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पहले गणतंत्र पर 32 हजार थी आबादी, अब हो गई साढ़े तीन लाख
Updated Thu, 25 Jan 2018 11:16 PM IST
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गोंडा। देश आज अपना 69वां गणतंत्र मना रहा है। इन 69 वर्षों में जहां शहर की आबादी सन 1950 के मुकाबले 10 गुना बढ़कर साढ़े तीन लाख तक जा पहुंची है तो वहीं बढ़ी हुई आबादी को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने वाली नगर पालिका शहरवासियों को अब तक वह सहूलियतें उपलब्ध नहीं करा पाई है जो उसे कबकी मिल जानी चाहिए। फिर चाहे वह पेयजलापूर्ति हो या फिर शहरियों के लिए कोढ़ में खाज बनी सीवर लाइन। हालांकि इन 69 वर्षों में सड़क, बिजली, शिक्षा और परिवहन की व्यवस्थाओं में एक सकारात्मक सुधार जरूर हुआ है। लेकिन साफ-सफाई और गंदे पानी की निकासी के मामले में गोंडा नगर पालिका अभी भी जिले की बाकी दो नगर पालिकाओं से काफी पीछे है। क्योंकि गोंडा में पिछले पांच साल से सीवर लाइन को लेकर न तो कोई आवाज उठी और न ही इसके प्रस्ताव की किसी ने पैरवी की। अलबत्ता साढ़े तीन लाख शहरवासियों को सबसे बड़ी राहत देने वाली इस सीवर लाइन को राजनेताओं ने बखूबी भुनाया और अब तक भुना रहे हैं।
137 साल पुरानी हो चुकी गोंडा नगर पालिका की सन 1950 में जहां कुल आबादी 32554 हुआ करती थी, तो वहीं अब इसका ग्राफ 10 गुना बढ़कर साढ़े तीन लाख पहुंच चुका है। सन 1950 के दशक में जहां गोंडा नगर पालिका में केवल 5 से 7 वार्ड हुआ करते थे तो वहीं अब इनकी तादात बढ़कर 27 हो गई है। जबकि उस समय शहर को बिजली मौजूदा वक्त के बलरामपुर से मिलती थी। लेकिन अब गोंडा शहर में स्थित बिजलीघर से ही पूरे मंडल को बिजली दी जाती है। 50 साल पहले कानून व्यवस्था के लिए शहर में मात्र एक थाना हुआ करता था। जबकि आज नगर में तीन व जिले में 17 थाने संचालित हैं। 50 साल पहले जिले की साक्षरता दर केवल 15 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 70 फीसदी हो गई है। वहीं बिना सड़क जहां लोग पहले पगडंडियों पर इक्का, तांगा से यात्रा करते थे तो आज उनकी जगह मोटर कारों की भरमार हो गई है। लेकिन इन सबके बीच शहर में लोग आज भी साफ-सफाई व गंदे पानी की निकासी के लिए जूझ रहे हैं। जिस पर न तो नगर पालिका के लोगों का ध्यान जा रहा है न ही जिला प्रशासन का।
इनसेट
गोंडा नगर में 1950 से 2018 का तुलनात्मक आंकड़े
1950 में आबादी 32554 2018 में आबादी 350000
1950 में वार्ड-7, 2018 में 27
1950 में थाना-1, 2018 में-3
1950 में साक्षरता-15 प्रतिशत, 2018 में 70 प्रतिशत
1950 में पावर हाउस-शून्य, 2018 में -5
1950 में पेयजल टंकी-1, 2018 में -25
जनसंख्या बढ़ी तो सुविधाएं बढ़ंी
जिले व नगर की जनसंख्या में बहुत वृद्घि हुई है। लेकिन उसके हिसाब से सुविधाएं भी बढ़ी हैं। नगर में सुविधाओं के लिए पाइपलाइन नए सिरे से बिछवाई जा रही है। गांवों में पानी की टंकियों की स्थापना कराई जा रही है। कई की तो हो चुकी है। पहले लोग कुओं से पानी पीते थे, अब वाटर सप्लाई से पानी की आपूर्ति होती है।
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-जेबी सिंह, डीएम गोंडा
सुविधाएं मुहैया कराना पहली प्राथमिकता
शहरवासियों को उनकी सहूलियत के लिहाज से हरसंभव सुविधाएं मुहैया कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। यह सही है कि शहर में साफ-सफाई और गंदे पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। जिसके लिए हर संभव प्रयास उसी दिन से किए जा रहे हैं, जबसे शहर में नई सरकार गठित हुई है। शहर में अगर सीवर लाइन बन जाती है तो यह गोंडा शहर के बाशिंदों के लिए एक बड़ा तोहफा होगा।
