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अमर उजाला संवाद : हार न मानिए..डटे रहिए...नौकरी में राज करना हो या बिजनेस में...सपने सच होकर रहेंगे

Tue, 27 Feb 2024 08:30 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 27 Feb 2024 08:30 AM IST
सार

अमर उजाला संवाद में कारपोरेट सेक्टर के दिग्गजों ने अपनी जिंदगी के संघर्ष पर खुलकर बात की। उन्होंने पहाड़ जैसी चुनौतियों पर फतेह का गुरुमंत्र दिया।

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Amar Ujala Samvad: Don't give up...keep standing...
आलोक और पूनम गुप्ता को उप मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला संवाद में कारपोरेट सेक्टर के दिग्गजों ने अपनी जिंदगी के संघर्ष पर खुलकर बात की। उन्होंने पहाड़ जैसी चुनौतियों पर फतेह का गुरुमंत्र दिया। उन लाखों-करोड़ों लोगों में कुछ करने का जोश पैदा किया जो किसी न किसी मोड़ पर आकर खुद को हताश और निराश महसूस कर रहे हैं। शार्क टैंक से मशहूर एडिलवाइस म्यूचुअल फंड की सीईओ राधिका गुप्ता ने अपना स्टार्टअप और बिजनेस शुरू करने को लेकर असमंजस में पड़े युवाओं से कहा कि अगले दस साल आपके हैं। बेहतरीन आइडिया लेकर आईए, बिजनेस चल पड़ेगा। महज सोलह साल की उम्र में आंखों की रोशनी खोने के बावजूद मोहम्मद आसिफ इकबाल ने पहले तो जिंदगी से हार मान ली। आत्महत्या तक करने का प्रयास किया। फिर जीने की आस जगी, कुछ करने की उम्मीद जगी और उन्होंने वो कर दिखाया तो शारीरिक रूप से सक्षम लोग भी बिरले ही कर पाते हैं। आंखों की रोशनी खोने के बावजूद अपनी बुद्धि के दम पर उन्होंने एक असफल इंसान से पीडब्लूसी (प्राइसवाटरकूपर) जैसी कंपनी के एसोसिएट डायरेक्टर तक का सफर किया। तीन-चार साल पहले तक शायद बहुत कम लोगों ने लुलु के बारे में सुना होगा। वर्ष 2022 में लखनऊ में एशिया का सबसे बड़ा डेस्टिनल मॉल बनाकर दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया। ललु मॉल की लोकप्रियता का राज समूह के रीजनल डायरेक्टर जय कुमार गंगाधरन ने साझा किए।

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कोई चमत्कार नहीं हुआ, आत्मविश्वास से बदली जिंदगी
'मैं जब महज 16 साल का था, तब दोनों आंखों की रोशनी चली गई। जीवन में अंधेरा छा गया था। आगे क्या होगा, समझ में नहीं आ रहा था। मैं सोचता था कि कोई चमत्कार होगा और आंखों की रोशनी फिर वापस आ जाएगी, मगर ऐसा हुआ नहीं। तनाव के चलते अवसाद में चला गया। एक बार तो आत्महत्या करने की कोशिश की, मगर बच गया।' संघर्षों की ये दास्तां है पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर मोहम्मद आसिफ इकबाल की। अमर उजाला संवाद में उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का साझा करते हुए बताया कि सफलता चमत्कार से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से मिलती है। आसिफ इकबाल बोले, देश के लिए अभी बहुत कुछ करना है। यहां तक पहुंचने की यात्रा संघर्षों भरी रही। भागलपुर में पला-बढ़ा। पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा, उस समय तो सबकी यही धारणा बन गई थी कि जिंदगी में मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा। माता-पिता भी यह समझते थे। स्कूल के प्रिंसिपल पापा को बुलाकर कहते थे कि इसे लेकर जाइए, ये पूरा माहौल खराब कर रहा है। कई बार फेल हुआ...। ताने सुने...।
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ताऊ के साथ जब अमेरिका गया, तो वहां शिक्षकों ने मेरा हौसला बढ़ाया। उन्होंने समझाया कि तुम बिना आंखों के भी बहुत कुछ कर सकते हो। मां ने भी कहा कि तुम्हारे पास आंखें नहीं हैं, पर एक सुंदर दिमाग है। उसका इस्तेमाल कर आगे बढ़ो। तुम हुनर सीखो...। सारी चीजें सीखो...। अपनी एक पहचान बनाओ...। मां के कहने के बाद कम्प्यूटर-लैपटॉप चलाना सीखा। रोड क्राॅस करना, खाना बनाना, सब कुछ सीखा। इस सबके बाद जिंदगी में बदलाव आए। दिव्यांग शब्द से जुड़े सवाल पर आसिफ इकबाल ने कहा, सच यही है कि शब्द भले ही बदल गया हो, पर लोगों की सोच नहीं बदली। इसे बदलने में बहुत वक्त लगेगा। अभी मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सही कहा कि सब कुछ करना सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है। जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। तभी समाज और देश में बदलाव आएगा। हम सबको भी बदलाव लाना होगा। अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
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नया आइडिया लाइए, बिजनेस में अगले दस साल आपके
कारपोरेट इंडिया में सबसे कम उम्र की सीईओ में से एक राधिका गुप्ता ने अपना बिजनेस शुरु करने की तैयारी कर रहे लोगों से कहा कि अगले दस साल में भारत में ढेरों बिजनेस और नए ब्रांड बनेंगे। बिजनेस शुरु करना है तो बड़े सेगमेंट की समस्या तलाशिए जिससे बड़ा तबका प्रभावित हो रहा हो। तब ग्राहक से बात करें फिर प्रोडक्ट बनाएँ। पहले प्रोडक्ट बनाकर बाजार में न आएं। महज 33 वर्ष की उम्र में सीईओ बनने वाली राधिका ने कहा कि आज के भारत में फंड देने वालों की कमी नही है। आइडिया अच्छा है तो पैसा देने वालों की लाइन लगेगी। सलाह दी कि स्टार्टअप कोई फैशन नहीं है। बिजनेस रातोंरात नहीं बनता। धीरे धीरे ब्रांड तैयार होता है इसलिए जल्दबाजी न करें। नौकरी करने वालों से कहा कि इसे बुरा मत मानिए। आप भी भारत के विकास में अपना सहभाग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीईओ बनने से पहले वह भी कई बार असफल हुईं लेकिन हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि आज भले करोड़ों लोग उन्हें फॉलो करते हैं लेकिन पहले कभी नहीं लगता था कि वो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो सकती हैं। राधिका ने फलसफा दिया कि जिंदगी आपको कहां से कहां लेकर जा सकती है, इसका अंदाजा आप कभी नहीं लगा सकते। जब आप कुछ बनना चाहता हैं तो सारी कायनात उसे हकीकत में बदलने के लिए जुट जाती है। यूपी को लेकर बोलीं कि उनका जन्म यहां हुआ। पिता सहारनपुर और मां मुजफ्फरनगर की हैं। मुख्यमंत्री को सामने से सुनना बड़ी बात है। मैनें यूपी में बदलाव देखा है। काशी गई तो कॉरीडोर देखकर दंग रह गई। अयोध्या एयरपोर्ट से रामनगरी गई। बदलाव देख यकीन नहीं हुआ। इसी यूपी का एक 22 साल का युवक फाउंडर है। छह साल से एमएसएमई सेक्टर के बीच में जाकर स्मार्ट कैलकुलेटर बना रहा है। उसके साथ मैने काम शुरु किया है।

