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राज्यपाल ने अमर उजाला फाउंडेशन सहित रक्तदान में सहयोग करने वाली संस्थाओं को किया सम्मानित
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रक्तदान से लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। युवाओं में इसके लिए और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। इससे कोई नुकसान नहीं होता। सभी को रक्तदान को आदत में शामिल करना चाहिए।
साथ ही अंगदान के लिए भी लोगों को आगे आना चाहिए। अंगदान से किसी की जान बच सकती है तो किसी का जीवन बेहतर हो सकता है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को केजीएमयू के ब्राउन हाल में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ये बातें कही।
डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन के साथ ही रक्तदान में सहयोग करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को सम्मानित किया।
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राज्यपाल ने कहा कि रक्तदान के लिए जितना प्रचार होना चाहिए उतना नहीं हुआ है। अभी बहुत जागरूकता की जरूरत। प्रदेश में जितने भी विवि और कॉलेज हैं, उनमें रक्तदान शिविर लगने चाहिए और स्टूडेंट्स को साल में दो बार रक्तदान करना चाहिए।
साथ ही राज्यपाल ने कहा कि दो साल से सभी का समय कोरोना में चला गया। हमारे डॉक्टर कोरोना मरीज के विशेषज्ञ हो गए हैं। पर स्टूडेंट्स की पढ़ाई को नुकसान हुआ है। यह कमी पूरी की जाए ताकि वे अच्छे डॉक्टर बन सकें। एक डॉक्टर बनाने में बहुत खर्च होता है।
मरीज डॉक्टर को भगवान मानते हैं। इसी भावना के साथ वे अस्प्ताल आते हैं। इसलिए डॉक्टर का भी कर्तव्य है कि वे मरीजों की उम्मीदों पर खरे उतरें।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि हम लोगों की भ्रांतियां दूर नहीं कर पा रहे हैं। वे सभी मेडिकल कॉलेज में इसका प्रचार प्रसार करेंगे।
कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने बताया कि विभाग में दो करोड़ की लागत से ब्लड रेडियेटर लगाया जा रहा है जिसकी सहायता से खून के सफेद कण की वजह से होन वाले रिएक्शन को समाप्त किया जा सकेगा। कार्यक्रम में विधि मंत्री ब्रजेश पाठक, चिकित्सा राज्य मंत्री संदीप सिंह, प्रमुख सचिव आलोक कुमार मौजूद रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नियां करें रक्तदान
राज्यपाल ने कहा कि जब मुखिया कोई काम करते हैं तो उनके पीछे बाकी लोग भी करते हैं। इसलिए सभी आईएएस और आईपीएस की पत्नियों को मिलकर रक्तदान शिविर आयोजित करना चाहिए और खुद भी रक्तदान करना चाहिए। इससे जागरूकता आएगी।
सालाना 70 हजार यूनिट रक्त के साथ देश में शीर्ष पर केजीएमयू
केजीएमयू ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि विभाग 1942 में शुरू हुआ था। आज यह ब्लड बैंक स्टेट ऑफ आर्ट मॉडल बन गया है। हर यहां साल 70 हजार यूनिट से ज्यादा रक्त एकत्र होता है। जो देश में सबसे अधिक है। संस्थान में न्यूक्लीयर एसिड टेस्ट से परखा हुआ खून मुहैया कराया जा रहा है। इससे किसी भी प्रकार के संक्रमण को आसानी से पकड़ जा सकता है। पेशेवर रक्तदाता व दलालों को पकड़ने के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था है। केजीएमयू के साथ 182 संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन भी सम्मानित
सामाजिक सरोकारों के तहत रक्तदान अभियान चलाने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन को राज्यपाल ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में फाउंडेशन को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न दिया गया। साथ ही रक्तदान शिविरों के आयोजन की मुहिम चलाने और लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की सराहना की गई। अमर उजाला फाउंडेशन इस क्षेत्र में वर्षों से अभियान चला रहा है। कोरोना काल में सरकारी ब्लड बैंकों में हो रही रक्त की कमी को दूर करने के लिए भी फाउंडेशन ने अहम जिम्मेदारी निभाई। लखनऊ और आसपास के जिलों में अलग-अलग माह में 20 से अधिक शिविर आयोजित कर लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। इनमें 550 यूनिट से अधिक रक्तदान हुआ। यही नहीं, प्लाज्मा डोनेशन शिविरों का भी आयोजन किया गया।
इनका भी हुआ सम्मान
सांसद संघमित्रा मौर्या, आकांक्षा समिति की अध्यक्ष अर्चना तिवारी, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, एसएसबी, भारतीय जनता युवा मोर्चा ,भाषा विवि, लायंस क्लब, सीआरपीएफ, स्वामी विवेकानंद यूथ मिशन केजीएमयू, अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा, किशोर कुमार पंत, लखनऊ विवि, मानुषी ठाकुर, धन्वंतरि सेवा संस्थान, शिव शांति असुदाराम आश्रम, संजीवनी संस्था, हुसैनी ब्लड डोनेशन, टाटा मोटर्स, आईटी कॉलेज, कल्याणम संस्था, सत्य साईं सेवा समिति, कृष्णा चौबे, पुलिस मित्र परिवार, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, नर्सिंग कॉलेज केजीएमयू, जीवन रक्षक सेवा संस्थान, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल सोसायटी, अनुराग नाटू, हिमालयन समिति और एबीवीपी।