-उज्मा राशिद, चेयरमैन, गोंडा नगर पालिका
18 थाने व 44 डायल हंड्रेड से हो रही निगरानी
जिले में कानून व्यवस्था के लिए सरकार ने बहुत सारी सुविधाएं दे रखी हैं। पहले गणतंत्र के समय थानों की संख्या बहुत कम थी अब जिले में 18 थाने हो गए हैं। हर थाने में दो-दो हंड्रेड डायल के वाहन मय फोर्स मौजूद रहते हैं। पहले कागजों पर ही लिखा पढ़ी होती थी अब ऑनलाइन एफआईआर दर्ज हो रही है। सीसीटीवी से शहर व थाने लैस हो गए हैं।
-उमेश कुमार सिंह, एसपी गोंडा
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137 साल पुरानी हो चुकी गोंडा नगर पालिका की सन 1950 में जहां कुल आबादी 32554 हुआ करती थी, तो वहीं अब इसका ग्राफ 10 गुना बढ़कर साढ़े तीन लाख पहुंच चुका है। सन 1950 के दशक में जहां गोंडा नगर पालिका में केवल 5 से 7 वार्ड हुआ करते थे तो वहीं अब इनकी तादात बढ़कर 27 हो गई है। जबकि उस समय शहर को बिजली मौजूदा वक्त के बलरामपुर से मिलती थी। लेकिन अब गोंडा शहर में स्थित बिजलीघर से ही पूरे मंडल को बिजली दी जाती है। 50 साल पहले कानून व्यवस्था के लिए शहर में मात्र एक थाना हुआ करता था। जबकि आज नगर में तीन व जिले में 17 थाने संचालित हैं। 50 साल पहले जिले की साक्षरता दर केवल 15 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 70 फीसदी हो गई है। वहीं बिना सड़क जहां लोग पहले पगडंडियों पर इक्का, तांगा से यात्रा करते थे तो आज उनकी जगह मोटर कारों की भरमार हो गई है। लेकिन इन सबके बीच शहर में लोग आज भी साफ-सफाई व गंदे पानी की निकासी के लिए जूझ रहे हैं। जिस पर न तो नगर पालिका के लोगों का ध्यान जा रहा है न ही जिला प्रशासन का।
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इनसेट
गोंडा नगर में 1950 से 2018 का तुलनात्मक आंकड़े
1950 में आबादी 32554 2018 में आबादी 350000
1950 में वार्ड-7, 2018 में 27
1950 में थाना-1, 2018 में-3
1950 में साक्षरता-15 प्रतिशत, 2018 में 70 प्रतिशत
1950 में पावर हाउस-शून्य, 2018 में -5
1950 में पेयजल टंकी-1, 2018 में -25
जनसंख्या बढ़ी तो सुविधाएं बढ़ंी
जिले व नगर की जनसंख्या में बहुत वृद्घि हुई है। लेकिन उसके हिसाब से सुविधाएं भी बढ़ी हैं। नगर में सुविधाओं के लिए पाइपलाइन नए सिरे से बिछवाई जा रही है। गांवों में पानी की टंकियों की स्थापना कराई जा रही है। कई की तो हो चुकी है। पहले लोग कुओं से पानी पीते थे, अब वाटर सप्लाई से पानी की आपूर्ति होती है।
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-जेबी सिंह, डीएम गोंडा
सुविधाएं मुहैया कराना पहली प्राथमिकता
शहरवासियों को उनकी सहूलियत के लिहाज से हरसंभव सुविधाएं मुहैया कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। यह सही है कि शहर में साफ-सफाई और गंदे पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। जिसके लिए हर संभव प्रयास उसी दिन से किए जा रहे हैं, जबसे शहर में नई सरकार गठित हुई है। शहर में अगर सीवर लाइन बन जाती है तो यह गोंडा शहर के बाशिंदों के लिए एक बड़ा तोहफा होगा।
-उज्मा राशिद, चेयरमैन, गोंडा नगर पालिका
18 थाने व 44 डायल हंड्रेड से हो रही निगरानी
जिले में कानून व्यवस्था के लिए सरकार ने बहुत सारी सुविधाएं दे रखी हैं। पहले गणतंत्र के समय थानों की संख्या बहुत कम थी अब जिले में 18 थाने हो गए हैं। हर थाने में दो-दो हंड्रेड डायल के वाहन मय फोर्स मौजूद रहते हैं। पहले कागजों पर ही लिखा पढ़ी होती थी अब ऑनलाइन एफआईआर दर्ज हो रही है। सीसीटीवी से शहर व थाने लैस हो गए हैं।
-उमेश कुमार सिंह, एसपी गोंडा