{"_id":"651027afccc8c09e850cd664","slug":"aiims-rae-bareli-mbbs-students-are-not-getting-bodies-for-studies-2023-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स रायबरेली: एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ाई के लिए नहीं मिल रहे हैं शव, हर साल जरुरी होती हैं चार डेड बॉडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स रायबरेली: एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ाई के लिए नहीं मिल रहे हैं शव, हर साल जरुरी होती हैं चार डेड बॉडी
Sun, 24 Sep 2023 05:42 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला संवाद, रायबरेली
अमर उजाला संवाद, रायबरेली
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 24 Sep 2023 05:42 PM IST
सार
मेडिकल एजुकेशन में मृत देह का खासा महत्व होता है, क्योंकि छात्र इस पर रिसर्च करते हैं। पुस्तकीय ज्ञान के साथ ही मानव शरीर की संरचना की पढ़ाई के लिए मृत देह बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
एम्स रायबरेली।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को शरीर की रचना की पढ़ाई के लिए मृत लोगों के शवों की जरूरत होती है, लेकिन युग दधीचि देहदान अभियान ने पिछले 10 माह से एम्स को एक भी लाश उपलब्ध नहीं कराई। पिछले चार साल में एम्स को चार शव उपलब्ध कराए थे। एक शव एम्स को सीधे मिला। अब शव देने से इंकार करने के बाद एमबीबीएस के छात्रों के सामने संकट खड़ा हो सकता है।
विज्ञापन
मेडिकल एजुकेशन में मृत देह का खासा महत्व होता है, क्योंकि छात्र इस पर रिसर्च करते हैं। पुस्तकीय ज्ञान के साथ ही मानव शरीर की संरचना की पढ़ाई के लिए मृत देह बहुत जरूरी है। युग दधीचि देहदान अभियान के संचालक मनोज सेंगर ने पिछले साल की 06 जून, 09 जून, 19 अक्तूबर और 12 नवंबर को रूप नारायण, कुंवर बिहारी, रामकली और बुद्धिराम के शवों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए एम्स को उपलब्ध करवाया था। एम्स को जिले से भी सीधे एक शव मिला था।
विज्ञापन
अभियान के तहत पिछले करीब 10 माह से एक भी शव एम्स को उपलब्ध नहीं कराया गया। अभियान के संचालक की नाराजगी के कारण एम्स को लोगों के मृत देह नहीं मिल पा रहे हैं। एम्स के जिम्मेदारों का दावा है कि एमबीबीएस की पढ़ाई में किसी भी स्तर पर दिक्कतें नहीं आ रही है। पढ़ाई के लिए पर्याप्त मृत देह उपलब्ध हैं। हालांकि मृत देह की जल्द ही व्यवस्था न होने से समस्या खड़ी हो सकती है।
विज्ञापन
निदेशक लिखें पत्र तो ही एम्स को देंगे मृत देह
युग दधीचि देहदान अभियान के संचालक मनोज सेंगर का कहना है कि एम्स के मानव संरचना विभाग के प्रमुख से देहदान संकल्प लेने वाले लोगों के लिए सम्मान कार्यक्रम आयोजित कराने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। हमने रायबरेली में 50 देह दानियों को तैयार किया और कानपुर से चार शवों को लाकर एम्स को उपलब्ध कराया। इसके बाद भी अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक एम्स के निदेशक की ओर से पत्र नहीं मिलेगा, तब तक एक भी मृत देह रायबरेली एम्स को उपलब्ध नहीं कराएंगे।
72 ने देहदान का भरा है संकल्प
एम्स में 72 से अधिक लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरा है। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए हर साल चार मृत देह की जरूरत होती है। पढ़ाई के लिए पर्याप्त मृत देह उपलब्ध है। एमबीबीएस की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की दिक्कतें नहीं हैं।-डॉ. रजत सुभ्रादास, विभागाध्यक्ष, शरीर रचना विभाग एम्स