महिलाओं के 'सम्मान' को अखिलेश ने लिखा खत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं रेप और हत्याकांड की वजह से हर ओर से घिरी सपा सरकार ने महिलाओं को तेजी से न्याय दिलाने की ओर ठोस कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई. चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखकर हर जिले में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना पर सहमति मांगी है।
सीएम बदायूं कांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट से कराने का ऐलान पहले ही कर चुके हैं।
सीएम ने क्या लिखा पत्र में
सीएम ने पत्र में कहा है कि सरकार महिलाओं के सम्मान व सुरक्षा को प्रतिबद्ध है। दुर्भाग्यवश असामाजिक तत्वों द्वारा महिलाओं के प्रति आपराधिक घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं, जिसे कठोरता से नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
सीएम ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उनकी तत्काल विवेचना कराकर संबंधित मुकदमों के जल्द से जल्द निस्तारण की जरूरत बताई है।
उन्होंने कहा कि ऐसा होने से दोषियों को शीघ्र दंडित किया जा सकेगा। सीएम ने मुख्य न्यायाधीश से प्रदेश के हर जिले में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव पर सहमति देने का आग्रह किया है।
2000 में हुई थी फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना
बताते चलें कि प्रदेश में 11वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर सूबे में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की गई थी।
वर्ष 2000 से 2011 तक इसके लिए सहायता मिली। 2011 में ग्रांट मिलना बंद हुई तो फास्ट ट्रैक कोर्ट खत्म हो गईं।
अब मुख्यमंत्री ने बदायूं रेप और दोहरे हत्याकांड की वजह से एक बार फिर महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की पहल की है।