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केजीएमयू में प्रमुख सचिव के दौरे में 36 वेंटिलेटर बंद मिले
Tue, 16 Apr 2019 01:41 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Tue, 16 Apr 2019 01:41 AM IST
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- फोटो : डेमो
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वेंटिलेटर को लेकर चल रही फजीहत के बाद हाईकोर्ट से मिली फटकार पर शासन प्रशासन भी जाग गया है। हालात का जायजा लेने सोमवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे केजीएमयू पहुंचे। पड़ताल कराई तो पता चला कि यहां कुल 214 वेंटिलेटर आ चुके हैं, लेकिन सिर्फ 178 वेंटिलेटर ही चल रहे हैं।
इतना ही नहीं पल्मोनरी क्रिटिकल केयर यूनिट में जिन वेंटिलेटर का उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने किया था वे अभी बंद पड़े हैं। प्रमुख सचिव ने इन वेंटिलेटरों को चलाने के लिए 24 घंटे में कर्मचारियों की भर्ती करने का निर्देश दिया है।
वेंटिलेटरों के अभाव में एक मरीज की मौत के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगी है। इस पर 25 अप्रैल को सुनवाई है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने केजीएमयू, पीजीआई के साथ ही प्रमुख सचिव से भी जवाब मांगा है। इस पर सोमवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे केजीएमयू पहुंचे।
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उन्होंने विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। इसमें वेंटिलेटरों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बताया गया कि केजीएमयू में अब तक कुल 214 वेंटिलेटर आ चुके हैं, जिसमें 21 को पूरी तरह से कंडम घोषित किया जा चुका है, वहीं 15 खराब हैं, जिनकी मरम्मत कराई जाएगी।
इसके अलावा कुछ समय पहले जिन 14 वेंटिलेटरों का उद्घाटन हुआ था वे भी जल्द जलाए जाएंगे। बैठक में केजीएमयू वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट, सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार, एमएस प्रो. बीके ओझा, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. जीपी सिंह, रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश भी मौजूद थे।
इन विभागों के खराब पडे़े हैं वेंटिलेटर
प्रमुख सचिव के साथ हुई बैठक में यह बात सामने आई कि कुल 15 वेंटिलेटर खराब हैं। इसमें दो एनआईसीयू, चार पीआईसीयू, तीन एमआईसीयू, दो कार्डियोलॉजी, दो गैस्ट्रो, दो सीटीवीएस विभाग में हैं। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि इन वेंटिलेटरों को माहभर में दुरुस्त कराया जाए।
वेंटिलेटर चलाने के लिए नहीं हुई स्टाफ की भर्ती
इस दौरान यह बात भी सामने आई कि बीते 21 फरवरी को पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर यूनिट में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने जिन वेंटिलेटरों का उद्घाटन किया था, वे अब भी नहीं चल पा रहे हैं। यहां अभी तक वेंटिलेटरों को कनेक्शन नहीं किया जा सका है। इस पर प्रमुख सचिव ने 24 घंटे में समस्या दूर करने का निर्देश दिया। इस दौरान यह भी मुद्दा उठा कि वेंटिलेटराें के संचालन के लिए विभाग के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक भर्ती नहीं की गई है। यहां तीन संकाय सदस्य, 12 सीनियर रेजीडेंट की भर्ती की जा चुकी है, जबकि 140 नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिले हैं। इस पर प्रमुख सचिव ने 24 घंटे में 34 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती करने का निर्देश दिया। इसके साथ अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बीके ओझा को जिम्मेदारी दी गई। देर शाम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एसएन शंखवार और प्रो. ओझा ने यूनिट का निरीक्षण करने के बाद सिंक मरम्मत का कार्य मंगलवार सुबह शुरू कराने की बात कही।
आंकड़ों को लेकर होती रही है किरकिरी
