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टीम अखिलेश में अब 'यंग' के साथ दबंग भी

Sun, 01 Nov 2015 12:47 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 01 Nov 2015 12:47 AM IST
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Akhilesh Yadav gives opportunity to youth.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस तरह से मंत्रियों का चयन किया है, साफ है कि सपा नेतृत्व को नौजवान (यंग) मंत्री तो उनकी पसंद हैं ही, पर उनका दबंग होना भी जरूरी है। जिन्हें पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया और प्रमोशन देकर जिनका कद बढ़ाया गया है, उनको देखें तो सारी तस्वीर साफ हो जाती है।

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नए हों या प्रमोटी, दांव 40 से कम उम्र वालों पर
12 नए मंत्रियों में सुधीर कुमार, हेमराज वर्मा, लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद व तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय 40 साल से कम वाले हैं। यानी एक तिहाई। बाकी जिन नौ मंत्रियों को पदोन्नति दी गई है, उनमें राम सकल गुर्जर, नितिन अग्रवाल और याशर शाह भी 40 साल से कम उम्र वाले हैं। यहां भी एक तिहाई युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया गया। सभी राज्यमंत्री से स्वतंत्र प्रभार के मंत्री बने हैं।
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तब यूथ माना अब सियासत का दबंग
अरविंद कुमार सिंह गोप, कमाल अख्तर और विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह जब इस सरकार में पहली बार शामिल हुए थे, तब सीएम की यूथ बिग्रेड में शामिल थे। तब ये सभी 45 साल के दायरे में थे। अब सीएम ने इन्हें सरकार के साथ सियासत का भी दबंग मानते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया। कमाल और पंडित तो राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट मंत्री बने हैं। गोप पहले स्वतंत्र प्रभार के मंत्री रहे हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की चुनौती के लिए दबंगों को मौका

Akhilesh Yadav gives opportunity to youth.

सियासी समीकरणों पर नजर रखने वालों का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़े जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री को इस चुनौती को निपटने के लिए ‘यंग के साथ दबंग’ का ख्याल रखना पड़ा। पवन पांडेय को मुख्यमंत्री एक बार बर्खास्त कर चुके थे। मगर, फैजाबाद में उनकी दबंगई के किस्से आम हैं।

शायद यही वजह रही कि मित्रसेन यादव के न रहने के बाद पवन को फैजाबाद में फिर से पैर जमाने का मौका दिया है। प्रधानी चुनाव इनकी पहली परीक्षा होगी। गोंडा में पंडित सिंह सपा मुखिया के खास माने जाते हैं। दबंगई में वे एक बार बर्खास्त भी हो गए थे। पर, इसे सपा की मजबूरी ही कहेंगे कि जिले में पंडित सिंह के अलावा सपा के पास कोई दूसरा ऐसा नेता नहीं है जिस पर मुलायम परिवार यह भरोसा कर सके कि वे दलबदल नहीं करेंगे।

इसी वजह से भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह से निजी ताल्लुकात की चर्चा से योगेश प्रताप सिंह को हटाकर पंडित सिंह को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। अब गोंडा का जिला पंचायत अध्यक्ष जिताने की कमान पंडित सिंह के हाथों में होगी। वहां भाजपा का अध्यक्ष जिताने की जिम्मेदारी ब्रजभूषण के हाथ होगी। माना जा रहा है कि ब्रजभूषण की दबंगई से निपटने के लिए मुलायम ने पंडित का कद बढ़ाया है।

बहराइच में वकार अहमद शाह की बीमारी के बाद सपा की सियासत यासर के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। कम उम्र और राज्यमंत्री का दर्जा होने की वजह से विरोधी दलों के सामने उनका कद हल्का पड़ जाता था। सरकार ने यासर को स्वतंत्र प्रभार का दर्जा देकर उनका वजन बढ़ा दिया है। बाराबंकी में गोप, हरदोई में सपा महासचिव नरेश अग्रवाल की सदारत में नितिन और अमरोहा में कमाल अख्तर का सिक्का चलता है। पर, ये सियासी सुर्खियों से दूर रहने की कोशिश करते हैं।

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