फजीहत के बाद अखिलेश ने केंद्र को भेजी चिट्ठी
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केंद्रीय बिजली तथा कोयला राज्यमंत्री पीयूष गोयल के बयान से हुई फजीहत के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश ने बिजली समस्या पर केंद्र को पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को केंद्रीय बिजली तथा कोयला राज्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रदेश में एमओयू के जरिये प्रस्तावित 7040 मेगावाट क्षमता के सात बिजलीघरों के लिए दीर्घकालीन कोल लिंकेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
गोयल को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार व नौ निजी कंपनियों के बीच 10,340 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इन कंपनियों को बिजली परियोजना लगाने के लिए 25 वर्ष की लंबी अवधि के लिए कोल लिंकेज की आवश्यकता है। कोयला मंत्रालय की लिंकेज कमेटी की बैठक लंबे समय से नहीं हुई है।
जुलाई 2015 से चालू की जाएगी ललितपुर इकाई
हालांकि कंपनियों द्वारा समय से अपने-अपने प्रार्थनापत्र दिए गए थे लेकिन अभी तक इनको कोल लिंकेज उपलब्ध कराने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लिंकेज के आवंटन में देरी की वजह से 1320 मेगावाट के संडीला तथा 1980 मेगावाट के ललितपुर विस्तार परियोजना से कंपनियों ने हाथ खींच लिया है।
शेष सात परियोजनाओं में से 1980 मेगावाट की ललितपुर परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है, ताकि इसकी 660 मेगावाट की पहली इकाई जुलाई 2015 से चालू की जा सके।
गौरतलब है कि बिजली की समस्या पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान जारी है। जहां राज्य सरकार केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में कोयला न उपलब्ध करवाने का आरोप लगा रही है। वहीं, केंद्र का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने राज्य की बिजली समस्या का अभी तक जिक्र ही नहीं किया है।
ऊर्जा मंत्री के बयान से हुई थी फजीहत
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बिजली को लेकर मचे हाहाकार पर केंद्रीय ऊर्जा एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को यूपी सरकार पर पलटवार किया था।
उन्होंने यूपी की बिजली समस्या के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह खुद ही सहयोग नहीं कर रही है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था का आलम यह है कि यहां ठेकेदार भी काम करना नहीं चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री रविवार को दिल्ली से टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 13 राज्यों के पत्रकारों से रूबरू हुए थे। उत्तर प्रदेश की बिजली समस्या पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में पीयूष गोयल ने कहा कि यहां की समस्या को लेकर हम संजीदा हैं।
हमने कई बार मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। शायद मुख्यमंत्री ज्यादा व्यस्त थे। कानून-व्यवस्था की समस्या यूपी में ज्यादा है, शायद इसीलिए मुख्यमंत्री बिजली पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
सर्वाधिक कोटा यूपी का
ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि उत्तर प्रदेश को पूरे देश में सबसे ज्यादा बिजली का कोटा मिलता है। यहां 6384 मेगावाट बिजली सेंट्रल कोटे से दी जाती है।
यूपी से 73 सांसद भाजपा के हैं, लेकिन हमें अफसोस है कि हम यूपी के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि प्रदेश में बिजली संकट है लेकिन यूपी सरकार की ओर से बिजली क्षेत्र के एक भी प्रस्ताव केंद्र नहीं आते हैं।
गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र सरकार काफी कुछ करना चाहती है लेकिन प्रदेश सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा। सोलर पावर प्लांट के लिए भी यूपी सरकार जमीन नहीं दे रही।
उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने 30 मई को कम बिजली देने के आरोप लगाए। हमने अगले ही दिन से 377 मेगावाट बिजली की व्यवस्था की, लेकिन दो-तीन दिन बिजली लेने के बाद यूपी ने इसे लेना बंद कर दिया। प्रदेश में 42 फीसदी लाइन लॉस है। पहले इसे घटाने के प्रयास करने चाहिए।