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आदेश के बाद भी अवैध भवनों को गिराना भूल गया आरडीए
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:32 PM IST
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रायबरेली। ये केस तो मात्र बानगी हैं। शहर में दो साल पहले 73 अवैध भवनों को गिराने के आदेश हुए और पिछले कई महीने में 10 से अधिक भवनों को गिराने के आदेश दिए गए, लेकिन इन भवनों को गिराना आरडीए भूल गया है। एक भवन को कोर्ट के आदेश पर गिराने में आरडीए खानापूरी भी कर चुका है। हालात यह हैं कि आदेश के बाद आरडीए अवैध भवनों को गिराने में रुचि नहीं ले रहा है। इससे आरडीए के अधिकारियों की कलई खुल गई है।
शहर में 80 फीसदी भवन अवैध हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही है। नोटिस और सीलिंग आदेश के बाद मामलों को रफा-दफा कर दिया जाता है। कई मामलों में कंपाउंडिंग के नाम पर अग्रिम धनराशि जमा कराकर फाइलों को दबा दिया जा रहा है। कानपुर रोड पर कृपाशंकर के भवन के सीलिंग आदेश के बाद अग्रिम धनराशि जमा कराकर भवन को सील नहीं किया गया। एकता विहार में न्यू शांती होटल के मामले में भी सीलिंग आदेश के बाद अग्रिम जमा धन कराया गया। अब तक कंपाउंडिंग का काम पूरा नहीं हो सका है।
इसके अलावा शहर में 10 से अधिक भवनों के अशमनीय अवैध भाग को गिराने के आदेश दिए गए। कई महीने बीतने के बाद भी अवैध निर्माणों को नहीं गिराया गया। आरडीए के इंजीनियरों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण कचहरी रोड पर छठवीं मंजिल पर निर्माणाधीन भवन से गिरकर दो श्रमिकों की मौत होने के बाद भी निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है। सेटिंग करके भवन मेें फिनिशिंग का काम शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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वर्जन
पिछले सप्ताह ही जॉइन किया है। जिन मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश हुए हैं, उनकी पत्रावलियों को निकलवाया जा रहा है। जल्द ही अशमनीय अवैध निर्माणों को गिरवाया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- एसके राय, सचिव रायबरेली विकास प्राधिकरण
आरडीए में दब गई ध्वस्तीकरण की फाइल
शहर में एसजेएस स्कूल के पीछे विष्णु मुरारका की ओर से बनवाए गए भवन के अशमनीय भाग को गिराने के आदेश चार महीने पहले दिए गए थे, लेकिन अब तक आरडीए की टीम अवैध निर्माण को गिराने के लिए नहीं पहुंच सकी है। चर्चा तो यहां तक है कि आरडीए में फाइल ही दब गई है।
दो श्रमिक मरे, फिर भी मंजिल नहीं गिराई
शहर के कचहरी रोड पर तीन महीने पहले किरन सिंह के भवन में छठवीं मंजिल से गिरकर दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। बिना आदेश के ही अवैध रूप से निर्माण कराया जा रहा था। इसे भी गिराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक अवैध मंजिल के निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है।
सिर्फ गिराने की हुई औपचारिकता
शहर के लखनऊ-इलाहाबाद हाईवे पर मो. मोबीन के अवैध भवन को गिराने की खानापूरी की गई। आदेश तो पूरे भवन को गिराने के हैं, लेकिन आरडीए औपचारिकता पूरी करके लौट आया। अब तक आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन कराकर काम को पूरा नहीं कराया गया है। इससे कलई खुल गई है।
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शहर में 80 फीसदी भवन अवैध हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही है। नोटिस और सीलिंग आदेश के बाद मामलों को रफा-दफा कर दिया जाता है। कई मामलों में कंपाउंडिंग के नाम पर अग्रिम धनराशि जमा कराकर फाइलों को दबा दिया जा रहा है। कानपुर रोड पर कृपाशंकर के भवन के सीलिंग आदेश के बाद अग्रिम धनराशि जमा कराकर भवन को सील नहीं किया गया। एकता विहार में न्यू शांती होटल के मामले में भी सीलिंग आदेश के बाद अग्रिम जमा धन कराया गया। अब तक कंपाउंडिंग का काम पूरा नहीं हो सका है।
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इसके अलावा शहर में 10 से अधिक भवनों के अशमनीय अवैध भाग को गिराने के आदेश दिए गए। कई महीने बीतने के बाद भी अवैध निर्माणों को नहीं गिराया गया। आरडीए के इंजीनियरों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण कचहरी रोड पर छठवीं मंजिल पर निर्माणाधीन भवन से गिरकर दो श्रमिकों की मौत होने के बाद भी निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है। सेटिंग करके भवन मेें फिनिशिंग का काम शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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पिछले सप्ताह ही जॉइन किया है। जिन मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश हुए हैं, उनकी पत्रावलियों को निकलवाया जा रहा है। जल्द ही अशमनीय अवैध निर्माणों को गिरवाया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- एसके राय, सचिव रायबरेली विकास प्राधिकरण
आरडीए में दब गई ध्वस्तीकरण की फाइल
शहर में एसजेएस स्कूल के पीछे विष्णु मुरारका की ओर से बनवाए गए भवन के अशमनीय भाग को गिराने के आदेश चार महीने पहले दिए गए थे, लेकिन अब तक आरडीए की टीम अवैध निर्माण को गिराने के लिए नहीं पहुंच सकी है। चर्चा तो यहां तक है कि आरडीए में फाइल ही दब गई है।
दो श्रमिक मरे, फिर भी मंजिल नहीं गिराई
शहर के कचहरी रोड पर तीन महीने पहले किरन सिंह के भवन में छठवीं मंजिल से गिरकर दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। बिना आदेश के ही अवैध रूप से निर्माण कराया जा रहा था। इसे भी गिराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक अवैध मंजिल के निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है।
सिर्फ गिराने की हुई औपचारिकता
शहर के लखनऊ-इलाहाबाद हाईवे पर मो. मोबीन के अवैध भवन को गिराने की खानापूरी की गई। आदेश तो पूरे भवन को गिराने के हैं, लेकिन आरडीए औपचारिकता पूरी करके लौट आया। अब तक आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन कराकर काम को पूरा नहीं कराया गया है। इससे कलई खुल गई है।