आलोक रंजन नए मुख्य सचिव, उस्मानी हटे
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लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद बदायूं गैंगरेप और बिजली संकट पर बुरी तरह घिरी अखिलेश सरकार ने शनिवार को अचानक मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को हटा दिया।
उनके स्थान पर आलोक रंजन को सूबे का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। रंजन अभी तक कृषि उत्पादन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के पद पर तैनात थे।
1978 बैच के आईएएस अफसर रंजन ने शाम को पदभार भी संभाल लिया। वहीं, उस्मानी को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है।
माना जा रहा है कि उस्मानी को गवर्नेंस के मोर्चे पर विफलता और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने की वजह से हटाया गया है।
सरकार के इस कदम के बाद उस्मानी के भरोसेमंद अफसरों को भी इधर-उधर किए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इसलिए गिरी उस्मानी पर गाज
• सरकार का पूरा भरोसा लेकिन मातहत अफसरों से ठीक से काम नहीं ले पाए। गवर्नेंस के मोर्चे पर नाकामी से नाराजगी।
• दो वित्तीय वर्ष बीतने के बावजूद एक में भी स्वीकृत बजट ठीक से खर्च नहीं।
• योजनाएं जनता तक नहीं पहुंच सकीं। जिलाधिकारियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में लगी मशीनरी पर प्रभारी नियंत्रण न होना।
• सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों के लिए 20% मात्रात्मक आरक्षण लागू हुआ लेकिन जमीन पर उसका फायदा नहीं दिखा।
• लोगों से संवादहीनता। विशुद्ध नौकरशाह, नेताओं के पसंदीदा नहीं।
नौकरशाही पर अच्छी पकड़ से मिली तैनाती
•आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष होने के नाते नौकरशाही पर पकड़। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के नजदीकी।
•तेजी से निर्णय लेने की क्षमता। समय के पाबंद।
•कृषि उत्पादन आयुक्त व औद्योगिक विकास आयुक्त के रूप में बेहतर काम करके बने सरकार के विश्वासपात्र ।
•फील्ड के अफसरों से अच्छा तालमेल। हर वर्ग से सतत संवाद। नेताओं को साधने की भी कला।
•राजनाथ सिंह से अच्छे संबंध हैं। केंद्र-राज्य के संबंधों को बेहतर रखने में भूमिका निभा सकते हैं।