'कभी रात-दिन हम दूर थे, दिन-रात का अब साथ है'
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सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और पूर्व सांसद अमर सिंह के नजदीकी रिश्ते जगजाहिर हैं। दो दिन पहले ही मुलायम ने कहा था कि अमर सिंह भले ही दल में न हों, उनके दिल में हैं।
रविवार को राजधानी पहुंचे अमर सिंह ने कहा, मैं मुलायम सिंह के दिल में हूं, मेरे लिए यह पार्टी में रहने से बड़ी बात है। अमर सिंह राजभवन में नए लोकायुक्त संजय मिश्र के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने आए थे।
उनसे मुलायम के उस बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई जिसमें उन्होंने कहा था कि अमर सिंह मेरे दिल में हैं, पूर्व सांसद ने कहा, नेताजी का मेरे प्रति शुरू से ही व्यवहार इसी तरह का रहा है। हमारे संबंध दिलों के हैं।
सपा सुप्रीमो के बयान के बाद आई आजम खां की टिप्पणी पर कुछ भी कहने से अमर सिंह ने इन्कार कर दिया। आग्रह करने पर उन्होंने अपने खास अंदाज में कहा, ‘कभी रात-दिन हम दूर थे, दिन-रात का अब साथ है, वो भी इत्तेफाक की बात थी, ये भी इत्तेफाक की बात है।’
किसने कब क्या कहा
‘अमर सिंह पार्टी में रहें, न रहें, मेरे दिल में मौजूद हैं’।
-मुलायम सिंह यादव (28 जनवरी को इटावा में)
‘नेताजी किसे अपने दिल में रखते हैं, किसे निकालते हैं? यह तो उन्हें ही तय करना है। वे सर्वेसर्वा हैं, जिसको चाहे ले सकते हैं, जिसको चाहे निकाल सकते हैं’।
- आजम खां (29 जनवरी को रामपुर में)
‘नेताजी कभी गलत नहीं कहते। अमर सिंह जी उनके दिल में बसे हैं। दिल से बढ़कर कुछ नहीं होता’।
-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (31 जनवरी की दोपहर फीरोजाबाद में)
‘राजनीतिक दल में स्वार्थ आ सकते हैं, लेकिन दिल में नहीं। कोई किसी के दिल में रहता है तो फिर यह मायने नहीं रखता कि वह पार्टी में है या नहीं’।
अमर सिंह (31 जनवरी की शाम लखनऊ में)