फर्जी निकलीं अरविंद केजरीवाल के 'दागी मंत्री' की सभी डिग्रियां
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सर्टिफिकेट पर इनरोलमेंट व कुलपति के दस्तखत सब फर्जी पाए गए। दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय में इनरोलमेंट, कुलपति के दस्तखत से लेकर परीक्षा कॉपियां तक खंगाली।
करीब पौने पांच घंटे की सघन पड़ताल के बाद दिल्ली पुलिस के सोमेंद्र पाल त्यागी ने सभी दस्तावेजों की मूल कॉपी भी हासिल कर ली है। उन्होंने बताया कि आरोपी के सामने सारा परीक्षण हुआ। वे झेंपते रहे ओर कोई जवाब नहीं दे पा रहे थे।
विश्वविद्यालय से मूल कॉपियां लेने में ही काफी देरी हुई। अब साकेत में जांच के बाद एलएलबी डिग्री का परीक्षण करने के लिए तोमर को लेकर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार जाएंगे।
फर्जी बीएससी व एलएलबी डिग्रीधारी के आरोपी दिल्ली सरकार के कानून मंत्री रहे जितेंद्र सिंह तोमर को दफ्तर जाते वक्त अरेस्ट कर कोर्ट से रिमांड के बाद दिल्ली पुलिस के आरकेपुरम एसीपी सोमेंद्र पाल त्यागी के नेतृत्व में एसएचओ हौजखास केपी सांगवान, एसएचओ सरोजनी नगर बीकेपीएस यादव, इंसपेक्टर साकेत हीरालाल समेत पांच सदस्यीय टीम बुधवार दोपहर करीब पौने 12 बजे फरक्का एक्सप्रेस से लेकर यहां पहुं
सीधे लाया गया अवध विवि
जीतेंद्र सिंह तोमर को सीधे अवध विश्वविद्यालय ले जाया गया। जहां गोपनीय विभाग में १२ बजे रजिस्ट्रार डॉ. एसएल मौर्य, परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी आदि के समक्ष पूछताछ शुरू हुई। जितेंद्र सिंह तोमर पुत्र बलबीर सिंह तोमर की विज्ञान से स्नातक डिग्री को लेकर 1988 के दस्तावेजों की पूरी फाइल मंगाई गई।
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध कामता प्रसाद सुंदरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या से जारी बीएससी द्वितीय वर्ष, अनुक्रमांक-31331 की उपाधि व अंकपत्र को पूर्णतया फर्जी पाया गया। परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने आरोपी जितेंद्र तोमर से सवाल करते हुए कहा कि आप खुद देख लीजिए, इस अनुक्रमांक पर आपका नाम नहीं है।
विश्वविद्यालय ने तत्कालीन कुलपति रामविलास मिश्र के हस्ताक्षर मिलाए तो जितेंद्र तोमर के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर भी अलग मिले। विश्वविद्यालय की टीम ने एक साथ तोमर से पूछ दिया कि आपको डिग्री मिली कहां से? सूत्रों के मुताबिक एसीपी ने तुरंत दोहराया कि यही सवाल तो हम कई दिन से पूछ रहे हैं, आखिरकार जब साकेत में पढ़े नहीं तो, अवध विश्वविद्यालय से डिग्री बनी कैसे?
हर सवाल पर खामोश रहे तोमर
इस जांच के बाद 1988 में साकेत से बीएससी करने वाले सभी छात्र-छात्राओं की पूरी पत्रावलि निकाली गई। उनमें भी तोमर का नाम कहीं नहीं था। भरे गए परीक्षा फॉर्म में भी तोमर का फॉर्म नहीं था।
इसी क्रम में छात्र-छात्राओं का उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाई गई। यहां भी तोमर का न नाम था, न उनके अनुक्रमांक की कॉपी पर उनकी राइटिंग। रजिस्ट्रार ने कहा कि अब तो सब कुछ साफ हो गया है। बीएससी डिग्री पूरी तरफ फर्जी है। इस पर तोमर ने बगैर कुछ बोले गरदन झुका ली।
पुख्ता सबूत के लिए 1988 की साकेत से बीएससी करने वाले तीन व्यक्तियों को भी बुलाकर तोमर से सामना कराया गया तो वे तोमर पहचान नहीं सके। तीनों लोगों ने तोमर को क्लास मेट मानने से ही इंकार कर दिया।
अवध विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. एसएन शुक्ल ने बताया कि विश्वविद्यालय परीक्षा नियंत्रक की ओर से 22 जनवरी को पत्रांक-लो.अ.वि./उपाधि/02/2015 पर आरटीआई के तहत शिकायतकर्ता दिए गए जवाब पर कायम है।
परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने भी यही जवाब दिया कि जब तक शिकायत नहीं आती विश्वविद्यालय कैसे रिपोर्ट दर्ज कराए। अब तो दिल्ली पुलिस जांच कर रही है, हम पूरा सहयोग देंगे। विश्वविद्यालय के गोपनीय कक्ष से तोमर को पौने पांच बजे बाहर निकाला गया।