मां ने बच्चों को दी दर्दनाक मौत, ईंट से कूचकर मारा!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मां के आंचल के तले तो बच्चे खुद को सबसे अधिक सुरक्षित समझते हैं, लेकिन एक मां की मानसिक स्थिति ऐसी बिगड़ी की उसने कलेजे के टुकड़े अपने दो मासूम बच्चों को ईंट से कूच डाला। इसमें एक की तो तुरंत मौत हो गई, जबकि दूसरे बच्चे ने ट्रॉमा सेंटर में दम तोड़ दिया।
एसओ ठाकुरगंज समर बहादुर यादव ने बताया कि रिंग रोड पर ठेला लगाकर सब्जी बेचने वाला कमलेश पाल कश्मीरी बाग में विक्षिप्त पत्नी विमला और बेटों कमल किशोर (5) व राम किशोर उर्फ अमर (3) के साथ रहता था।
मकान के भूतल पर कमलेश का भाई सुरेश अपनी पत्नी कुसुमा व तीन बच्चों निधि, आनंद व आदित्य के साथ रहता है। बुधवार देर शाम करीब सात बजे भोजन के दौरान कमलेश का विमला से किसी बात पर विवाद हो गया। इसके बाद कमलेश नीचे आ गया, जबकि दोनों बेटे कमल और अमर वहीं खेलने लगे।
इसी बीच किसी बात को लेकर विमला दो बच्चों को फटकारने लगी। अचानक विमला का दिमागी संतुलन काफी गड़बड़ा गया। उसने दोनों बच्चों की पिटाई शुरू करने बाद उन पर ईंट से हमला कर दिया। ताबड़तोड़ वार कर अमर को मार डाला और कमल को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
बचाने आए पड़ोसी को भी मारने की कोशिश
चीखपुकार पर पड़ोसी गजराज की पत्नी माया ने अपने घर की छत से झांका। विमला को बच्चों पर हमला करते देख शोर मचाया तो कुसुमा अपने बेटे आदित्य को साथ लेकर छत पहुंची। विमला ने आदित्य पर भी ईंट से हमला कर दिया। किसी खुद को बचाते हुए आदित्य अपनी मां को साथ लेकर गिरा।
विमला के सिर पर खून सवार देखकर उल्टे पांव लौटी कुसुमा ने बाहर से कुंडी बंद करके कमलेश को सूचना दी। आननफानन में घर पहुंचे कमलेश ने आंगन में खून से लथपथ पड़े कराह रहे कमल को उठाया और ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। जहां देर रात उसकी भी मौत हो गई।
सूचना पर पुलिस टीम पहुंची। महिला का उग्र रूप देखकर एसओ ने महिला सिपाहियों को बुलाया। चार महिला कांस्टेबल उसे पकड़ने की कोशिश करने लगीं तो खून से सनी ईंट लेकर तांडव कर रही विमला उनसे भिड़ गई। किसी तरह पुलिसकर्मियों ने विमला को काबू में लेकर हिरासत में लिया।
अचानक गर्म हो जाता था दिमाग
कमलेश ने पुलिस को बताया कि विमला से उसकी शादी आठ साल पहले हुई थी। कुछ दिनों बाद विमला का दिमागी संतुलन गड़बड़ होने की जानकारी हुई। उसका इलाज कराया। अब कभी कभार अचानक दिमाग गर्म हो जाता था। इसके चलते उसने अपनी दुधमुंही बच्ची गुड़िया को साढू़ के पास छोड़ रखा है।
घटना स्थल पर मिली आधी खाई रोटी
विमला ने बच्चों पर उस वक्त हमला किया जब वह खाना खा रहे थे। घटनास्थल पर आधी खाई हुई रोटी मिली है। रोटी से लेकर बर्तन और रसोई गैस का सिलेंडर तक खून से सने थे। पानी का रंग भी खून से लाल हो गया था। प्रत्यक्षदर्शी माया ने बताया कि विमला चिल्लाते हुए ईंट लेकर खाना खा रहे बच्चों पर टूट पड़ी।
...बाबाजी ने मरवाया है
विमला को खुद नहीं पता कि उसने क्या कर डाला है। पुलिस हिरासत में वह एक सामान्य महिला की तरह शांत बैठी रही। बीच-बीच में बड़बड़ाने लगती कि बाबाजी ने मरवाया है तो कभी पति चाहता था कि मार दो अकेले रहो। बीच-बीच में वह, मशीन चल रही है... कहकर लोगों को चौंका देती। उसकी बातों का अर्थ समझने के लिए सवाल-जवाब करते लेकिन वह खामोश हो जाती।
झाड़-फूंक कराई पर नहीं सुधरी हालत
विमला की देवरानी कुसमा ने बताया कि शादी के बाद से ही हर 15-20 दिन में पागलपन के दौरे आते थे। पहले पति को मारती थी। बच्चे हो गए तो उनकी भी पिटाई करने लगती। बकौल कुसमा, काफी झाड़-फूंक कराई लेकिन विमला की हालत में सुधार नहीं हुआ। बीते कुछ माह से इंदिरानगर में एक डॉक्टर के वहां इलाज चल रहा था।