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घाघरा में समाए छह मकान, संपर्क मार्ग भी कटा
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:31 PM IST
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राजीचौराहा/महसी (बहराइच)। घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। 24 घंटे में दो बार नदी का जलस्तर बढ़ा और कम हुआ। इस समय नदी खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर स्थिर है। लेकिन कटान तेज हो गई है। नदी की लहरों ने छह ग्रामीणों के मकानों को लील लिया है। वहीं 65 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हुई है। अभी भी बाढ़ के पानी से 16 गांव घिरे हुए हैं। वहीं 50 ग्रामीण आशियाने उजाड़कर तटबंध पर डेरा डाले हुए हैं। बाढ़ के तीसरे दिन प्रशासनिक अमले ने क्षेत्र में पहुंचकर बाढ़ व कटान पीड़ितों को राहत सामग्री का वितरण शुरू किया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि अभी कटान रोकने के उपाय नहीं हो सके हैं। जिससे लोग दहशतजदा हैं। गांवों से पलायन जारी है।
घाघरा नदी प्रतिवर्ष बरसात के समय कहर बरपाती है। इस बार भी वर्षा शुरू होने के साथ ही घाघरा की लहरें बाढ़ का सबब बन गईं। हालांकि अभी हल्की बाढ़ ने दस्तक दी है। लेकिन प्रथम चक्र में आई बाढ़ से ही हाहाकार की स्थिति बन गई। तीन दिन से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश सोनी और सुशील शुक्ला ने बताया कि रात 11 बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ना शुरू हुआ। जिसके चलते भोर में नदी का पानी छह बजे 106.216 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 106.196 मीटर मापा गया। वहीं कटान तेज हो गई है। महसी क्षेत्र का गोलागंज, जरमापुर और चुरईपुरवा गांव निशाने पर है। गोलागंज निवासी मुन्नू, परगास प्रसाद, जरमापुर के मूसुद्दीन और असगर अली तथा चुरईपुरवा के दो ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। वहीं मंगलपुरवा में ग्राम प्रधान आल्हा के मकान पर नदी थपेड़े ले रही है। अफरा-तफरी की स्थिति है। 65 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हुई है। वहीं गोलागंज संपर्क मार्ग को नदी ने काट लिया है। जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त है। 16 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। तीसरे दिन स्वास्थ्य और प्रशासनिक अमला जागा है। उपजिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार, तहसीलदार राजेश मिश्र व जिला पूर्ति अधिकारी राकेश कुमार की अगुवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने तटबंध पर स्थित बाढ़ चौकी पर खाद्यान्न का वितरण शुरू किया है। वहीं कटान में मकान विहीन हुए लोगों को पॉलीथीन भी प्रदान की गई है।
देर शाम तक नहीं लौटी एनडीआरएफ की टीम
घाघरा नदी और सरयू के मध्य बसे बरुआ कोड़र गांव में तीन दिन से 200 लोग फंसे हुए हैं। गुरुवार को निरीक्षण के बाद डीएम ने सभी को निकालकर सुरक्षित बाहर लाने का फरमान जारी किया था। जिसके चलते शुक्रवार दोपहर 12 बजे एनडीआरएफ की टीम कमांडर सुधीर कुमार की अगुवाई में बरुआ कोड़र गांव के लिए रवाना हुई। लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान कमांडर ने बताया कि गांव के लोगों से संपर्क हुआ है। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश हो रही है।
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बांटी गई राहत सामग्री
उपजिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार ने बताया कि 10 क्विंटल चावल, 10 क्विंटल गेहूं, नमक, मोमबत्ती, माचिस, बिस्किट का वितरण बाढ़ व कटान पीड़ितों में किया जा रहा है। दोपहर से अब तक 50 परिवार लाभान्वित हुए हैं। वहीं कटान प्रभावित 150 परिवारों को टेंट बनाने के लिए पॉलीथीन प्रदान की गई है।
250 लोगों का हुआ इलाज
उपजिलाधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ चौकियों पर कैंप कर रही है। सुबह से 250 बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों का परीक्षण कर उन्हें दवाइयां दी गईं। इनमें 80 फीसदी लोग वायरल, सर्दी, जुकाम, खांसी तथा फोड़े-फुंसी से परेशान मिले। सभी को दवाइयां दी गईं।
फिर डिस्चार्ज हुआ 2.41 लाख क्यूसेक पानी
घाघरा नदी में अलग-अलग बैराजों से शुक्रवार को 2.41 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। यह पानी गिरिजापुरी बैराज से महसी क्षेत्र में पहुंचने में 20 से 24 घंटा लगेगा। ऐसे में शनिवार को दोपहर बाद पुन: जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। जिससे मुश्किलें सामने आ सकती हैं। सहायक अभियंता गिरिजापुरी बैराज एसआर वर्मा ने बताया कि गिरिजापुरी बैराज से 103367 क्यूसेक, शारदा बैराज से 86185 क्यूसेक व बनबसा बैराज से 52125 क्यूसेक पानी घाघरा नदी में डिस्चार्ज हो रहा है।
