अखिलेश ने बदले रूख, अब नहीं अफसरों की खैर
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 20 अक्तूबर को प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों से मुखातिब होंगे। इसके लिए विधानभवन के तिलक हॉल में बैठक बुलाई गई है।
कानून-व्यवस्था व विकास कार्यों की समीक्षा के लिए होने वाली इस बैठक में सीएम अपनी नई प्राथमिकताओं का भी संकेत कर सकते हैं।
यह बैठक ऐसे मौके पर होने जा रही है जब सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सत्ताधारी दल ने विधानसभा और लोकसभा के उपचुनाव में जोरदार वापसी की है।
सपा के तीन दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन में सरकार और प्रशासन को लेकर पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिला फीडबैक मुख्यमंत्री के पास है।
जिले में विकास कार्यों की निगरानी करने वाले अफसरों की रिपोर्ट भी उनकी जानकारी में है। मुख्यमंत्री इस बैठक में अफसरों को यह साफ संदेश दे सकते हैं कि कानून-व्यवस्था व कार्यशैली के मोर्चे पर अब फील्ड के अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी।
15 अक्टूबर तक होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
काम कम-विवाद ज्यादा पैदा करने वाले एक आईएएस व एक आईपीएस को बिना मौका गंवाए सस्पेंड कर उन्होंने अपने बदले रुख का संकेत भी कर दिया है।
जालौन में दो लड़कियों के गायब होने के मामले में वहां के एसपी और मथुरा में एक शिक्षक से उठक-बैठक कराने पर एक आईएएस अफसर का निलंबन इसकी बानगी है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार जिलों से लेकर तहसील तक प्रशासनिक स्तर पर जो भी बदलाव करना है, 15 अक्तूबर तक कर लेगी क्योंकि इसके बाद जनवरी तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण की वजह से फील्ड के अधिकारियों के तबादले नहीं हो पाएंगे।
मुख्यमंत्री को कम से कम तीन महीने इसी टीम से काम लेना होगा। सरकार के आधे बचे कार्यकाल में सरकार का एजेंडा किस तरह रफ्तार पकड़ेगा, मुख्यमंत्री की बैठक में इसके संकेत मिल सकते हैं।
मुख्य सचिव आलोक रंजन सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।