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अब 45 और नगर निगम कर्मचारियों की जाएगी पक्की नौकरी
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नगर निगम में अभी और कर्मचारियों की जाएगी नौकरी।
- फोटो : ??? ?????
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प्रवेंद्र गुप्ता
गलत तरीके से संविदा से स्थायी किए जाने के मामले में बृहस्पतिवार को 21 कर्मचारियों की नौकरी जाने के बाद अब नगर निगम के अन्य विभागों में कार्यरत 45 और कर्मचारियों की पक्की नौकरी पर तलवार लटक गई है।
इसे लेकर गोपनीय तैयारी चल रही है। जल्द ही इनकी भी बर्खास्तगी का आदेश जारी हो जाएगा। मामले के जानकारों का कहना है कि नगर निगम से शासन तक बने गठजोड़ से पक्की नौकरी पाने वालों में ज्यादातर निगम के ही कर्मचारियों के करीबी, परिवार के और रिश्तेदार हैं।
ये सभी न तो पक्की नौकरी को लेकर कोर्ट गए थे न ही इन्हें स्थायी करने के लिए कोई प्रस्ताव बनाया गया था। इन सभी को एक शासनादेश की आड़ लेकर 2018 में संविदा से स्थायी कर दिया गया।
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ये कर्मचारी कल्याण मंडप, कैटिल कैचिंग, अभियंत्रण और अधिष्ठान सहित कई विभागों में कार्यरत हैं। अब जब मार्ग प्रकाश विभाग का मामला न्यायालय में फंसा तो नियुक्ति का यह फर्जीवाड़ा भी सामने आ गया।
इसमें पैसे का भी जमकर खेल हुआ। जानकारों का कहना है कि अब इन कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति निरस्त होगी और ये पहले की तरह संविदा पर काम करेंगे।
कुछ और कर्मचारियों को गलत तरीके से पक्की नौकरी दिए जाने का मामला पकड़ में आया है। जांच की जा रही है। जल्द ही स्थायी नियुक्ति निरस्त कर आदेश जारी किया जाएगा।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
गलत नियुक्तियों में हटाया गया बाबू
25 संविदाकर्मियों को स्थायी नियुक्ति देने के मामले में आरोपी मिले अधिष्ठान विभाग के बाबू अतहर को हटा दिया गया है। नगर आयुक्त के निर्देश पर बाबू को अपर नगर आयुक्त प्रशासन अभय पांडेय के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से स्थायी करने के मामले में पीसीएस अफसर सहित जिन छह अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी हुआ है, उसमें लिपिक अतहर भी है।
एक सेवानिवृत्त कर्मचारी पर उठ रही उंगली
गलत तरीके से पक्की नौकरी दिए जाने के मामले में अधिष्ठान विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की भी भूमिका सामने आ रही है। जानकार बताते हैं कि उसने ही यह बताया कि किस तरह नियमों की अनदेखी कर मार्ग प्रकाश विभाग के संविदाकर्मियों को पक्की नौकरी दी जा सकती है। अब 45 जिन कर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी है, इस मामले में भी उसकी भूमिका सामने आ रही है।
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गलत तरीके से संविदा से स्थायी किए जाने के मामले में बृहस्पतिवार को 21 कर्मचारियों की नौकरी जाने के बाद अब नगर निगम के अन्य विभागों में कार्यरत 45 और कर्मचारियों की पक्की नौकरी पर तलवार लटक गई है।
इसे लेकर गोपनीय तैयारी चल रही है। जल्द ही इनकी भी बर्खास्तगी का आदेश जारी हो जाएगा। मामले के जानकारों का कहना है कि नगर निगम से शासन तक बने गठजोड़ से पक्की नौकरी पाने वालों में ज्यादातर निगम के ही कर्मचारियों के करीबी, परिवार के और रिश्तेदार हैं।
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ये सभी न तो पक्की नौकरी को लेकर कोर्ट गए थे न ही इन्हें स्थायी करने के लिए कोई प्रस्ताव बनाया गया था। इन सभी को एक शासनादेश की आड़ लेकर 2018 में संविदा से स्थायी कर दिया गया।
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ये कर्मचारी कल्याण मंडप, कैटिल कैचिंग, अभियंत्रण और अधिष्ठान सहित कई विभागों में कार्यरत हैं। अब जब मार्ग प्रकाश विभाग का मामला न्यायालय में फंसा तो नियुक्ति का यह फर्जीवाड़ा भी सामने आ गया।
इसमें पैसे का भी जमकर खेल हुआ। जानकारों का कहना है कि अब इन कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति निरस्त होगी और ये पहले की तरह संविदा पर काम करेंगे।
कुछ और कर्मचारियों को गलत तरीके से पक्की नौकरी दिए जाने का मामला पकड़ में आया है। जांच की जा रही है। जल्द ही स्थायी नियुक्ति निरस्त कर आदेश जारी किया जाएगा।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
गलत नियुक्तियों में हटाया गया बाबू
25 संविदाकर्मियों को स्थायी नियुक्ति देने के मामले में आरोपी मिले अधिष्ठान विभाग के बाबू अतहर को हटा दिया गया है। नगर आयुक्त के निर्देश पर बाबू को अपर नगर आयुक्त प्रशासन अभय पांडेय के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से स्थायी करने के मामले में पीसीएस अफसर सहित जिन छह अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी हुआ है, उसमें लिपिक अतहर भी है।
एक सेवानिवृत्त कर्मचारी पर उठ रही उंगली
गलत तरीके से पक्की नौकरी दिए जाने के मामले में अधिष्ठान विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की भी भूमिका सामने आ रही है। जानकार बताते हैं कि उसने ही यह बताया कि किस तरह नियमों की अनदेखी कर मार्ग प्रकाश विभाग के संविदाकर्मियों को पक्की नौकरी दी जा सकती है। अब 45 जिन कर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी है, इस मामले में भी उसकी भूमिका सामने आ रही है।