माया से भी फिसड्डी निकले सपा के टीपू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी सरकार के कामकाज का एक पैमाना उसका खजाना भी होता है। सूबे के खजाने का हाल ये है कि राजकोषीय घाटा जो लगातार दो साल में तेजी से घटा था, सपा सरकार आने के बाद बढ़ना शुरू हो गया है।
चिंताजनक बात यह है कि न सिर्फ चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा पूर्वानुमान से अधिक रहने का संकेत है बल्कि अगले वित्त वर्ष में इसे सीमित रखने के कोई उपाय नजर नहीं आ रहे हैं।
राजस्व बचत व स्वयं के कर की प्राप्ति के मोर्चे पर भी सरकार खरी नहीं उतर पा रही है।
क्या बेहिसाब बहाया जा रहा पैसा?
बसपा राज में एक समय वित्तीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का पांच प्रतिशत तक पहुंच गया था।
इसके बाद इस मोर्चे पर ध्यान देने का असर ये रहा कि इसमें कमी आई और 2011-12 में दो फीसदी तक पहुंच गया।
मगर 2012 में सपा सरकार आने के बाद घाटा फिर बढ़ने लगा है। हालांकि सरकार इसे तीन प्रतिशत के करिश्माई आंकड़े के आसपास सीमित किए हुए है।
वित्तीय मामलों के जानकार बताते हैं कि तीन प्रतिशत तक वित्तीय घाटा खास चिंता का विषय नहीं होता। मगर नई सरकार के एक साल में जिस तरह से घाटा बढ़ा है, उससे वित्तीय अनुशासन पर अंगुली उठनी शुरू हो गई है।
सरकार का अनुमान भी हुआ गलत
चालू वित्त वर्ष के लिए भी सरकार ने वित्तीय घाटे का जो अनुमान पूर्ण बजट में लगाया था वह अब आगे जा चुका है।
2013-14 के बजट में राजकोषीय घाटा 2.94 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था लेकिन पुनरीक्षित अनुमानों में इसे 2.97 तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
दिलचस्प यह है कि इस सीमा तक राजकोषीय घाटा बढ़ने के बाद भी सरकार ने 2014-15 में इसे कम करने का कोई उपाय किए बिना 2.52 रहने का अनुमान लगाया है।
हालांकि, यह अनुमान भी पिछली सरकार के समय में स्थिर राजस्व घाटे से ज्यादा ही है।
पूर्वानुमान भी आंकड़ों की हेराफेरी जैसे
राजस्व बचत के मोर्चे पर भी सरकार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई और पूर्वानुमान भी आंकड़ों की हेराफेरी जैसे लगते हैं। वे यथार्थ के बिल्कुल भी नजदीक नजर नहीं आते। 2012-13 में सरकार ने 5884.35 करोड़ रुपये राजस्व बचत का अनुमान लगाया था।
मगर वित्त वर्ष की समाप्ति पर पता चला कि यह5180.34 करोड़ पर ही सीमित रहा। 2013-14 के बजट में राजस्व बचत 9856.01 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था।
पुनरीक्षित अनुमान में यह 5616.75 करोड़ तक सीमित होता नजर आ रहा है। सरकार ने नए वित्त वर्ष के लिए राजस्व बचत का अनुमान लगाने में अति आशावादी रवैया अपनाया है।
उसने पुनरीक्षित अनुमानों से करीब तीन गुना राजस्व बचत की उम्मीद बंधाई है। इसी तरह 2013-14 में सरकार ने स्वयं के कर से 72193 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान लगाया था लेकिन पुनरीक्षित अनुमान में पता चला है कि इसमें 3093 करोड़ की कमी रहने वाली है।
ये है राजकोषीय घाटे का हाल
हर साल में हो रहे घाटे के प्रतिशत के हिसाब से भी अखिलेश सरकार और मायावती सरकार के फाइनेंस मैनेजमेंट को समझ सकते हैं। बताते चलें कि 2007 से लेकर 2012 के फरवरी महीने तक मायावती का शासन था। मार्च 2012 में यूपी अखिलेश के हाथ में आ गया था।
आंकड़े बता रहे हैं राजकोषीय घाटे का हाल
वर्ष--------------प्रतिशत
2008-09----------5
2009-10----------4
2010-11-----------2
2011-12-----------2
2012-13----------3
स्रोत- आंकड़े विधानसभा में सीएजी द्वारा पेश लेखे के अनुसार हैं (पेज 13- वित्तीय घाटे का प्रवाह)।