा इसे जाति और वर्ग से अलग मानकर चल रही है, लेकिन इसके पीछे दलित राजनीति को लेकर जोरदार घेरेबंदी की जा रही है।
सिर्फ अमित शाह ही नहीं मिशन यूपी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा भाजपा के अन्य बड़े नेताओं को प्रचार के दौरान दलितों के यहां भोजन कराने की योजना बनाई जा रही है।
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कानपुर के लिए बन रहा है ये कार्यक्रम
इसी तरह दलितों से जुड़े कई और मामलों में भाजपा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली है। कानपुर के रूमा में वैसे तो खान पान की व्यवस्था का जिम्मा एक कैटर्स को दिया गया है, लेकिन अमित शाह और उनके साथ आने वाले प्रमुख नेताओं के लिए अलग से भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
क्योंकि यहां होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद तत्काल उन्हें लखनऊ में भी एक बैठक को संबोधित करना है। ऐसे में तैयारी यह है कि उनका भोजन किसी दलित कार्यकर्ता के घर से बनवाकर कार्यक्रम स्थल पर लाया जाएगा।
भाजपा इस पूरे मामले में गोपनीयता बनाए हुए हैं। शाह के कार्यक्रम की तैयारी देख रहे क्षेत्रीय संगठन मंत्री ओमप्रकाश का कहना है कि कार्यकर्ताओं की कोई जाति नहीं होती है, वह सिर्फ भाजपाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जो भी व्यवस्था की जा रही है उसमें किसी जाति विशेष को ऊपर रखकर नहीं किया जा रहा है।
क्योंकि यहां होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद तत्काल उन्हें लखनऊ में भी एक बैठक को संबोधित करना है। ऐसे में तैयारी यह है कि उनका भोजन किसी दलित कार्यकर्ता के घर से बनवाकर कार्यक्रम स्थल पर लाया जाएगा।
भाजपा इस पूरे मामले में गोपनीयता बनाए हुए हैं। शाह के कार्यक्रम की तैयारी देख रहे क्षेत्रीय संगठन मंत्री ओमप्रकाश का कहना है कि कार्यकर्ताओं की कोई जाति नहीं होती है, वह सिर्फ भाजपाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जो भी व्यवस्था की जा रही है उसमें किसी जाति विशेष को ऊपर रखकर नहीं किया जा रहा है।