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घाघरा में समाए छह मकान व 100 बीघा खेत
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:03 PM IST
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राजीचौराहा/घाघराघाट। घाघरा नदी खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी के निशाने पर महसी का गोलागंज कहारनपुरवा गांव आ गया है। रात से दोपहर तक नदी की लहरों ने कटान करते हुए छह ग्रामीणों के मकान को लील लिया है। 100 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हुई है। कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हुए हैं। इसके चलते नदी और खेत घर में समाहित होने के बाद कटान पीड़ित ग्रामीण तटबंध व आसपास के क्षेत्रों में सड़क के किनारे शरण ले रहे हैं।
घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि शनिवार को नदी का जलस्तर कम होते हुए 106.106 मीटर पर स्थिर हो गया है। हालांकि अभी भी नदी खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। उन्होंने कहा कि अब नदी के जलस्तर में पुन: बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। उधर नदी की कटान तेज हो गई है। नदी की लहरों ने कटान करते हुए महसी तहसील के गोलागंज कहारनुपरवा गांव को निशाने पर ले लिया है। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद, जीवनलाल, पित्तर, चुनई, फूलचंद और दीपाली के मकानों को नदी की लहरों ने लील लिया है। इस समय गांव निवासी जगलाल, सुभाष और घनश्याम के मकानों पर नदी की लहरें थपेड़े ले रही हैं। कटान निरंतर जारी है। उधर गोलागंज, कहारनुपरवा, चुरईपुरवा के निकट नदी ने कटान करते हुए 18 किसानों की 100 बीघा खेती योग्य जमीन को भी मुख्य धारा में समाहित कर लिया है। हड़कंप की स्थिति है। लेकिन कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हो सके हैं। बेबस ग्रामीण बची खुची गृहस्थी समेटकर पलायन करने को मजबूर हैं। गौरतलब हो कि इस गांव में 48 मकान थे। धीरे-धीरे 42 मकान शनिवार तक नदी में समाहित हो गए हैं। अब सिर्फ छह मकान बचे हैं। जिसके चलते शेष मकानों के ग्रामीण अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं।
शारदापुरवा चौकी पर पीड़ितों के रहेन की व्यवस्था
गोलागंज क्षेत्र में कटान पर नजर रख रहे लेखपाल रंगीलाल आर्य ने कहा कि कर्मचारियों के साथ वह निरंतर भ्रमण कर रहे हैं। लेखपाल ने कहा कि छह लोगों के मकान कटे हैं, इसकी रिपोर्ट तहसील को भेज दी गई है। मुआवजा दिलाया जाएगा। फिलहाल कटान पीड़ितों को शारदापुरवा बाढ़ चौकी पर पहुंचाकर उनके रहन-सहन की वैकिल्पक व्यवस्था करवाई गई है।
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घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि शनिवार को नदी का जलस्तर कम होते हुए 106.106 मीटर पर स्थिर हो गया है। हालांकि अभी भी नदी खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। उन्होंने कहा कि अब नदी के जलस्तर में पुन: बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। उधर नदी की कटान तेज हो गई है। नदी की लहरों ने कटान करते हुए महसी तहसील के गोलागंज कहारनुपरवा गांव को निशाने पर ले लिया है। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद, जीवनलाल, पित्तर, चुनई, फूलचंद और दीपाली के मकानों को नदी की लहरों ने लील लिया है। इस समय गांव निवासी जगलाल, सुभाष और घनश्याम के मकानों पर नदी की लहरें थपेड़े ले रही हैं। कटान निरंतर जारी है। उधर गोलागंज, कहारनुपरवा, चुरईपुरवा के निकट नदी ने कटान करते हुए 18 किसानों की 100 बीघा खेती योग्य जमीन को भी मुख्य धारा में समाहित कर लिया है। हड़कंप की स्थिति है। लेकिन कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हो सके हैं। बेबस ग्रामीण बची खुची गृहस्थी समेटकर पलायन करने को मजबूर हैं। गौरतलब हो कि इस गांव में 48 मकान थे। धीरे-धीरे 42 मकान शनिवार तक नदी में समाहित हो गए हैं। अब सिर्फ छह मकान बचे हैं। जिसके चलते शेष मकानों के ग्रामीण अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं।
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शारदापुरवा चौकी पर पीड़ितों के रहेन की व्यवस्था
गोलागंज क्षेत्र में कटान पर नजर रख रहे लेखपाल रंगीलाल आर्य ने कहा कि कर्मचारियों के साथ वह निरंतर भ्रमण कर रहे हैं। लेखपाल ने कहा कि छह लोगों के मकान कटे हैं, इसकी रिपोर्ट तहसील को भेज दी गई है। मुआवजा दिलाया जाएगा। फिलहाल कटान पीड़ितों को शारदापुरवा बाढ़ चौकी पर पहुंचाकर उनके रहन-सहन की वैकिल्पक व्यवस्था करवाई गई है।
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