एक ही अस्पताल में हफ्ते भर में 4 नवजातों की मौत
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तेलीबाग के जावित्री अस्पताल के नियोनैटल इंटेसिव केयर यूनिट में एक हफ्ते में चार नवजातों की मौत हो गई। आरोप है कि मौतें एनआईसीयू में संक्रमण की वजह से हुईं। रविवार को परिवारीजनों ने इसको लेकर बवाल किया तो सोमवार को सीएमओ की टीम जांच करने अस्पताल पहुंची।
लेकिन तब तक एनआईसीयू खाली करा लिया गया। टीम मरीजों के इलाज संबंधी रिकॉर्ड लेकर लौट आई। टीम ने अस्पताल के एनआईसीयू में संक्रमण फैलने की आशंका जतायी है।
हालांकि सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव का कहना है जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जावित्री अस्पताल पहुंची सीएमओ की टीम के डॉ.सईद अहमद, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रितेश द्विवेदी और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बीबी यादव ने पाया कि वहां एनआईसीयू में एक भी नवजात भर्ती नहीं था।
अस्पताल प्रशासन ने खुद इन मौतों की बात स्वीकारी है। इसके अलावा तीन अन्य नवजातों की मौत की बात कही जा रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन इसे नकार रहा है।
रविवार रात में खाली कराया गया एनआईसीयू
अस्पताल में भर्ती एक प्रसूताओं के परिवारीजनों का कहना है कि रविवार रात लगभग नौ बजे अचानक एनआईसीयू में संक्रमण फैलने की जानकारी दी गई। डॉक्टरों ने ही बच्चों को अन्य अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए कहा।
जावित्री अस्पताल प्रशासन ने एक-एककर शिशुओं को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया। रायबरेली के गुढ़ा इलाके के रहने वाले सुभांशु की पत्नी अमिता को 27 मार्च को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सुभांशु के मुताबिक28 मार्च को प्रसव पीड़ा बंद हो गई तो डॉक्टरों ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। 20 हजार रुपये जमा करा लिए गए। प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची को एनआईसीयू की जरूरत है इसे हायर सेंटर ले जाओ।
इसके बाद डॉक्टर ने बताया कि एनआईसीयू इंफेक्टेड है और बच्ची की जान को खतरा है। इसके बाद बच्ची को आलमबाग के अजंता अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया जबकि अमिता सोमवार को जावित्री अस्पताल में भर्ती रहीं।
जांच में खुल सकते हैं गहरे राज
अस्पताल सूत्रों और भर्ती मरीजों की मानें तो अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती बच्चों का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो कई और गहरे राज खुल सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि एनआईसीयू में लगातार मौतें होती रही हैं। सूत्रों का यहां तक कहना है कि रविवार को भी एनआईसीयू में भर्ती दो बच्चों की मौत इलाज के दौरान हुई थी।
जावित्री अस्पताल की एमडी डॉ. राजुल त्यागी ने दावा किया है कि नर्सरी दस साल सीनियर डॉ.एसके कालरा व उनकी टीम की देखरेख में चलती है। टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर होने के कारण कई बच्चे प्री-मेच्योर अवस्था में पैदा हो जाते हैं।
इसलिए निओनेटल यूनिट में संक्रमण की जांच के लिए कल्चर भेजा जाता है। पूरी यूनिट को गैस से फ्यूमीगेट किया जाता है। जिससे संक्रमण की आशंका को खत्म किया जा सके। इस बार दो-तीन दिन पहले ही कल्चर भेजा गया था। जिसमें कोई संक्रमण नहीं पाया गया था।
सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि जावित्री अस्पताल की जांच की जा रही है। भेजी गई टीम ने एनआईसीयू की सभी मशीनों की जांच की। कुछ दस्तावेज भी टीम साथ लाई है। जरूरत पड़ने पर एनआईसीयू में भर्ती होने वाले सभी बच्चों की पूरी जानकारी अस्पताल प्रशासन से मांगी जाएगी। गड़बड़ी या संक्रमण की शिकायत होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।