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81.4 फीसदी छात्र स्मार्टफोन से कर रहे ऑनलाइन पढ़ाई, शिक्षा विभाग ने कराया सर्वे
Sat, 08 Aug 2020 03:20 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 08 Aug 2020 03:20 PM IST
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शिक्षा विभाग की मानें तो जिले के हाईस्कूल, इंटर के 81.4 फीसदी विद्यार्थी स्मार्टफोन से पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, महज 2.1 प्रतिशत ही किसी प्रकार का संसाधन न होने से ऑनलाइन पढ़ाई से महरूम हैं। यूपी, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के छात्रों के बीच कराए गए ऑनलाइन सर्वे की रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक ने शासन को सौंपी।
जिले में यूपी बोर्ड के 9वीं से 12वीं तक करीब दो लाख छात्र हैं। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से 9वीं से 12वीं तक के करीब 80 हजार छात्र हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि करीब 70 हजार छात्रों के बीच ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था को लेकर सर्वे कराया गया था। इसमें उन्होंने बताया कि सर्वे में पाया गया कि छात्र ऑनलाइन पढ़ाई के पक्षधर हैं। कोरोना के चलते भले ही वे स्कूल न जा पा रहे हों, लेकिन पढ़ाई में उनकी रुचि है और वे ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं।
डीआईओएस ने बताया कि सर्वे अनुसार 81.4 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन और 5.7 फीसदी के पास लैपटॉप और टैबलेट है। 81 प्रतिशत छात्रों के पास टीवी है। इसमें से 28.9 प्रतिशत छात्रों के पास नेशनल चैनल है, बाकियों के पास डिश के कनेक्शन हैं। वहीं, 2.1 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जिनके पास कोई साधन नहीं है। ऐसे में माना जा सकता है कि ये फिलहाल ऑनलाइन शिक्षा से दूर है। हालांकि, सर्वे में अधिकतर निजी विद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। सरकारी स्कूलों के छात्र कम ही शामिल हुए।
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जिले में यूपी बोर्ड के 9वीं से 12वीं तक करीब दो लाख छात्र हैं। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से 9वीं से 12वीं तक के करीब 80 हजार छात्र हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि करीब 70 हजार छात्रों के बीच ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था को लेकर सर्वे कराया गया था। इसमें उन्होंने बताया कि सर्वे में पाया गया कि छात्र ऑनलाइन पढ़ाई के पक्षधर हैं। कोरोना के चलते भले ही वे स्कूल न जा पा रहे हों, लेकिन पढ़ाई में उनकी रुचि है और वे ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं।
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डीआईओएस ने बताया कि सर्वे अनुसार 81.4 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन और 5.7 फीसदी के पास लैपटॉप और टैबलेट है। 81 प्रतिशत छात्रों के पास टीवी है। इसमें से 28.9 प्रतिशत छात्रों के पास नेशनल चैनल है, बाकियों के पास डिश के कनेक्शन हैं। वहीं, 2.1 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जिनके पास कोई साधन नहीं है। ऐसे में माना जा सकता है कि ये फिलहाल ऑनलाइन शिक्षा से दूर है। हालांकि, सर्वे में अधिकतर निजी विद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। सरकारी स्कूलों के छात्र कम ही शामिल हुए।
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नि:शुल्क उपलब्ध हो वाई-फाई
डीआईओएस ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा अधिक बेहतर कैसे बनाएं, इसे ध्यान में रखकर सर्वे कराया गया था। इसमें छात्रों ने सुझाव भी दिए। अधिकतर ने कमजोर नेटवर्क की समस्या को बाधा बताया, खासकर ग्रामीण इलाकों में। छात्रों की इच्छा है कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए सरकार को नि:शुल्क वाईफाई सेवा देनी चाहिए।
सर्वे में खास-खास
- छात्रों ने ऑनलाइन शिक्षा के लिए सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक का समय बेहतर बताया।
- हर कक्षा के बाद 15 मिनट के ब्रेक को उचित ठहराया।
- हफ्ते में एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, इंग्लिश के साथ हिंदी में भी नोट्स और स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई कराने की इच्छा जताई।
- ,छात्रों ने यह भी सुझाव दिया कि हर सप्ताह ऑनलाइन टेस्ट हों और कोरोना पर भी एक अध्याय हो।
सर्वे में खास-खास
- छात्रों ने ऑनलाइन शिक्षा के लिए सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक का समय बेहतर बताया।
- हर कक्षा के बाद 15 मिनट के ब्रेक को उचित ठहराया।
- हफ्ते में एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, इंग्लिश के साथ हिंदी में भी नोट्स और स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई कराने की इच्छा जताई।
- ,छात्रों ने यह भी सुझाव दिया कि हर सप्ताह ऑनलाइन टेस्ट हों और कोरोना पर भी एक अध्याय हो।