एलडीएः 10 कंपनियों को अब नहीं मिलेगा नया काम
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एलडीए ने मौजूदा समय में प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं छह कंपनियों के अलावा चार और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके लिए औपचारिक आदेश भी वीसी ने बुधवार को कर दिया। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई, उनमें दक्षिण भारत के एक मुख्यमंत्री से जुड़ी इंदु प्रोजेक्ट्स भी है। यह पारिजात अपार्टमेंट बना रही है, जिसमें देरी के साथ गुणवत्ता की शिकायतें भी आवंटी कर रहे हैं।
वहीं, काम में गुणवत्ता न देने पर पूर्व में काम खत्म कर चुकी एलएंडटी, एनसीसी का भी पंजीकरण अस्थाई रूप से निरस्त कर दिया गया है। मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि वीसी प्रभु एन सिंह के आदेश के बाद अब कोई भी कंपनी एलडीए में तब तक नया काम नहीं कर पाएगी, जब तक कि पुराने को खत्म नहीं कर देती है।
वहीं, जो कंपनियां काम खत्म भी कर चुकी हैं, उन्हें भी अपने प्रोजेक्ट में आ रही शिकायतें दूर करनी होंगी। जिन कंपनियों के काम चालू हैं उनमें इंदु प्रोजेक्ट्स, सिंटेक्स लिमिटेड, प्रताप हाइट्स, पवनसुत, एशिया कंस्ट्रक्शन और मार्ग कंस्ट्रक्शन हैं। एशिया कंस्ट्रक्शन और प्रताप हाइट्स को क्रमश: सृष्टि और स्मृति का काम पूरा करने के लिए मार्ग से प्रोजेक्ट छीनकर दिया गया था। शुरू में काम ठीक करने के बाद अब दोनों ही कंपनियां इसमें ढिलाई कर रही हैं। सभी को छह महीने का समय दिया गया। इतने समय में पूर्व के काम खत्म करने होंगे।
नौ जुलाई 2019 को खबर प्रकाशित कर ‘अमर उजाला’ ने एलडीए के इस फैसले का खुलासा किया था। इसका आदेश बुधवार को वीसी ने जारी कर दिया है। कंपनियों को बृहस्पतिवार को नोटिस भेजा जाएगा।
किस कंपनी के पास कौन सा काम
ठेकेदार कंपनी मौजूदा प्रोजेक्ट
इंदु प्रोेजेक्ट पारिजात अपार्टमेंट
सिंटेक्स पंचशील, सुलभ आवास, देवपुर पारा योजना
प्रताप हाइट्स स्मृति अपार्टमेंट व प्रधानमंत्री आवास बसंतकुंज
पवनसुत मॉडल सड़क, सप्रू मार्ग
एशिया कंस्ट्रक्शन सृष्टि अपार्टमेेंट
मार्ग कंस्ट्रक्शन सरगम, स्मृति अपार्टमेंट
एलएंडटी रिवरव्यू योजना के अपार्टमेंट
एनसीसी सरयू अपार्टमेेंट
ओटिस विभिन्न अपार्टमेंट
जॉहन्सन पारिजात सहित विभिन्न अपार्टमेंट
प्रोजेक्ट हैंडओवर के बाद दिक्कतें आई तो कार्रवाई
मुख्य अभियंता ने बताया कि एलएंडटी, एनसीसी के बनाए प्रोजेक्ट में लगातार सिविल वर्क से जुड़ी शिकायतें आ रही हैं। तीन साल में ऐसी शिकायतें आने पर बिल्डर कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। कंपनियां इन्हें चार महीने में दूर करेंगी। इसके लिए नोटिस भी दिया जा रहा है। इस बीच इन्हें किसी भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा।
वहीं, चार महीने में शिकायतें दूर नहीं हुईं तो स्थायी रूप से पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है। वहीं, लिफ्ट लगाने वाली कंपनियां ओटिस और जॉहन्सन पर भी कार्रवाई की गई है। एक साल बाद ही लिफ्ट में खामियां आने लगी हैं। 15 साल तक की लिफ्टों में ऐसा होना उचित नहीं है। अब कंपनियां नई लिफ्ट तभी आपूर्ति कर पाएंगी जब पिछली ठीक हो जाएंगी।