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साथ ही अंगदान के लिए भी लोगों को आगे आना चाहिए। अंगदान से किसी की जान बच सकती है तो किसी का जीवन बेहतर हो सकता है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को केजीएमयू के ब्राउन हाल में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ये बातें कही।
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डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन के साथ ही रक्तदान में सहयोग करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को सम्मानित किया।
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राज्यपाल ने कहा कि रक्तदान के लिए जितना प्रचार होना चाहिए उतना नहीं हुआ है। अभी बहुत जागरूकता की जरूरत। प्रदेश में जितने भी विवि और कॉलेज हैं, उनमें रक्तदान शिविर लगने चाहिए और स्टूडेंट्स को साल में दो बार रक्तदान करना चाहिए।
साथ ही राज्यपाल ने कहा कि दो साल से सभी का समय कोरोना में चला गया। हमारे डॉक्टर कोरोना मरीज के विशेषज्ञ हो गए हैं। पर स्टूडेंट्स की पढ़ाई को नुकसान हुआ है। यह कमी पूरी की जाए ताकि वे अच्छे डॉक्टर बन सकें। एक डॉक्टर बनाने में बहुत खर्च होता है।
मरीज डॉक्टर को भगवान मानते हैं। इसी भावना के साथ वे अस्प्ताल आते हैं। इसलिए डॉक्टर का भी कर्तव्य है कि वे मरीजों की उम्मीदों पर खरे उतरें।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि हम लोगों की भ्रांतियां दूर नहीं कर पा रहे हैं। वे सभी मेडिकल कॉलेज में इसका प्रचार प्रसार करेंगे।
कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने बताया कि विभाग में दो करोड़ की लागत से ब्लड रेडियेटर लगाया जा रहा है जिसकी सहायता से खून के सफेद कण की वजह से होन वाले रिएक्शन को समाप्त किया जा सकेगा। कार्यक्रम में विधि मंत्री ब्रजेश पाठक, चिकित्सा राज्य मंत्री संदीप सिंह, प्रमुख सचिव आलोक कुमार मौजूद रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नियां करें रक्तदान
राज्यपाल ने कहा कि जब मुखिया कोई काम करते हैं तो उनके पीछे बाकी लोग भी करते हैं। इसलिए सभी आईएएस और आईपीएस की पत्नियों को मिलकर रक्तदान शिविर आयोजित करना चाहिए और खुद भी रक्तदान करना चाहिए। इससे जागरूकता आएगी।
सालाना 70 हजार यूनिट रक्त के साथ देश में शीर्ष पर केजीएमयू
केजीएमयू ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि विभाग 1942 में शुरू हुआ था। आज यह ब्लड बैंक स्टेट ऑफ आर्ट मॉडल बन गया है। हर यहां साल 70 हजार यूनिट से ज्यादा रक्त एकत्र होता है। जो देश में सबसे अधिक है। संस्थान में न्यूक्लीयर एसिड टेस्ट से परखा हुआ खून मुहैया कराया जा रहा है। इससे किसी भी प्रकार के संक्रमण को आसानी से पकड़ जा सकता है। पेशेवर रक्तदाता व दलालों को पकड़ने के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था है। केजीएमयू के साथ 182 संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन भी सम्मानित
सामाजिक सरोकारों के तहत रक्तदान अभियान चलाने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन को राज्यपाल ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में फाउंडेशन को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न दिया गया। साथ ही रक्तदान शिविरों के आयोजन की मुहिम चलाने और लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की सराहना की गई। अमर उजाला फाउंडेशन इस क्षेत्र में वर्षों से अभियान चला रहा है। कोरोना काल में सरकारी ब्लड बैंकों में हो रही रक्त की कमी को दूर करने के लिए भी फाउंडेशन ने अहम जिम्मेदारी निभाई। लखनऊ और आसपास के जिलों में अलग-अलग माह में 20 से अधिक शिविर आयोजित कर लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। इनमें 550 यूनिट से अधिक रक्तदान हुआ। यही नहीं, प्लाज्मा डोनेशन शिविरों का भी आयोजन किया गया।
इनका भी हुआ सम्मान
सांसद संघमित्रा मौर्या, आकांक्षा समिति की अध्यक्ष अर्चना तिवारी, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, एसएसबी, भारतीय जनता युवा मोर्चा ,भाषा विवि, लायंस क्लब, सीआरपीएफ, स्वामी विवेकानंद यूथ मिशन केजीएमयू, अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा, किशोर कुमार पंत, लखनऊ विवि, मानुषी ठाकुर, धन्वंतरि सेवा संस्थान, शिव शांति असुदाराम आश्रम, संजीवनी संस्था, हुसैनी ब्लड डोनेशन, टाटा मोटर्स, आईटी कॉलेज, कल्याणम संस्था, सत्य साईं सेवा समिति, कृष्णा चौबे, पुलिस मित्र परिवार, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, नर्सिंग कॉलेज केजीएमयू, जीवन रक्षक सेवा संस्थान, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल सोसायटी, अनुराग नाटू, हिमालयन समिति और एबीवीपी।