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63वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल

Mon, 18 Nov 2013 03:41 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Mon, 18 Nov 2013 03:41 PM IST
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aided taechers on strike

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के 331 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों का धरना एवं क्रमिक भूख हड़ताल 63वें दिन भी जारी रही।

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संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. के.एस पाठक ने कहा कि डिग्री शिक्षक अपना घर छोड़कर पिछले 63 दिनों से लखनऊ में डटे हुए हैं अब उनकी हालत कूड़ा करकट बीनने वालों से बदतर हो गयी है, सरकार को उन्हे शीघ्र विनियमित कर देना चाहिए।

कानपुर विश्वविद्यालय के महामंत्री डॉ.आलोक यादव ने कहा कि डिग्री शिक्षक लोहियावादी सिद्धान्तों में विश्वास कर अहिंसक तरीके से अपने आन्दोलन को तबतक चलाएंगे जबतक सरकार सम्मान से उन्हे जीने का अधिकार नही दे देती।
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संघ के संयुक्त मंत्री डॉ डी.एस सिंह ने कहा कि स्वयं शिक्षक रहे मुलायम सिंह यादव जी की सरकार में अभी तक शिक्षकों की सुनवाई न होना आश्चर्य एवं अत्यधिक शर्म की बात है।
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आज यह शिक्षक कूड़ा करकट बीनकर अपना विरोध जता रहे हैं। अवध विश्वविद्यालय के डॉ.आरके शर्मा एवं बीएल त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र आमजन की आवाज का नाम है विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने डिग्री शिक्षकों को विनियमित करने का वादा किया था।

अगर मुख्यमंत्री जी इसे शीघ्र पूरा नही करते हैं तो उन्हे ही वादा खिलाफी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

कानपुर के डॉ.नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि जब 80 प्रतिशत भुगतान केन्द्र सरकार देने को तैयार है तब राज्य सरकार को मात्र सेक्शन-32 में संशोधन कर डिग्री शिक्षकों को आसानी से विनियमित कर देना चाहिए।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. नितेश यादव ने कहा कि संविधान में समान कार्य हेतु समान वेतन की व्यवस्था है तब सरकार को इस तरह की असमानता को जिन्दा रखना विधि एवं न्याय सम्मत नही है।

इस अन्यायपूर्ण नजरिए को शीघ्र समाप्त होना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह एवं महामंत्री डॉ. सीएम शर्मा ने कहा कि लोहिया के विचारों पर कार्य करने वाले मुख्यमंत्री शायद यह भूल गये हैं कि डॉ. लोहिया का सम्पूर्ण चिन्तन व संघर्ष शोषण व असमानता के खिलाफ ही रहा है।


ऐसे में हम शिक्षकों को सरकार शीघ्र नियमित करके लोहियावादी होने का प्रमाण प्रस्तुत करना चाहिए। काशी विद्यापीठ से आए शिक्षकों ने कहा कि यह आन्दोलन जनआन्दोलन का रूप ले चुका है रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।

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