जमीन खरीदकर बसाए जाएंगे कटान पीड़ित
गोलागंज व अन्य गांवों के कुछ लोगों के मकान और जमीनें कटी हैं। उन सभी ने सड़क के किनारे और तटबंध पर शरण ली है। इस मामले में उपजिलाधिकारी को जमीन चिन्हित कर उसे खरीदकर बसाने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही व्यवस्थाएं की जाएंगी। -अजयदीप सिंह, जिलाधिकारी
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घाघरा नदी प्रतिवर्ष बरसात के समय कहर बरपाती है। इस बार भी वर्षा शुरू होने के साथ ही घाघरा की लहरें बाढ़ का सबब बन गईं। हालांकि अभी हल्की बाढ़ ने दस्तक दी है। लेकिन प्रथम चक्र में आई बाढ़ से ही हाहाकार की स्थिति बन गई। तीन दिन से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश सोनी और सुशील शुक्ला ने बताया कि रात 11 बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ना शुरू हुआ। जिसके चलते भोर में नदी का पानी छह बजे 106.216 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 106.196 मीटर मापा गया। वहीं कटान तेज हो गई है। महसी क्षेत्र का गोलागंज, जरमापुर और चुरईपुरवा गांव निशाने पर है। गोलागंज निवासी मुन्नू, परगास प्रसाद, जरमापुर के मूसुद्दीन और असगर अली तथा चुरईपुरवा के दो ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। वहीं मंगलपुरवा में ग्राम प्रधान आल्हा के मकान पर नदी थपेड़े ले रही है। अफरा-तफरी की स्थिति है। 65 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हुई है। वहीं गोलागंज संपर्क मार्ग को नदी ने काट लिया है। जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त है। 16 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। तीसरे दिन स्वास्थ्य और प्रशासनिक अमला जागा है। उपजिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार, तहसीलदार राजेश मिश्र व जिला पूर्ति अधिकारी राकेश कुमार की अगुवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने तटबंध पर स्थित बाढ़ चौकी पर खाद्यान्न का वितरण शुरू किया है। वहीं कटान में मकान विहीन हुए लोगों को पॉलीथीन भी प्रदान की गई है।
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देर शाम तक नहीं लौटी एनडीआरएफ की टीम
घाघरा नदी और सरयू के मध्य बसे बरुआ कोड़र गांव में तीन दिन से 200 लोग फंसे हुए हैं। गुरुवार को निरीक्षण के बाद डीएम ने सभी को निकालकर सुरक्षित बाहर लाने का फरमान जारी किया था। जिसके चलते शुक्रवार दोपहर 12 बजे एनडीआरएफ की टीम कमांडर सुधीर कुमार की अगुवाई में बरुआ कोड़र गांव के लिए रवाना हुई। लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान कमांडर ने बताया कि गांव के लोगों से संपर्क हुआ है। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश हो रही है।
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बांटी गई राहत सामग्री
उपजिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार ने बताया कि 10 क्विंटल चावल, 10 क्विंटल गेहूं, नमक, मोमबत्ती, माचिस, बिस्किट का वितरण बाढ़ व कटान पीड़ितों में किया जा रहा है। दोपहर से अब तक 50 परिवार लाभान्वित हुए हैं। वहीं कटान प्रभावित 150 परिवारों को टेंट बनाने के लिए पॉलीथीन प्रदान की गई है।
250 लोगों का हुआ इलाज
उपजिलाधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ चौकियों पर कैंप कर रही है। सुबह से 250 बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों का परीक्षण कर उन्हें दवाइयां दी गईं। इनमें 80 फीसदी लोग वायरल, सर्दी, जुकाम, खांसी तथा फोड़े-फुंसी से परेशान मिले। सभी को दवाइयां दी गईं।
फिर डिस्चार्ज हुआ 2.41 लाख क्यूसेक पानी
घाघरा नदी में अलग-अलग बैराजों से शुक्रवार को 2.41 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। यह पानी गिरिजापुरी बैराज से महसी क्षेत्र में पहुंचने में 20 से 24 घंटा लगेगा। ऐसे में शनिवार को दोपहर बाद पुन: जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। जिससे मुश्किलें सामने आ सकती हैं। सहायक अभियंता गिरिजापुरी बैराज एसआर वर्मा ने बताया कि गिरिजापुरी बैराज से 103367 क्यूसेक, शारदा बैराज से 86185 क्यूसेक व बनबसा बैराज से 52125 क्यूसेक पानी घाघरा नदी में डिस्चार्ज हो रहा है।
जमीन खरीदकर बसाए जाएंगे कटान पीड़ित
गोलागंज व अन्य गांवों के कुछ लोगों के मकान और जमीनें कटी हैं। उन सभी ने सड़क के किनारे और तटबंध पर शरण ली है। इस मामले में उपजिलाधिकारी को जमीन चिन्हित कर उसे खरीदकर बसाने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही व्यवस्थाएं की जाएंगी। -अजयदीप सिंह, जिलाधिकारी