{"_id":"9bd24a842cf6a5301e971183ee9b1641","slug":"all-about-politics-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"खां साहब का संत प्रेम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खां साहब का संत प्रेम
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 05 Aug 2013 10:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने खां साहब को आजकल संत प्रेम हो गया है। उनसे मिलने वालों में संत समाज के लोग भी अधिक आ रहे हैं।
विज्ञापन
खां साहब के इस संत प्रेम को लेकर विभाग के लोग भी अचंभित हैं। आखिर वह अचानक संत समाज को इतना तवज्जो क्यों देने लगे हैं? तवज्जो देने तक बात होती तो भी ठीक था।
संत समाज के साथ जो लोग मिलने आते हैं वे कामों का मोटा पुलिंदा लेकर आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को सख्त हिदायत हैं कि संत समाज के साथ आए लोग जो भी काम बताएं उसे प्रमुखता से कराया जाए।
विज्ञापन
इसकी मॉनीटरिंग भी कोठी यानी खां साहब के आवास से हो रही है। अधिकारियों को काफी समय बाद यह बात समझ में आई कि लोकसभा चुनाव है और खां साहब चोला बदल रहे हैं।
विज्ञापन
वह एक ही समाज के नेता होकर नहीं रहना चाहते हैं। बताना चाहते हैं कि सभी वर्गों के लिए वह एक समान ही सोचते हैं।
खैर यह तो खां साहब की सोच हो गई, लेकिन अधिकारी तो खां साहब के संत प्रेम को लेकर परेशान हैं।