मुलायम मिलन पर क्या बोले अमर सिंह?
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सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन के बाद सीएम अखिलेश ने अमर सिंह को आदरणीय कहकर जहां आगे आने वाले दिनों में सियासी बदलाव का संकेत दिया, तो उन्होंने एक बार फिर अपनी सरकार की उपब्धियों को गिनाने का मौका हाथ से जाने नहीं दिया।
उन्होंने मेट्रो से लेकर लोहिया पार्क, लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे से लेकर किसानों और युवओं के लिए लागू की गई योजनाओं और घोषणापत्र में किए वादे तक गिना डाले।
अखिलेश ने कहा कि समाजवादी सिद्धांत के आधार पर ही यूपी का विकास हो रहा है।
'समाजवादी नहीं, मुलायमवादी हूं'
चार साल बाद मुलायम से जुदाई की दीवार तोड़ जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन पर नजर आए अमर सिंह ने भावुक अंदाज में भाषण दिया।
अमर सिंह ने कहा कि यहां मेरी मौजूदगी राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं वर्तमान में जिया हूं। अमर ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा, 'ये अद्भुत अवसर है। मेरे ऊपर राजनीतिक आरोप हैं पर मैं समाजवादी नहीं मुलायमवादी हूं। मैंने जनेश्वर जी के साथ भी सदन में वक्त बिताया है।'
हालांकि, अमर सिंह की मौजूदगी सपा के ही तमाम समर्थकों को नागवार गुजरी और भाषण के दौरान अमर सिंह मुर्दाबाद के नारे भी लगे। अमर सिंह ने कहा कि बीच रास्ते में कोई छोड़ गया है मुझको।
राज्यसभा चुनाव भी एक कारण
सियासी हाशिये पर चल रहे सांसद अमर सिंह ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी से तार जोड़ लिए हैं। मंगलवार को वे राजधानी में देश के सबसे बड़े जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
वह चार साल बाद किसी मंच पर मुलायम व उनके परिवार के साथ नजर आए। इस नए राजनीतिक घटनाक्रम को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि दोस्ती परवान चढ़ी तो अमर सिंह को सपा फिर से राज्यसभा में भेज सकती है। उनका कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है।
एक जमाने में अमर सिंह को सपा मुखिया मुलायम सिंह का करीबी और भरोसेमंद माना जाता था। पार्टी और सरकार के स्तर से होने वाले फैसलों में उनकी अहम भूमिका होती थी।
जमानत ही नहीं बचा पाए अमर सिंह
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तो सपा ने आजम खां की कीमत पर अमर सिंह को तरजीह दी थी। आजम खां नहीं चाहते थे कि अमर सिंह की नजदीकी जयाप्रदा को रामपुर से लोकसभा का टिकट दिया जाए। इसी मुद्दे पर आजम सपा छोड़ गए थे।
आजम के विरोध के बावजूद जयाप्रदा सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं और जीती भीं। बाद में अमर सिंह के सपा नेतृत्व से रिश्तों में तल्खी आती चली गई। यह रिश्तों के अलगाव तक पहुंच गई।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अमर सिंह ने अपनी पार्टी बनाकर उम्मीदवार खड़े किए और सपा पर जमकर निशाना साधा। लोकसभा चुनाव 2014 में वे राष्ट्रीय लोकदल प्रत्याशी के रूप में फतेहपुर सीकरी और जयाप्रदा बिजनौर से लड़ीं। हालांकि दोनों की ही जमानत नहीं बच पाई। अब राजनीतिक हालात बदले हुए हैं।
दिए भूल सुधार के संकेत
अमर सिंह की राज्यसभा सदस्यता 25 नवंबर को समाप्त हो रही है। उन्हें कोई ऐसा राजनीतिक ठौर नहीं मिला जहां से फिर राज्यसभा में पहुंचा जा सके। ऐसे में उन्हें राज्यसभा में फिर से एंट्री के लिए सपा के अलावा कोई और ठिकाना नजर नहीं आ रहा।
बताया जाता है कि अमर सिंह ने मुलायम से दिल्ली में तार जोड़े और सपा के नजदीक आने के संकेत दिए। मोदी लहर में सफाये के बाद सपा ने भी उनसे रिश्ते बहाली के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।
इसकी शुरुआत अमर सिंह को जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन समारोह में शामिल होने का निमंत्रण देने से हुई।
उन्होंने न्यौते को स्वीकारते हुए उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है। अमर सिंह ने खुद को मुलायमवादी कहकर सपा से पुरानी तल्खी भूलकर नई शुरुआत करने का संदेश दे दिया है।
दोनों के लिए फायदेमंद दोस्ती
चार साल बाद किसी मंच पर मुलायम सिंह और अमर सिंह की एक साथ मौजूदगी के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है अमर सिंह की मुलायम सिंह से नजदीकी राज्यसभा में स्थान पक्का करने के लिए है।
हालांकि इससे फायदे दोनों के हैं। 25 नवंबर को राज्यसभा की दस सीटें खाली हो रही हैं। नवंबर की शुरुआत में इनके लिए चुनाव संभावित है। सपा से नजदीकी बढ़ाकर अमर सिंह राज्यसभा जा सकते हैं।
भाजपा को जवाब देने के लिए सपा को भी अमर सिंह के साथ से गुरेज नहीं है। कुछ सपा नेताओं को लगता है कि उनके आने से प्रदेश में औद्योगिक निवेश का संभावनाएं बढ़ेंगी। वहीं मीडिया में सपा का स्पेस भी बढ़ सकता है।