उन्होंने कहा कि इंसान अपने हालात से नहीं अपनी मेहनत से अपनी शख्सियत बनाता है। बदलाव को स्वीकार करना सीखिए। मेरे पापा की नौकरी ऐसी थी कि तीन साल एक देश में रहते थे। पापा कहते थे कि परेशान न हों. ये तीन साल अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत हैं। इसे जी लो। फिर बोलीं, नजर बदलो तो नजारे बदल जाते हैं, सोच बदलो तो सितारे बदल जाते हैं। क्या 33 साल से कम उम्र में भी सीईओ कोई लड़की बन सकती है। जवाब दिया कि पहले तो नहीं लेकिन आज जरूर युवा सीईओ 33 साल से कम में बन सकता है। मैं उस भारत में बड़ी हुई जिसमें स्कूटर के लिए भी 10 साल की वेटिंग थी। आज बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन है। आठ साल की उम्र में हम गुड्डे-गुड़ियों का खेल खेलते थे। आज आठ साल का बच्चा शार्क टैंक देखता है। राधिका ने कहा कि शारीरिक कमियों पर लोग कमेंट करते हैं। कुछ साल पहले छह म्यूचुअल फंड सीईओ का सेमिनार था, उन्होंने मेरी आंखों की कमी पर बात करना शुरू कर दिया। खामियां तो हर इंसान में होती हैं। हमारे लुक्स पर कमेंट किए जाते हैं। आह्वान किया कि अन्याय हो तो आवाज उठाइए।

वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर में भी लुलु मॉल खोलने की योजना
लुलु ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर जय कुमार गंगाधरन ने कहा कि यूपी के रीटेल सेक्टर को देखने का नजरिया ही बदल गया है। सबसे ज्यादा फुटफाल लुलु मॉल में है, जहां रोजाना 50 हजार लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 जूलाई 2022 को लुलु माल लांच किया था। ये केवल मॉल नहीं बल्कि डेस्टिनेशन मॉल है। पूरे देश से नहीं नहीं विदेश से भी लोग यहां आ रहे हैं। भारत की सबसे बड़ी हाइपर मार्केट यहां है। 22 लाख वर्गफुट में फैले मॉल में 350 से ज्यादा ब्रांड हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ के प्राचीन और सांस्कृतिक विरासत के साथ मा़डर्न कल्चर का फ्यूजन देने से पहले काफी स्टडी की। यूपी में 25 करोड़ से ज्यादा की आबादी इसकी ताकत है। जबर्दस्त क्रय क्षमता है। विस्तार की बात करें तो वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर में आने की तैयारी कर रहे हैं। तीन जगह जमीन लगभग फाइनल कर कर ली है। डबल इंजन की सरकार में यूपी तेजी से बदल रहा है।


उधर, गोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के बड़हलगंज में आलोक गुप्ता अपनी धर्मपत्नी पूनम गुप्ता के साथ मानव शिक्षा सेवा संस्थान के तहत तमाम प्रोडक्ट के साथ दो हजार से अधिक महिला पुरुष को समूह में सहायता व रोजगार देने का काम कर रहे हैं और सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने की योजना है। दोनों पति-पत्नी ने एक संकल्प लेकर नशा मुक्ति अभियान पूरे पूर्वांचल गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, बलिया, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर व खलीलाबाद सहित विभिन्न जनपदों में चरणबद्ध तरीके आंदोलन छेड़ रखा है। अपने मेहनत और ईमानदारी के दम पर उद्योग व्यापार क्षेत्र में भी कदम रखा है। अमर उजाला संवाद के मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दोनों को सम्मानित किया।

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