फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   ढुलाई भाड़े से बढ़ेगी बिजली दर

पर्यावरण स्वच्छ रखने के लिए बढ़ानी होगी बिजली दर, 39 पैसे तक होगी बढ़ोतरी

Fri, 14 Dec 2018 01:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Dec 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
ढुलाई भाड़े से बढ़ेगी बिजली दर
demo
पर्यावरण स्वच्छ रखने के नाम पर बिजलीघरों की राख के निस्तारण पर होने वाले भारी-भरकम खर्च का बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर दरों में वृद्धि के रूप में पड़ सकता है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 25 जनवरी 2016 की अधिसूचना राज्य विद्युत उत्पादन निगम के गले की फांस बन गई है।
विज्ञापन


भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अब अधिसूचना के प्रावधानों का हवाला देकर राख की ढुलाई पर होने वाले खर्च के वहन के लिए राज्य विद्युत उत्पादन निगम पर एमओयू पर दस्तखत का दबाव बना रहा है। उत्पादन निगम के ढुलाई खर्च का वहन करने पर प्रदेश में बिजली दरों में 39 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि होेने की संभावना है। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने केंद्रीय बिजली राज्यमंत्री आरके सिंह को पत्र लिखकर अधिसूचना के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन


केंद्र ने पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए देश भर के कोयला आधारित बिजलीघरों से निकलने वाली गीली राख का निस्तारण करना अनिवार्य कर दिया है जिससे प्रदूषण न फैले। आमतौर पर इस राख का इस्तेमाल एनएचएआई नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण में करता है। केंद्र सरकार की ओर से किए गए ताजा प्रावधान के अनुसार बिजली उत्पादन गृहों को एनएचएआई को गीली राख मुफ्त में तो देनी ही होगी, 300 किलोमीटर तक के दायरे में उसकी ढुलाई पर आने वाले खर्च का भी वहन करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऊर्जा मंत्री ने केंद्रीय बिजली राज्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश में बिजलीघरों के ऐश पॉंड में मौजूदा समय लगभग 786.121 लाख टन राख एकत्र है। अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार अगर इसे खाली कराया जाता है तो सिर्फ ढुलाई के मद में उत्पादन निगम को करीब 11,037 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। साथ ही उत्पादन निगम के बिजलीघरों से प्रतिवर्ष निकलने वाली 105.56 लाख टन राख की ढुलाई पर प्रतिवर्ष 1482.15 करोड़ रुपये खर्च करना होगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं की दरों में 39 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि होने की संभावना है।

उपभोक्ताओं पर वित्तीय भार डालना जनहित में नहीं
शर्मा ने पत्र में कहा है कि केंद्र व राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत उपभोक्ताओं को अनवरत 24 घंटे सस्ती बिजली देने का संकल्प लिया है। इसलिए राख ढुलाई के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालना जनहित में नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री से मिलकर यह मुद्दा उठाया था।


उपयोगकर्ता वहन करे परिवहन खर्च
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में लिखा है कि राख के परिवहन पर होने वाले खर्च का वहन उपयोगकर्ता करे। साथ ही कोयला व लिग्नाइट आधारित तापीय परियोजनाओं के 300 किलोमीटर दायरे के भीतर सड़क निर्माण परियोजनाओं, राख आधारित उत्पादों के निर्माण या कृ षि संबंधी क्रिया-कलापों में राख की उपयोगिता अनिवार्य की जाए जिससे कृषि योग्य ऊपरी मिट्टी तथा पर्यावरण संरक्षित रहे और राख का इस्तेमाल हो सके।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed