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मायावती के शासनकाल में स्मारक व पार्क निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोपी तलब

Fri, 12 Feb 2021 01:32 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 12 Feb 2021 01:32 PM IST
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Accused of corruption in memorial and park construction during Mayawati's rule
बसपा प्रमुख मायावती - फोटो : अमर उजाला
बसपा सुप्रीमो मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में वर्ष 2007-11 के बीच लखनऊ व नोएडा में स्मारकों और पार्कों के निर्माण में भ्रष्टाचार के मामले में सतर्कता अधिष्ठान के चार्जशीट पर बृहस्पतिवार को एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार रॉय ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तारीख तय करते हुए आरोपियों उप्र राजकीय निर्माण निगम लि. के तत्कालीन इकाई प्रभारी अजय कुमार, इकाई प्रभारी सुनील कुमार त्यागी, तत्कालीन इकाई प्रभारी होशियार सिंह तरकर, तत्कालीन संयुक्त निदेशक व सलाहकार भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय सुहेल अहमद फारूकी, पन्नालाल यादव और अशोक सिंह को तलब किया है। इन 6 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मिल चुकी है।
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इससे पहले सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक विनोद चंद्र तिवारी की ओर से सरकारी वकील मुनेश बाबू यादव ने चार्जशीट दाखिल किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले की विवेचना में लखनऊ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष हरभजन सिंह समेत 43 सरकारी अधिकारियों और पीयूष कुमार श्रीवास्तव समेत कुल 40 आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं। इनमें से छह अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद चार्जशीट दाखिल की जा रही है। वहीं शेष 77 आरोपियों के खिलाफ बाद में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और अन्य मंत्री व आरोपियों के खिलाफ विवेचना चल रही है।
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चार्जशीट के मुताबिक वर्ष 2007-11 के बीच डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, बौद्ध विहार, इको पार्क और नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल के निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज कर जांच की गई। इस मामले में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत 18 के खिलाफ  वर्ष 2014 में गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना की गई। इसमें पता चला कि आरोपियों ने नियम विरुद्ध कंसोर्टियम प्रमुख बनाकर खनन कराकर और धन प्राप्त किया।
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पत्थरों को खदान से निकल कर राजस्थान भेज कर तराशने का निर्णय लिया गया, जबकि उसे कार्यस्थल पर तराशा जा सकता था। परंतु आरोपियों ने राजस्थान की फर्मों व ठेकेदारों से मिलीभगत करके 13 करोड़ 75 लाख 84 हजार 673 रुपये का बंदरबांट किया। अधिक दर पर पत्थर खरीदे, बिना विज्ञापन मनमाने ढंग से फर्मों का चयन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के रिश्तेदारों को कार्य देकर लाभ कमाया। कोर्ट ने विवेचना के तथ्यों जो देखने के बाद चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए आरोपियों को तलब किया है।
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