अस्पतालों में शुरू होंगी इमरजेंसी सेवाएं: अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी
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उत्तर प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं शुरू होंगी। सरकारी व निजी अस्पतालों के स्टाफ को कोविड-19 संक्रमण से बचाव का प्रशिक्षण देने के बाद इमरजेंसी सेवाओं को शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों, पैरामेडिकल, स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। बिना प्रशिक्षण किसी भी कर्मचारी को इमरजेंसी सेवाओं में नहीं उतारा जाएगा।
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बुधवार को बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को दो श्रेणी में बांटा गया है। एक कोविड केयर और दूसरा नॉन कोविड केयर। नॉन कोविड केयर में इमरजेंसी सेवाएं दी जाएंगी। इसके अलावा एमबीबीएस व नर्सिंग के फाइनल ईयर के छात्र-छात्राओं को भी चिकित्सा सेवा में लगाने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है। जिससे प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र को बड़ी संख्या में अतिरिक्त युवा मैन पॉवर मिलेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने प्रथम चरण में 15 जिलों में 175 हॉटस्पॉट क्षेत्र चिह्नित किए थे। यहां से 500 कोरोना पॉजिटिव सामने आए हैं। इसी तरह दूसरे चरण में 29 जिलों में जो हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं। उनमें से 119 पॉजिटिव केस सामने आए हैं।
सफल रहा हॉटस्पॉट चिह्नित कर पॉजिटिव केस ढूंढने का प्रयोग
अभी तक यूपी में हॉटस्पॉट चिह्नित करके पॉजिटिव केस ढूंढने का जो प्रयोग किया गया था, वह पूरी तरह सफल रहा है। अब भारत सरकार ने हॉटस्पॉट के यूपी मॉडल को लेकर देशभर के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है। अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव के जो केस सामने आए हैं, उनमें तब्लीगी जमात के कुल 58 से 60 फीसदी केस हैं। अभी तक जमात और उनके संपर्क में आए 2717 लोगों को चिह्नित किया गया है। इनमें से 2470 लोगों को मेडिकल क्वारंटीन में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में डॉक्टर पर हमला करने वालों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं। साथ ही एंबुलेंस के शीशे भी पथराव में टूटे हैं। इस नुकसान की वसूली भी करने के निर्देश दिए गए हैं।