यूपीः टीचर्स की नौकरी को लेकर आई बड़ी खुशखबरी
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राज्य सरकार एक बार फिर सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में रखे गए तदर्थ शिक्षकों को नियमित करने जा रही है। इस बार 6 अगस्त 1993 से लेकर 30 दिसंबर 2000 तक रखे गए शिक्षकों को नियमित करने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से शासन को भेजे प्रस्ताव के मुताबिक इनकी संख्या करीब 1934 है।
इनको नियमित करने से राज्य सरकार के ऊपर कोई खर्च नहीं आएगा, क्योंकि इनको नियुक्ति के समय से वही वेतनमान दिया जा रहा है जो सरकारी शिक्षकों को मिलता है। निदेशालय के इस प्रस्ताव पर उच्चाधिकारियों की बैठक में सहमति बनी है। जल्द इसे कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी है।
प्रदेश में राजकीय के साथ सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज हैं। राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के पास है और सहायता प्राप्त में संबद्ध प्राइमरी में (कक्षा 8) तक प्रबंधक नियुक्ति कर सकता है।
रिटायर शिक्षकों की जगह रखे जाएंगे तदर्थ शिक्षक
इससे ऊपर की भर्ती का अधिकार चयन बोर्ड के पास है। प्रदेश में वर्ष 1981 में कठिनाई निवारण अधिनियम बनाते हुए कॉलेज के प्रबंधकों को यह अधिकार दिया गया कि वे रिटायर होने वालों के स्थान पर तदर्थ शिक्षक रख सकते हैं। शर्त यह रखी गई कि यह छात्र हित में होना चाहिए।
इसके आधार पर कॉलेज प्रबंधकों ने रिटायर होने वालों के स्थान पर तदर्थ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमति लेकर करनी शुरू कर दी।
प्रदेश में तदर्थ शिक्षकों को अब तक तीन चरणों में नियमित किया जा चुका है। पहली बार 12 जून 1985, दूसरी बार 6 अप्रैल 1991 व तीसरी बार 5 अगस्त 1993 तक के तदर्थ शिक्षकों को नियमित किया जा चुका है।
राज्य सरकार को जब लगा कि कठिनाई निवारण अधिनियम का कॉलेज प्रबंधन फायदा उठा रहे हैं तो 30 दिसंबर 2000 को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 में दी गई धारा 18 को संशोधित कर कठिनाई निवारण अधिनियम के तहत प्रबंधकों को तदर्थ नियुक्ति का दिया गया अधिकार समाप्त कर दिया गया। इसलिए 30 दिसंबर 2000 तक नियुक्ति पाने वाले तदर्थ शिक्षकों को ही नियमित करने की तैयारी है।