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भाजपा के 'ग्रांड शो' में मेहमान बनीं कांग्रेसी रीता!

Sun, 08 Feb 2015 01:25 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 08 Feb 2015 01:25 AM IST
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Absense of SP and BSP leaders in railway programme.

प्रदेश व केंद्र सरकार के बीच तल्खी शनिवार को यहां रेलवे के समारोह में भी सतह पर दिखी। मुख्यमंत्री या सरकार के किसी प्रतिनिधि मंत्री को तो बुलाया ही नहीं गया था, लेकिन जिन्हें बुलाया गया था, उनमें से भी कई नहीं आए। खास बात ये रही कि कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक रीता बहुगुणा जोशी मौजूद रहीं।

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सपा और बसपा के आमंत्रित सांसदों ने समारोह से दूरी बनाए रखी। मंच पर जिस तरह संभावित 14 अतिथियों के लिए सिर्फ छह कुर्सियां ही लगाई गई थीं, उससे भी पता चलता है कि रेलवे अधिकारियों को मालूम था कि किन्हें आना है और किन्हें नहीं।
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समारोह के लिए छपवाए गए कार्ड में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्र, सपा के नरेश अग्रवाल, किरनमय नंदा व अरविंद सिंह समेत सात अतिथियों के नाम तो छापे ही गए थे। जाहिर है ऐसे में कम से कम कार्ड पर छपे नामों की संख्या के बराबर तो कुर्सियां लगनी ही चाहिए थीं।
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इनके अलावा स्थानीय विधायक रीता बहुगुणा जोशी व महापौर डॉ. दिनेश शर्मा को बुलाने की पुष्टि खुद रेलवे के अधिकारियों ने की थी। उत्तराखंड के सांसद भगत सिंह कोश्यारी, विधायक व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, विधायक व भाजपा के उत्तराखंड के अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत और मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर जिस तरह समारोह में मौजूद थे, उससे भी सबित होता है कि ये सभी बुलाए जाने पर ही आए थे।

राजनाथ ने कुछ यूं दी सफाई

Absense of SP and BSP leaders in railway programme.

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को भी मंच पर रहना ही था। जाहिर है यदि सियासत न हो रही होती और रेलवे अधिकारियों को इसकी जानकारी न होती तो इन सभी 14 लोगों के लिए कुर्सियां लगतीं और उनके नाम की स्लिप चिपकी होती।

सिर्फ कांग्रेस की विधायक रीता बहुगुण जोशी को सूची से निकाल दें तो यह सरकारी समारोह पूरी तरह भाजपाई नजर आया। हालांकि इस बारे में सवालों पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सफाई दी कि सपा और बसपा के सांसदों का न आना उनकी अपनी व्यस्तता हो सकती है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों में राजनीति नहीं खोजनी चाहिए। विकास का एजेंडा सियासत से ऊपर है। मुख्यमंत्री को न बुलाए जाने के सवाल पर राजनाथ ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि रेलवे के अधिकारियों ने किसे बुलाया और किसे नहीं, लेकिन उनकी जानकारी के अनुसार, ऐसे समारोह में मुख्यमंत्री को बुलाना आवश्यक नहीं है।

महज संयोग नहीं, रणनीति का हिस्सा: साफ है कि रेलवे के समारोह में मुख्यमंत्री व प्रदेश सरकार के किसी मंत्री को बुलाया न जाना सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने यह बताने की कोशिश की है कि प्रदेश सरकार सरकारी समारोहों में अगर भाजपा के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करेगी तो केंद्र सरकार भी उसी तरह जवाब देगी।

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