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लखनऊ समेत 33 शहरों में जल प्रदूषण रोकने की कवायद शुरू, अपना रहे ये तरीका
Fri, 28 Dec 2018 01:16 AM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: MANISH sachan
Updated Fri, 28 Dec 2018 01:16 AM IST
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प्रदूषण
- फोटो : SELF
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प्रदेश के शहरी इलाकों में बढ़ते जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत सीवरेज सुविधा से वंचित शहरी क्षेत्र के घरों के शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट करने के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ शुरू की गई है। इन इलाकों में छोटे-छोटे ‘फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ लगाए जाएंगे। पहले चरण में 31 शहरों का चयन किया गया है। सरकार नेप्लांट लगाने के लिए 161 करोड़ 61 लाख रुपये की मंजूरी भी दे दी है।
क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र (आरसीयूईएस) के मुताबिक अमृत योजना में शामिल प्रदेश के 60 शहरों में से 25 शहरों समेत बहुत से ऐसे शहर हैं जहां 25 से 40 प्रतिशत मकान सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। इन मकानों में बने शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सेप्टिक टैंकों से सीवेज निकालकर खुले में फेंक दिया जाता है या नालों में डाल दिया जाता है, जो बहकर गंगा आदि नदियों में चला जाता है। इसकेचलते भूजल व नदियों में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है।
इससे निजात पाने के लिए ही आरसीयूईएस ने ऐसे 31 शहरों के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ तैयार की है। योजना को राज्य स्तरीय तकनीकी समिति और मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए केंद्र सरकार से पैसा भी आ चुका है। करीब 182.18 करोड़ की लागत वाली योजना की पहली किस्त के तौर पर राज्य सरकार ने 23.65 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं।
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लखनऊ व कानपुर में लागू होगा ‘को ट्रीटमेंट’ पैटर्न
लखनऊ व कानपुर में गंगा एक्शन प्लान के तहत पहले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हैं, लेकिन एसटीपी को उसकी क्षमता के मुताबिक सीवेज उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इसलिए सेप्टेज मैनेजमेंट योजना के तहत इन दोनों शहरों में सेप्टिक टैंकों के सीवेज का ट्रीटमेंट ‘को ट्रीटमेंट’ पैटर्न पर करने का फैसला किया गया है। इस पैटर्न में सेप्टिक टैंकों के सीवेज को एसटीपी से लिंक कर उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा।
यहां लगेेंगे फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
अयोध्या, गोंडा, अकबरपुर, बहराइच, सीतापुर, बस्ती, हरदोई, फर्रुखाबाद, अलीगढ़, हाथरस, शिकोहाबाद, फतेहपुर, बड़ौत, हापुड़, खुर्जा, शामली, देवरिया, बांदा, झांसी, ललितपुर, उरई, अमरोहा, बदायूं, चंदौसी, मुरादाबाद, पीलीभीत, शाहजहांपुर, आजमगढ़, जौनपुर, मऊ व मुगलसराय।
यूपी में पायलट प्रोजेक्ट केतौर पर झांसी व उन्नाव में इस तरह के प्लांट लगाने का काम शुरू किया है। देवनहल्ली (कनार्टक), राउरकेला, पुरी (उड़ीसा) व स्याना (महाराष्ट्र) में यह योजना लागू हो चुकी है, जिसके काफी बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इन शहरों की तर्ज पर यूपी में इस योजना को लागू करने का फैसला किया गया है।
- एके गुप्ता, अपर निदेशक, आरसीयूईएस
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क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र (आरसीयूईएस) के मुताबिक अमृत योजना में शामिल प्रदेश के 60 शहरों में से 25 शहरों समेत बहुत से ऐसे शहर हैं जहां 25 से 40 प्रतिशत मकान सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। इन मकानों में बने शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सेप्टिक टैंकों से सीवेज निकालकर खुले में फेंक दिया जाता है या नालों में डाल दिया जाता है, जो बहकर गंगा आदि नदियों में चला जाता है। इसकेचलते भूजल व नदियों में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है।
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इससे निजात पाने के लिए ही आरसीयूईएस ने ऐसे 31 शहरों के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ तैयार की है। योजना को राज्य स्तरीय तकनीकी समिति और मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए केंद्र सरकार से पैसा भी आ चुका है। करीब 182.18 करोड़ की लागत वाली योजना की पहली किस्त के तौर पर राज्य सरकार ने 23.65 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं।
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लखनऊ व कानपुर में लागू होगा ‘को ट्रीटमेंट’ पैटर्न
लखनऊ व कानपुर में गंगा एक्शन प्लान के तहत पहले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हैं, लेकिन एसटीपी को उसकी क्षमता के मुताबिक सीवेज उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इसलिए सेप्टेज मैनेजमेंट योजना के तहत इन दोनों शहरों में सेप्टिक टैंकों के सीवेज का ट्रीटमेंट ‘को ट्रीटमेंट’ पैटर्न पर करने का फैसला किया गया है। इस पैटर्न में सेप्टिक टैंकों के सीवेज को एसटीपी से लिंक कर उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा।
यहां लगेेंगे फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
अयोध्या, गोंडा, अकबरपुर, बहराइच, सीतापुर, बस्ती, हरदोई, फर्रुखाबाद, अलीगढ़, हाथरस, शिकोहाबाद, फतेहपुर, बड़ौत, हापुड़, खुर्जा, शामली, देवरिया, बांदा, झांसी, ललितपुर, उरई, अमरोहा, बदायूं, चंदौसी, मुरादाबाद, पीलीभीत, शाहजहांपुर, आजमगढ़, जौनपुर, मऊ व मुगलसराय।
यूपी में पायलट प्रोजेक्ट केतौर पर झांसी व उन्नाव में इस तरह के प्लांट लगाने का काम शुरू किया है। देवनहल्ली (कनार्टक), राउरकेला, पुरी (उड़ीसा) व स्याना (महाराष्ट्र) में यह योजना लागू हो चुकी है, जिसके काफी बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इन शहरों की तर्ज पर यूपी में इस योजना को लागू करने का फैसला किया गया है।
- एके गुप्ता, अपर निदेशक, आरसीयूईएस