केजीएमयू में वेंटिलेटरों की संख्या को लेकर कई बार किरकिरी होती रही है। इससे पहले बताया गया था कि यहां 160 वेंटिलेटर चल रहे हैं। अब पता चला कि यहां 176 वेंटिलेटर चल रहे हैं। दरअसल, 2017 में एनेस्थीसिया विभाग में कुछ वेंटिलेटर लगाए गए थे। ऐसे में पुराने वेंटिलेटरों को हटाकर नया लगा दिया गया।
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इतना ही नहीं पल्मोनरी क्रिटिकल केयर यूनिट में जिन वेंटिलेटर का उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने किया था वे अभी बंद पड़े हैं। प्रमुख सचिव ने इन वेंटिलेटरों को चलाने के लिए 24 घंटे में कर्मचारियों की भर्ती करने का निर्देश दिया है।
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वेंटिलेटरों के अभाव में एक मरीज की मौत के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगी है। इस पर 25 अप्रैल को सुनवाई है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने केजीएमयू, पीजीआई के साथ ही प्रमुख सचिव से भी जवाब मांगा है। इस पर सोमवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे केजीएमयू पहुंचे।
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उन्होंने विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। इसमें वेंटिलेटरों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बताया गया कि केजीएमयू में अब तक कुल 214 वेंटिलेटर आ चुके हैं, जिसमें 21 को पूरी तरह से कंडम घोषित किया जा चुका है, वहीं 15 खराब हैं, जिनकी मरम्मत कराई जाएगी।
इसके अलावा कुछ समय पहले जिन 14 वेंटिलेटरों का उद्घाटन हुआ था वे भी जल्द जलाए जाएंगे। बैठक में केजीएमयू वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट, सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार, एमएस प्रो. बीके ओझा, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. जीपी सिंह, रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश भी मौजूद थे।
इन विभागों के खराब पडे़े हैं वेंटिलेटर
प्रमुख सचिव के साथ हुई बैठक में यह बात सामने आई कि कुल 15 वेंटिलेटर खराब हैं। इसमें दो एनआईसीयू, चार पीआईसीयू, तीन एमआईसीयू, दो कार्डियोलॉजी, दो गैस्ट्रो, दो सीटीवीएस विभाग में हैं। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि इन वेंटिलेटरों को माहभर में दुरुस्त कराया जाए।
वेंटिलेटर चलाने के लिए नहीं हुई स्टाफ की भर्ती
इस दौरान यह बात भी सामने आई कि बीते 21 फरवरी को पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर यूनिट में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने जिन वेंटिलेटरों का उद्घाटन किया था, वे अब भी नहीं चल पा रहे हैं। यहां अभी तक वेंटिलेटरों को कनेक्शन नहीं किया जा सका है। इस पर प्रमुख सचिव ने 24 घंटे में समस्या दूर करने का निर्देश दिया। इस दौरान यह भी मुद्दा उठा कि वेंटिलेटराें के संचालन के लिए विभाग के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक भर्ती नहीं की गई है। यहां तीन संकाय सदस्य, 12 सीनियर रेजीडेंट की भर्ती की जा चुकी है, जबकि 140 नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिले हैं। इस पर प्रमुख सचिव ने 24 घंटे में 34 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती करने का निर्देश दिया। इसके साथ अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बीके ओझा को जिम्मेदारी दी गई। देर शाम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एसएन शंखवार और प्रो. ओझा ने यूनिट का निरीक्षण करने के बाद सिंक मरम्मत का कार्य मंगलवार सुबह शुरू कराने की बात कही।
आंकड़ों को लेकर होती रही है किरकिरी
केजीएमयू में वेंटिलेटरों की संख्या को लेकर कई बार किरकिरी होती रही है। इससे पहले बताया गया था कि यहां 160 वेंटिलेटर चल रहे हैं। अब पता चला कि यहां 176 वेंटिलेटर चल रहे हैं। दरअसल, 2017 में एनेस्थीसिया विभाग में कुछ वेंटिलेटर लगाए गए थे। ऐसे में पुराने वेंटिलेटरों को हटाकर नया लगा दिया गया।