अमर उजाला ई-पाठशाला : साइबर अपराध से बचने के लिए ‘नेटीकेट्स’ का पालन जरूरी, 1200 बच्चों ने दर्ज कराई उपस्थिति
साइबर एक्सपर्ट और यूपी पुलिस के एडवाइजर राहुल मिश्रा बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहें, उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्चों की सक्रियता के दौरान कुछ बातों को ध्यान रखने को कहा। सीएसआर की कोआर्डिनेटर तान्या ठाकुर व प्रोग्राम कोआर्डिनेटर सेंड्रा ने मेटा के ट्रेनिंग मॉड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया।
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जीवन में जिस तरह से संस्कार, मूल्यों और अनुशासन का महत्व है, उसी तरह से डिजिटल वर्ल्ड में ‘नेटीकेट्स’ का महत्व है। जिस तरह से संविधान हमें एक अच्छे नागरिक या सिटीजन बनने के लिए अधिकार और कर्तव्यों का पाठ पढ़ाता है, उसी तरह से ई-पाठशाला में बताया जा रहा है कि किस तरह हम साइबर दुनिया में खुद को अनुशासित, जागरूक रखते हुए एक अच्छे ‘नेटीजंस’ बन सकते हैं। यह निष्कर्ष रहा अमर उजाला फाउंडेशन और सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की ओर से आयोजित ई-पाठशाला का। आयोजन सेंट जोसेफ कॉलेज, रूचिखंड में किया गया, विद्यालय की सभी शाखाएं ऑनलाइन जुड़ीं। सेंट टेरेसास स्कूल के स्टूडेंट्स ने भी शिरकत की। वर्कशॉप को अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफार्म पर लाइव भी किया गया।
इस दौरान सेंट जोसेफ विद्यालय समूह के एमडी अनिल अग्रवाल, वाइस प्रिंसिपल वंदना खरे, सीनियर कोआर्डिनेटर लीना सिंह, मुदित अग्रवाल, पल्लवी उपाध्याय समेत, सेंट टेरेसास की शिक्षिका सुमैया भी मौजूद रहूं। जिन्हें सीएसआर की ओर से प्रमाण पत्र व किट देकर आभार जताया गया। साइबर एक्सपर्ट और यूपी पुलिस के एडवाइजर राहुल मिश्रा बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहें, उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्चों की सक्रियता के दौरान कुछ बातों को ध्यान रखने को कहा। सीएसआर की कोआर्डिनेटर तान्या ठाकुर व प्रोग्राम कोआर्डिनेटर सेंड्रा ने मेटा के ट्रेनिंग मॉड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया।
बच्चों की साइबर सुरक्षा जरूरी, रखें इन बातों का ध्यान
-अपने डिवाइस के लिए बढ़िया एंटीवायरस या इंटरनेट सिक्योरिटी एप्लीकेशन का इस्तेमाल करें।
इससे आपकी निजी और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रहती है।
-मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें। पासवर्ड मैनेजर एप्लीकेशन पासवर्ड लॉक करने में मदद करता है।
-अपने सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करते रहें।
-अपनी सोशल मीडिया सेटिंग्स को हमेशा चेक करते रहें, उसका प्रबंधन जरूरी है।
-किसी भी बहकावे में न आएं, इंटरनेट पर तरह-तरह के लुभावने ऑफर दिए जाते हैं।
-यदि आपको लगता है कि साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस गए हैं तो आप उन कंपनियों और बैंकों से संपर्क करें, जहां आपको पता हो कि धोखाधड़ी हुई है।
-धोखाधड़ी अलर्ट रखें और अपनी क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त करते रहें।
-साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर आप रिपोर्ट दर्ज कराएं।
-बच्चे अपने माता-पिता से कुछ न छिपाएं और अभिभावक भी सच पता चलने पर बच्चों को डांटने के बजाय उन्हें समझें।