‘एटीएम लूट’ पर बुरी तरह से घिरे अखिलेश
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डालीगंज में हुई लूट और तिहरे हत्याकांड के खुलासे के लिए सीएम ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था।
एक महीना बीत जाने के बाद भी हत्यारों का कोई सुराग नहीं लग सका। इस मामले में गुरुवार को अखिलेश को विपक्षियों ने विधानसभा में घेर लिया।
इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, पुलिस प्रशिक्षण पर खास ध्यान देने की जरूरत है। 10-15 साल पहले एटीएम में चोरी नहीं होती थी। पुलिस कार्रवाई कर रही है। अपराध होने के बाद छानबीन में वक्त लगता है। पुलिस खुलासा करेगी।
फरवरी में डालीगंज में दिनदहाड़े तीन लोगों की हत्या कर 51 लाख रुपये लूटने की घटना के एक माह बीत गया, लेकिन खुद को हाईटेक बताने वाली पुलिस अभी तक दोनों बदमाशों का सुराग नहीं लगा सकी है और न ही लूटे गए रुपयों का ही पता है।
सीएम का खौफ न खुलासे की फिक्र
इस घटना के खुलासे को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अल्टीमेटम के भी 15 दिन बीत चुके हैं।
जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है, पुलिस की जांच ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। पुलिस को सीएम के अल्टीमेटम का डर तो पहले ही नहीं था, अब खुलासे की फिक्र भी नहीं दिख रही।
इन सभी के बीच, लुटरों की गोलियों से जान गंवाने वाले लोगों का परिवार इंसाफ और आर्थिक मदद की आस में रोजाना तिल-तिल मर रहा है।
तीनों के परिवारों की आर्थिक स्थिति दयनीय है। घर के कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद बाकी लोगों ने भी मुंह फेर लिया है।
इसके बावजूद मृतकों के परिवारीजनों को न तो सीएम की ओर से अब तक कोई आर्थिक मदद पहुंची है और न उन्हें कंपनी की ओर से फूटी कौड़ी ही मिली है।
वहीं, वारदात का खुलासा न होने का दर्द भी पीड़ित परिवारों की पीड़ा को और बढ़ा रही है। ‘अमर उजाला’ ने डालीगंज लूटकांड में जान गंवाने वाले दो परिवारों की स्थिति की पड़ताल की तो आक्रोश और आंसुओं के बीच बेबसी का दरिया बहता नजर आया।
27 फरवरी की वह मनहूस दोपहरी
27 फरवरी को भरी दोपहरी बाइक सवार दो बदमाशों ने डालीगंज के बाबूगंज स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर कैश भरने आई महानगर स्थित साइंटिफिक साइंस सिक्योरिटी मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के गनमैन अरुण कुमार सिंह, अवनीश शुक्ला व लोडर अनिल सिंह की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।
हत्या करने के बाद आरोपी 51 लाख रुपयों से भरा बक्सा लूट लिया था। पुलिस ने अब तक क्या किया वारदात के बाद पुलिस की 16 और एसटीएफ की एक टीम ने बाइक सवार बदमाशों की तलाश शुरू की।
बदमाशों के भागने के रूट चार्ट के आधार पर पुलिस यूनिवर्सिटी और बाबूगंज इलाके में ही कैश बॉक्स की छानबीन करती रही, जबकि चार दिन बाद कैश बॉक्स क्रिश्चियन कॉलेज के रीड हॉल ग्राउंड में पड़ा मिल गया।
पुलिस की टीमों ने पूर्वांचल के माफिया, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों और दिल्ली व इलाहाबाद में एटीएम लूटकांड में शामिल बदमाशों की भी पड़ताल की।
एसटीएफ ने सर्विलांस और मुखबिरी तंत्र झोंक दिया। हालांकि, कोई प्रयास काम न आया। पुलिस अब भी वहीं खड़ी है जहां वारदात के वक्त थी।
बेटे का उठा सरकार से भरोसा
गनमैन अरुण कुमार सिंह के बेटे एडवोकेट शिवशरण सिंह का पुलिस और सरकार से भरोसा उठ गया है।
शिवशरण कहते हैं, राजधानी में सीएम की नाक के नीचे भरी दोपहरी इतनी जघन्य वारदात हो गई और पुलिस एक महीने की जांच में भी कोई सुराग नहीं तलाश सकी है।
पुलिस और प्रशासन, दोनों के लिए यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति है। इसका मतलब यह है कि पूरा तंत्र फेल हो गया है।
मूल रूप से सीतापुर के अमिलिहा गांव निवासी शिवशरण ने बताया कि करीब तीन साल से उसका परिवार शिवनगर खदरा में कुंवर गड्ढा के पास स्थित मकान में रह रहा है।
नहीं कर सका बेटी का कन्यादान
घर पर मां के अलावा छोटी बहन रेशमी सिंह है। बड़ी बहन रूबी की शादी हो चुकी है। शिवशरण ने बताया कि रेशमी की शादी की तैयारियां चल रही थीं।
पिता का सपना था कि वह खुद कन्यादान करें, लेकिन इससे पहले ही वह लुटरों की गोलियों का निशाना बन गए।
सिस्टम पर सवाल उठाते हुए शिवशरण कहते हैं कि सरकार ने ताबड़तोड़ अपराधों के आगे घुटने टेक दिए हैं और अफसर बेअंदाज हो गए हैं।
यही वजह है कि राजधानी सहित सूबे में कानून व्यवस्था हाशिये पर चली गई है।